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UP: आगरा मेट्रो पर 7.50 लाख का जुर्माना, डस्ट कंट्रोल में नियमों का उल्लंघन करने पर हुई कार्रवाई
Thu, 18 Dec 2025 12:28 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:28 PM IST
सार
आगरा मेट्रो पर 7.50 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। डस्ट कंट्रोल में नियमों का उल्लंघन करने पर ये कार्रवाई की गई है।
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आगरा मेट्रो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा मेट्रो परियोजना के निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण नियंत्रण के उपाय प्रभावी नहीं पाए जाने पर नगर निगम ने यूपी मेट्रो पर 7.50 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम–2016 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की डस्ट मिटिगेशन गाइडलाइन्स का पालन न करने पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) पर यह अर्थदंड लगाया गया है।
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर की गई। बोर्ड के अधिकारियों ने 8 दिसंबर को मेट्रो के निर्माणाधीन और एलिवेटेड सेक्शन का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि खुदाई कार्य, पाइल फाउंडेशन और सड़क किनारे तोड़े गए डिवाइडरों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
कई स्थानों पर अधूरी बैरिकेडिंग, मिट्टी के ढेर बिना ग्रीन नेट के खुले पड़े मिले, जिससे सड़क और आसपास के इलाकों में धूल फैल रही थी। पेड़-पौधों पर धूल की मोटी परत जमी थी। नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं दिखी। वॉटर स्प्रिंकलिंग, एंटी-स्मॉग गन, व्हील वॉशिंग सिस्टम और मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का उपयोग भी मानकों के हिसाब से नहीं किया जा रहा था। 15 दिसंबर को नगर निगम ने फिर से किए गए निरीक्षण में स्थिति में सुधार नहीं मिला तो इसे एनजीटी अधिनियम, 2010 के उल्लंघन की श्रेणी में माना और निगम ने जुर्माना लगा दिया।
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नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर की गई। बोर्ड के अधिकारियों ने 8 दिसंबर को मेट्रो के निर्माणाधीन और एलिवेटेड सेक्शन का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि खुदाई कार्य, पाइल फाउंडेशन और सड़क किनारे तोड़े गए डिवाइडरों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
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कई स्थानों पर अधूरी बैरिकेडिंग, मिट्टी के ढेर बिना ग्रीन नेट के खुले पड़े मिले, जिससे सड़क और आसपास के इलाकों में धूल फैल रही थी। पेड़-पौधों पर धूल की मोटी परत जमी थी। नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं दिखी। वॉटर स्प्रिंकलिंग, एंटी-स्मॉग गन, व्हील वॉशिंग सिस्टम और मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का उपयोग भी मानकों के हिसाब से नहीं किया जा रहा था। 15 दिसंबर को नगर निगम ने फिर से किए गए निरीक्षण में स्थिति में सुधार नहीं मिला तो इसे एनजीटी अधिनियम, 2010 के उल्लंघन की श्रेणी में माना और निगम ने जुर्माना लगा दिया।
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