Court Order: चर्चित अधिवक्ता हत्याकांड में कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, आरोपी को आजीवन कारावास
आगरा में चर्चित रहे अधिवक्ता अजय कुमार गौतम की हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 2017 में दो दोषियों को सजा सुनाने के बाद, एक दोषी को 19 साल बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में 19 साल पहले न्यू आगरा के भूड़ का बाग में अधिवक्ता अजय कुमार गौतम की गोली मारकर हत्या के मामले में महेश गौतम उर्फ महेश फौजी को अपर जिला जज 17 नसीमा ने दोषी पाया। उन्होंने दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये की सजा से दंडित किया है।
इस मामले में थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा न्यायिककर्मी दिनेश चंद गौतम ने लिखाया। इसमें कहा था कि वे 31 मार्च 2003 की रात दस बजे शांति नगर स्थित आवास पर भतीजे अजय कुमार गौतम और विजय कुमार गौतम के साथ खड़े थे। उसी समय दो बाइक पर रिश्तेदार अलीगढ़ के गांव पीपली निवासी उमेश गौतम, उनके भाई महेश गौतम उर्फ महेश फौजी और श्रीराम आ गए।
2003 में आरोपी लिए गए थे हिरासत में
उन्होंने आते ही भतीजे अजय पर फायर किया। उसके शोर मचाने पर आरोपी महेश ने अजय की कनपटी पर गोली मार दी। यह कहते हुए भाग गए कि पत्नी के मुकदमे में बहुत पैरवी करते हो। अजय को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान अजय की मौत हो गई। अजय अधिवक्ता थे। अप्रैल 2003 को आरोपी उमेश गौतम और श्रीराम को हिरासत में लेकर तमंचे और कारतूस बरामद किए।
2017 में दो दोषियों को सुनाई गई थी सजा
अभियोजन पक्ष ने दिनेश चंद गौतम, विजय कुमार, ओमप्रकाश, एसएचओ जय सिंह भारती, डॉ. लोकेश कुलश्रेष्ठ और सिपाही उदयवीर सिंह को गवाही के लिए पेश किया। आरोपी महेश गौतम उर्फ महेश फौजी वर्ष 2006 में न्यायिक अभिरक्षा से फरार हो जाने के कारण पत्रावली पृथक कर दी गई। आरोपी उमेश और श्रीराम को विचारण के बाद दोषी पाते हुए अप्रैल 2017 को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
पुलिस ने आरोपी महेश कुमार वर्ष 2015 में फिर पकड़ा। आरोपी तभी से जेल में निरुद्ध था। उसके भाई उमेश गौतम की शादी वादी दिनेश की भांजी हाथरस निवासी शशि गौतम से हुई थी, जिसका दहेज उत्पीड़न का मुकदमा जिला न्यायालय में चल रहा था। अधिवक्ता अजय के पैरवी करने के कारण उनकी हत्या की गई थी। मुकदमे के विचारण के बाद अपर जिला जज 17 नसीमा ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और एडीजीसी देवी सिंह सोलंकी और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर शर्मा के तर्क पर आरोपी महेश गौतम उर्फ महेश फौजी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।