हादसों का शहर: 16 महीने में 1300 एक्सीडेंट और 500 मौतें, आगरा के ये 46 ब्लैक स्पॉट ले रहे जान
ताजनगरी आगरा में 46 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं, जहां सर्वाधिक सड़क हादसे होते हैं। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 16 महीने में 1300 एक्सीडेंट और 500 मौतें हुई हैं।
विस्तार
आगरा में शहर से लेकर देहात तक सड़कें कई बार लोगों के खून से लाल हो चुकी हैं। हर दिन दो से तीन हादसे हो रहे हैं। गत 16 महीने 500 से अधिक की जान गई, 800 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद संरक्षा के इंतजाम सिर्फ खानापूर्ति बने हैं।
सड़क हादसों को रोकने के लिए हर तीन महीने में जिला परिवहन समिति की बैठक होती है। इसमें सड़कों पर सुरक्षा के इंतजाम पर चर्चा की जाती है। आदेश पारित किए जाते हैं। मगर, अधिकारियों के मंथन के बाद भी हादसों में कोई कमी नजर नहीं आ रही है।
थाने और हादसे
सिकंदरा - 135, खंदौली - 99, एत्मादपुर - 96, मलपुरा - 81, ताजगंज - 80, एत्माद्दौला - 65, अछनेरा - 62, सदर बाजार - 60, डौकी - 60, सैंया - 57, फतेहाबाद - 49, जगदीशपुरा - 48, फतेहपुर सीकरी - 45, हरीपर्वत - 34 (पुलिस से मिला आंकड़ा)।
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झपकी से सबसे ज्यादा हादसे
अधिवक्ता केसी जैन बताते हैं कि यमुना और लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे झपकी आने की वजह से होते हैंं। कई बाद जल्दी गंतव्य पर पहुंचने के लिए लोग खुद या फिर चालक से वाहन चलवाते हैं। नींद आने पर आराम नहीं करते। इस वजह से झपकी आती है। हादसा हो जाता है। इसके अलावा शराब पीकर वाहन चलाने से भी हादसे हो रहे हैं। सड़कों पर पुलिस की चेकिंग नहीं होती है। वाहन चालकों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। जिन स्थान पर तीन से ज्यादा हादसे होते हैं, उन्हें ब्लैक स्पाट की श्रेणी में रखा जाता है। इन पर रोड इंजीनियरिंग में बदलाव कर सुरक्षा इंतजाम किए जाने होते हैं।
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46 ब्लैक स्पॉट बन रहे जानलेवा
- थाना सिकंदरा : हीरा लाल की प्याऊ (रुनकता), शेरजंग दरगाह, रेलवे पुल के नीचे, गुरुद्वारा गुरु का ताल, तेज शू कट, अरसेना कट, अरतोनी कट, सिकंदरा तिराहा, रुनकता तिराहा।
- थाना न्यू आगरा : ट्रांसपोर्ट नगर कट, लायर्स कॉलोनी कट, वाटरवर्क्स चौराहा (भगवान टाकीज से रामबाग की तरफ)।
- थाना छत्ता : वाटरवर्क्स चौराहा (रामबाग से भगवान टाकीज की तरफ)
- थाना एत्माद्दौला : झरना नाला, रॉयल कट, टेढ़ी बगिया चौराहा।
- थाना हरीपर्वत : आईएसबीटी कट, सुल्तानगंज की पुलिया, भगवान टाकीज।
- थाना सदर : रोहता नहर, मधु नगर चौराहा, प्रतापपुरा चौराहा, राजपुर चुंगी।
- थाना जगदीशपुरा : बिचपुरी नहर।
- थाना कागारौल : गढ़मुक्खा मोड़, गहर्रा की प्याऊ।
- थाना मलपुरा : नगला सेवला, झखोदा पुल, सहारा मोड़, बाद कट।
- थाना खंदौली : गांव मऊ चौराहा, इंटरचेंज, पोइया चौराहा, बगलघूंसा, झरना नाला।
- थाना जगनेर : सिद्ध बाबा मंदिर धौलपुर-भरतपुर मार्ग, सरेंधी चौराहा।
- थाना फतेहपुर सीकरी : कोरई, करहई, करहई मोड़।
- थाना एत्मादपुर : तहसील चौराहा, झरना नाला, नोएडा कट, खंदौली मार्ग चौराहा।
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तीन साल में पांच से अधिक हादसों में चिह्नित होता है ब्लैक स्पॉट
एसपी ट्रैफिक अरुण चंद के मुताबिक, मार्ग पर जिन जगह पर तीन साल के अंदर पांच से अधिक हादसे हुए होते हैं, उनको ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाता है। एक ब्लैक स्पॉट का दायरा 500 मीटर तक माना जाता है। इन रास्तों पर यह देखा जाता है कि हादसे की प्रमुख वजह क्या है। इसके बाद उसे समस्या को दूर किया जाता है, जिससे हादसे कम हो जाएं। जहां रोड इंजीनियरिंग में बदलाव की जरूरत है, वहां संबंधित विभाग के माध्यम से बदलाव किए जाते हैं। संकेतक लगाए जाते हैं। चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ब्लैक स्पाट पर हादसे कम करने को लेकर कवायद पर विचार किया जाता है। कई बार रोड इंजीनियरिंग (सड़क पर गड्ढे, मोड़ पर संकेतक नहीं होने, रोशनी नहीं होना) में कमी की वजह से हादसे होते हैं।
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