श्री पारस अस्पताल प्रकरण: पुलिस की कछुआ चाल, 48 दिन में संचालक से पुलिस ने नहीं की दोबारा पूछताछ
श्री पारस संचालक को एक बार थाने बुलाकर पुलिस ने की खानापूर्ति, नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
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श्री पारस अस्पताल कांड में पुलिस की जांच कछुआ चाल से चल रही है। 48 दिन में संचालक से एक बार के बाद दोबारा पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। न वीडियो में शामिल लोगों पर शिकंजा कसा, न वीडियो बनाने वाले से पुलिस सच्चाई उगलवा सकी। ऐसे में प्रशासन के साथ पुलिस की मंशा पर भी पूरे मामले में गंभीर सवालिया निशान लग रहा है।
श्री पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की गई। इसकी खबर किसी को नहीं थी। सात जून को संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के वायरल वीडियो से यह खुलासा हुआ। जिसमें स्वयं संचालक ने कबूला है कि मॉकड्रिल के बारे में किसी को नहीं पता थी। वीडियो वायरल हुए रविवार को 48 दिन हो गए। पुलिस को आगे की कार्रवाई के आदेश दिए भी 38 दिन बीत गए। महामारी एक्ट के अलावा संचालक के विरुद्ध आईपीसी की धारा 118 एवं 550 में मुकदमा दर्ज है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने आगे की जांच नहीं की। एक बार के बाद दोबारा संचालक को पूछताछ तक के लिए नहीं बुलाया। साथ ही पीड़ितों के प्रार्थना पत्र भी रद्दी की टोकरी में डाल दिए। उधर, जिला प्रशासन ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए गेंद पुलिस के पाले में फेंक दी है।
डीएम का कहना है कि अब जो भी कार्रवाई करनी है वो पुलिस करेगी। लेकिन पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ने से पीड़ितों में रोष है। उनका कहना है कि मामला सीधे तौर पर गैर इरादतन हत्या का बनता है। आईपीसी की धाराएं बढ़ाने की जगह पुलिस की आरोपित से मिलीभगत है। संचालक को बचाने के लिए जांच के नाम पर लीपापोती कर रही है।
ऑक्सीजन संकट में जान से खिलवाड़ का आरोप
श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन पर ऑक्सीजन कमी की अफवाह फैलाने और मृतकों की वास्तविक संख्या छिपाने के आरोप में मुकदमा दर्ज है। पीड़ितों का कहना है कि ऑक्सीजन संकट में संचालक ने भर्ती मरीजों की जान से खिलवाड़ किया। आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजने की जगह पुलिस उसे बचा रही है।
वीडियो को ध्यान से सुना तक नहीं
19 जून को एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने थाना न्यू आगरा प्रभारी को पत्र भेज कर मामले की जांच में अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र में लिखा था कि पुलिस वीडियो को ध्यान से सुने। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने वीडियो को ध्यान से सुना तक नहीं है। उन्होंने पुलिस व अस्पताल संचालक के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
11 दिन में वसूले 2.97 लाख, आठ शिकायतें, नतीजा शून्य
कोविड अस्पताल में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली का एक और मामला सामने आया है। कमला नगर निवासी जितेंद्र त्यागी का आरोप है कि 11 दिनों में ट्रांस यमुना स्थित जेडी अस्पताल ने 2.97 लाख रुपये वसूले। 35 हजार रुपये और मांग रहा है। पीड़ित ने इस मामले में डीएम से लेकर थाना पुलिस, सीएमओ व मुख्यमंत्री तक आठ शिकायत दर्ज कराई हैं। कार्रवाई के नाम पर नतीजा शून्य है। इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी जितेंद्र ने बताया कि 16 अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने पर वह उपचार के लिए जेडी अस्पताल में भर्ती हुए। 27 अप्रैल को अपनी जान बचाकर वहां से निकल आए। जिसके बाद नौ दिन सिनर्जी अस्पताल में उपचार के बाद ठीक हुए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध जांच व कार्रवाई की मांग करते हुए आमरण अनशन का एलान किया है।
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