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UP: अवैध असलहा की मंडी रहा है आगरा, शास्त्रीपुरम में पकड़ी गई थी फैक्टरी; मुंगेर से भी सप्लाई
Tue, 27 May 2025 09:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 27 May 2025 09:23 AM IST
सार
आगरा पुलिस ने अवैध असलहे के कारोबार का पर्दाफाश किया है। ये पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी कई ऐसे मामले पुलिस के सामने आ चुके हैं।
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पिस्टल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा में पहले भी कई बार अवैध असलहे पकड़े जा चुके हैं। दो माह पहले सदर पुलिस ने फिरोजाबाद से लाकर आगरा में तमंचे और पिस्टल बेचने वालों को पकड़ा था। इसके बाद फिरोजाबाद में भी इसी गैंग के सदस्य पकड़े गए थे।
एटा और मुंगेर से भी लाकर असलहे बेचे जाते हैं। सदर पुलिस ने पिछले दिनों सदर बाजार में हुई फायरिंग के मामले में आरोपियों को पकड़ा तो असलहे की खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ था। पिस्टल, तमंचे आदि पकड़े गए थे। एक युवक आगरा और अन्य दो फिरोजाबाद के थे। फिरोजाबाद के एक शस्त्र विक्रेता का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस ने फिरोजाबाद में भी आरोपियों को पकड़ा था, जो शस्त्र बेचते थे।
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एटा और मुंगेर से भी लाकर असलहे बेचे जाते हैं। सदर पुलिस ने पिछले दिनों सदर बाजार में हुई फायरिंग के मामले में आरोपियों को पकड़ा तो असलहे की खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ था। पिस्टल, तमंचे आदि पकड़े गए थे। एक युवक आगरा और अन्य दो फिरोजाबाद के थे। फिरोजाबाद के एक शस्त्र विक्रेता का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस ने फिरोजाबाद में भी आरोपियों को पकड़ा था, जो शस्त्र बेचते थे।
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करीब 8 साल पहले शास्त्रीपुरम में अवैध शस्त्र बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई थी। इसमें विदेशी शस्त्रों जैसे हूबहू शस्त्र पुलिस को मिले थे। आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। जब एसटीएफ की जांच शुरू हुई तब आशंका जताई गई कि आरोपियों के पास शस्त्र भी इसी फैक्टरी के बनाए गए हो सकते हैं। अब एसटीएफ इस मामले में जेल भेजे गए आरोपियों से भी पूछताछ कर सकती है।
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कब क्या हुआ
जुलाई 2024- पूरे मामले की मुख्यमंत्री से शिकायत की गई।
अगस्त 2024- मामले की जांच लखनऊ एसटीएफ ने आगरा एसटीएफ को सौंपी।
दिसंबर 2024- आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद दबाव बनाना शुरू हो गया।
जनवरी 2024- आरोपियों ने नोटिस भेजे और जांचकर्ता व शिकायत करने वालों को धमकाया।
मार्च 2025- आरोपियों के लिखित बयान दर्ज किए गए। पूछताछ भी की गई।
अप्रैल 2025- आरोपियों के विरुद्ध जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई।
मई 2025 - आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।
जुलाई 2024- पूरे मामले की मुख्यमंत्री से शिकायत की गई।
अगस्त 2024- मामले की जांच लखनऊ एसटीएफ ने आगरा एसटीएफ को सौंपी।
दिसंबर 2024- आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद दबाव बनाना शुरू हो गया।
जनवरी 2024- आरोपियों ने नोटिस भेजे और जांचकर्ता व शिकायत करने वालों को धमकाया।
मार्च 2025- आरोपियों के लिखित बयान दर्ज किए गए। पूछताछ भी की गई।
अप्रैल 2025- आरोपियों के विरुद्ध जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई।
मई 2025 - आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।
कारतूस कांड का खुलासा हुआ था
वर्ष 2019 में तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने लोकसभा चुनाव के दौरान शस्त्र लाइसेंस और कारतूस की खरीद बिक्री की जांच कराई थी। बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। 35 लाख कारतूसों के गायब होने बात सामने आई थी। इसके बाद शस्त्र लाइसेंस धारकों की जांच भी करवाई गई थी। उनके जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
वर्ष 2019 में तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने लोकसभा चुनाव के दौरान शस्त्र लाइसेंस और कारतूस की खरीद बिक्री की जांच कराई थी। बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। 35 लाख कारतूसों के गायब होने बात सामने आई थी। इसके बाद शस्त्र लाइसेंस धारकों की जांच भी करवाई गई थी। उनके जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।