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आगरा या अग्रवन: कुलपति ने कहा- 15 दिन में जो साक्ष्य मिलेंगे, शासन को भेज देंगे
Wed, 20 Nov 2019 12:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 20 Nov 2019 12:02 AM IST
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कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के पूर्व नामों के संबंध में छिड़ी बहस पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित का कहना है कि मामले में विश्वविद्यालय की भूमिका बस एक डाकिये की है। आगरा के अन्य नामों के संबंध में 15 दिन में यदि कोई साक्ष्य मिलते हैं तो उसे जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेज दिया जाएगा।
कुलपति का कहना है कि कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर लिखा था कि आगरा का पूर्व में नाम अग्रवन था। आगरा का नाम बदलकर अग्रवन किया जाए। इस पर शासन ने जिला प्रशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी।
इस पर इतिहासकार प्रो. सुगम आनंद को विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कॉलेजों के इतिहास विषय के शिक्षकों और कुछ इतिहासविदों के माध्यम से साक्ष्य जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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कुलपति का कहना है कि कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर लिखा था कि आगरा का पूर्व में नाम अग्रवन था। आगरा का नाम बदलकर अग्रवन किया जाए। इस पर शासन ने जिला प्रशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी।
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इस पर इतिहासकार प्रो. सुगम आनंद को विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कॉलेजों के इतिहास विषय के शिक्षकों और कुछ इतिहासविदों के माध्यम से साक्ष्य जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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'लोगों की टिप्पणियां मिली हैं, पर साक्ष्य नहीं'
विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुगम आनंद की ई-मेल आईडी पर आगरा के नामों के संबंध में साक्ष्य आमंत्रित किए गए हैं। मंगलवार को कुछ लोगों के ई-मेल प्राप्त हुए हैं। इसमें कबीर अग्रवाल, कुलदीप राठौर की टिप्पणियां हैं।
किसी की ओर से आगरा के पूर्व के नामों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिए गए। प्रो. सुगम आनंद का कहना है कि अभी शोध कार्य शुरू हुआ है, किसी भी नाम का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। जब तक कोई साक्ष्य नहीं मिलता, कुछ कहना ठीक नहीं होगा।
‘हमारे आगरा को आगरा ही रहने दो’
केतवाली मस्जिद में मंगलवार को हुई जमीयतुल कुरैश की बैठक में कहा गया कि आगरा का नाम बदले जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसे आगरा ही रहने दिया जाए।
जिलाध्यक्ष शरीफ कुरैशी ने कहा कि जो लोग शहर का नाम बदलने की बात करते हैं, वो पहले अपने जमीर को बदलें। उसके बाद शहर के नाम को बदलने की बात करें। हमारे शहर में बड़े-बड़े शायर पैदा हुए है। उनके सभी के नाम के साथ में अकबराबादी लिखा है।
किसी की ओर से आगरा के पूर्व के नामों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिए गए। प्रो. सुगम आनंद का कहना है कि अभी शोध कार्य शुरू हुआ है, किसी भी नाम का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। जब तक कोई साक्ष्य नहीं मिलता, कुछ कहना ठीक नहीं होगा।
‘हमारे आगरा को आगरा ही रहने दो’
केतवाली मस्जिद में मंगलवार को हुई जमीयतुल कुरैश की बैठक में कहा गया कि आगरा का नाम बदले जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसे आगरा ही रहने दिया जाए।
जिलाध्यक्ष शरीफ कुरैशी ने कहा कि जो लोग शहर का नाम बदलने की बात करते हैं, वो पहले अपने जमीर को बदलें। उसके बाद शहर के नाम को बदलने की बात करें। हमारे शहर में बड़े-बड़े शायर पैदा हुए है। उनके सभी के नाम के साथ में अकबराबादी लिखा है।