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अवैध धर्मांतरण: हिंदू युवतियां और अंग बेचने वाला गिरोह, आयशा को नहीं मिली जमानत; 12 सितंबर को सुनवाई
Tue, 09 Sep 2025 08:40 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 09 Sep 2025 08:40 AM IST
सार
आगरा में अवैध धर्मांतरण का गंदा खेल खुला, तो कई राज से पर्दा उठ गया। इस गिरोह में हिंदू युवतियों के धर्म परिर्वतन कराने से लेकर मानव तस्करी औऱ अंग बेचने वाले गिरोह तक संबंध निकले। मामले में फंसी आयशा को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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अवैध धर्मांतरण गिरोह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के सदर की सगी बहनों का धर्मांतरण के मामले में जेल भेजी गई आरोपी गोवा की एसबी कृष्णा उर्फ आयशा को जमानत नहीं मिल सकी। जिला जज संजय कुमार मलिक ने प्रार्थना पत्र निरस्त करने के आदेश दिए। मामले में चार अन्य के प्रार्थना पत्र पर वादी के अधिवक्ताओं की ओर से काउंटर दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। इस पर अब 12 सितंबर को सुनवाई होगी।
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थाना सदर में सगी बहनों के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में दोनों बहनों को बरामद कर 14 आरोपियों को जेल भेजा गया था। जांच में कई तथ्य सामने आए थे। गिरोह विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण करा रहा था। युवतियों को कश्मीर ले जाया जाता था। उनका ब्रेनवाॅश किया जाता था। इसके बाद धर्मांतरण कराया जाता था। गिरोह के तार मानव तस्करी और अंग बेचने वाले गिरोह से भी सामने आए थे।
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धर्मांतरण के मामले में गुजरा भाट, गोवा की आरोपी एसबी कृष्णा उर्फ आयशा को जेल भेजा गया था। आरोपी की ओर से सत्र न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत की। वादी की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता, दीपक शर्मा, जगदीश कुमार ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया।
वहीं आरोपी की ओर से अधिवक्ता ऋषि राज चौहान, विलाल अहमद ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। वह मुकदमा में नामजद नहीं थीं। इसी मामले में आरोपी शेखर राय उर्फ हसन अली, रिथ बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम, अबू तालिब एवं पीयूष पंवार उर्फ मोहम्मद अली के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई को 12 सितंबर तय की है।