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UP: छात्रों ने तैयार किया 'निदान एआई’, आंखों को स्कैन कर बताएगा होने वाली है कौन सी बीमारी
Thu, 26 Mar 2026 10:22 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 26 Mar 2026 10:22 AM IST
सार
आगरा कॉलेज के छात्रों ने ‘निदान AI’ प्रोजेक्ट विकसित किया है, जो MRI और रेटिना इमेज से गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान कर सकता है। यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है और डॉक्टरों को तेज व सटीक जांच में मदद देगी।
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निदान एआई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
तकनीक अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का माध्यम भी बनती जा रही है। इसी कड़ी में आगरा कॉलेज की फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग (एफईटी) के कंप्यूटर साइंस विभाग के छात्रों ने ''निदान एआई’ प्रोजेक्ट तैयार कर चिकित्सा के क्षेत्र में उम्मीद जगाई है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित तकनीक गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करने में सक्षम है।
इस प्रोजेक्ट को तैयार करने वाले छात्रों में से एक प्रशांत दीक्षित ने बताया कि बीटेक अंतिम वर्ष के दौरान इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया था। फिलहाल नौकरी लग गई है, अब इसे अन्य छात्र आगे ले जा रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। इसमें तीन प्रमुख मॉड्यूल विकसित किए गए हैं। पहला मॉड्यूल एमआरआई स्कैन के माध्यम से ब्रेन ट्यूमर की पहचान करता है और प्रभावित हिस्सों को अलग रंगों के जरिए दर्शाता है।
दूसरा मॉड्यूल आंखों की रेटिना इमेज के आधार पर डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा सहित करीब 14 प्रकार की बीमारियों की पहचान करता है। तीसरा मॉड्यूल फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों जैसे टीबी और निमोनिया का पता लगाने के लिए इमेज सेगमेंटेशन तकनीक का उपयोग करता है।
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एमटेक के छात्र देवांश शर्मा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कन्यूलूशनल न्यूरल नेटवर्क (सीएनएन) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें इमेज को सिस्टम में फीड करने के बाद यह खुद विश्लेषण कर परिणाम देता है।
यह तकनीक बच्चों से लेकर सभी आयु वर्ग के मरीजों के डेटा पर काम कर सकती है। प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर डॉ. अनुज पाराशर ने किया। उन्होंने कहा कि इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया है, जैसे ही सरकार की ओर से स्वीकृत होगा, इसको लागू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ‘निदान एआई’ का उद्देश्य डॉक्टरों की सहायता करना और मरीजों को तेज, सटीक व सुलभ जांच उपलब्ध कराना है, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सके। दो अन्य छात्र राहुल दीक्षित और अनुश्री शर्मा भी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहे।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में मिली पहचान
इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। डॉ. अनुज ने बताया कि ''निदान एआई'' को यूके के एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है, जिससे छात्रों के इस नवाचार को वैश्विक पहचान मिली है।
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इस प्रोजेक्ट को तैयार करने वाले छात्रों में से एक प्रशांत दीक्षित ने बताया कि बीटेक अंतिम वर्ष के दौरान इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया था। फिलहाल नौकरी लग गई है, अब इसे अन्य छात्र आगे ले जा रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। इसमें तीन प्रमुख मॉड्यूल विकसित किए गए हैं। पहला मॉड्यूल एमआरआई स्कैन के माध्यम से ब्रेन ट्यूमर की पहचान करता है और प्रभावित हिस्सों को अलग रंगों के जरिए दर्शाता है।
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दूसरा मॉड्यूल आंखों की रेटिना इमेज के आधार पर डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा सहित करीब 14 प्रकार की बीमारियों की पहचान करता है। तीसरा मॉड्यूल फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों जैसे टीबी और निमोनिया का पता लगाने के लिए इमेज सेगमेंटेशन तकनीक का उपयोग करता है।
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एमटेक के छात्र देवांश शर्मा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कन्यूलूशनल न्यूरल नेटवर्क (सीएनएन) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें इमेज को सिस्टम में फीड करने के बाद यह खुद विश्लेषण कर परिणाम देता है।
यह तकनीक बच्चों से लेकर सभी आयु वर्ग के मरीजों के डेटा पर काम कर सकती है। प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर डॉ. अनुज पाराशर ने किया। उन्होंने कहा कि इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया है, जैसे ही सरकार की ओर से स्वीकृत होगा, इसको लागू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ‘निदान एआई’ का उद्देश्य डॉक्टरों की सहायता करना और मरीजों को तेज, सटीक व सुलभ जांच उपलब्ध कराना है, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सके। दो अन्य छात्र राहुल दीक्षित और अनुश्री शर्मा भी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहे।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में मिली पहचान
इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। डॉ. अनुज ने बताया कि ''निदान एआई'' को यूके के एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है, जिससे छात्रों के इस नवाचार को वैश्विक पहचान मिली है।