अहोई अष्टमी 2021: राधाकुंड में स्नान के लिए पहुंचे दंपती, तीन डुबकी लगाने से मिलता है संतान प्राप्ति का आशीर्वाद
राधाकुंड में डुबकी लगाने की मान्यता के चलते यहां अहोई अष्टमी पर दंपती डुबकी लगाने आते हैं। पुलिस-प्रशासन ने मेले के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
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संतान प्राप्ति के लिए मन में अटूट आस्था लेकर श्रद्धालु गुरुवार की मध्यरात्रि को राधारानी कुंड में स्नान करेंगे। विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद मध्य रात्रि विशेष स्थान में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का श्रीधाम राधाकुंड आना शुरू हो गया है। प्रशासन द्वारा अहोई अष्टमी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने चार वर्ष की आयु में राधाकुंड के तट पर अपनी लीलाओं के मध्य राधाकुंड और श्यामकुंड का निर्माण किया था। पुराणों में लिखा है कि कार्तिक मास में अष्टमी के दिन राधाकुंड का निर्माण राधारानी ने अपने कंगन से किया था और कृष्णकुंड का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बंसी द्वारा। मान्यता यह भी है कि अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि को जो निसंतान दंपती हाथ पकड़ कर तीन डुबकी लगाते है और कुंड में पौंठो का फल लाल कपड़े में बांधकर दान करते है। उन्हें वर्ष भर में संतान की प्राप्ति होती है। गुरुवार की रात्रि को 11:53 बजे से विशेष स्नान प्रारंभ होगा। जो प्रातः सुबह 4 बजे तक चलेगा।
राधाकुंड और श्यामकुंड की विशेषता
राधाकुंड श्याम कुंड की मान्यता यह है कि दोनों कुंडों का जल एक दूसरे से मिले होने के बावजूद भी अलग-अलग रंग का है। राधारानी कुंड का जल सफेद जबकि भगवान श्याम सुंदर के कुंड के जल का रंग श्याम रंग का है। राधारानी का कुंड आयताकार है। भगवान श्याम सुंदर का कुंड भगवान के मुकुट जैसा आकार लिए है।
राधाकुंड में वाहनों का प्रवेश रहेगा बंद
अहोई अष्टमी मेले में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पुलिस-प्रशासन और नगर पंचायत के अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। सीओ गौरव त्रिपाठी ने बताया कि श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से परेशानी न हो इसके लिए वाहनों का प्रवेश नगर में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। महेंद्र कुमार सिंह ने बताया की नगर की खुली नालियों पर जाली लगा दी गई है। आवारा गोवंश को सरकारी गौशालाओं में भेजा गया है। बुखार का कहर: पिनाहट में बीमारी से दो बच्चों की मौत, आगरा में डेंगू मरीजों की संख्या पांच सौ के पार