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आगरा मांगे खंडपीठ: अधिवक्ताओं ने बनाई आंदोलन की रणनीति, प्रधानमंत्री-गृहमंत्री से मिलने जाएंगे दिल्ली

Sat, 27 Nov 2021 10:55 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 27 Nov 2021 10:55 AM IST
सार

आगरा में खंडपीठ आंदोलन से शहर के पार्षदों के साथ ग्राम प्रधानों को भी जोड़ा जाएगा। शुक्रवार को उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलने जाएगा।

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Advocates will go to meet Prime Minister-Home Minister for the demand of High Court Bench in Agra
संघर्ष समिति की बैठक में अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जेवर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के शिलान्यास करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग उठाने के बाद आगे के आंदोलन की रणनीति के लिए शुक्रवार को उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अनूप कुमार शर्मा और अधर कुमार शर्मा ने बताया कि जेवर में प्रदर्शन काफी सफल रहा। 

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बैठक में तय किया गया कि प्रतिनिधिमंडल जल्द प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलने जाएगा। इसके लिए केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल का सहयोग लिया जाएगा। आंदोलन को जन आंदोलन बनाने के लिए शहर के पार्षद, ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए चार दिसंबर को पार्षदों के साथ दीवानी में बैठक की जाएगी। खंडपीठ की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले आंदोलन को और प्रभावी बनाया जाएगा। 
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ये रहे मौजूद 
बैठक में संयोजक मंडल के प्रमोद कुमार शर्मा, दुर्ग विजय सिंह भैया, उप संयोजक चौधरी अजय सिंह, सचिव हेमंत भारद्वाज, अनिल तिवारी, अमिताभ शर्मा, रामप्रकाश शर्मा, राजीव कुलश्रेष्ठ, सत्य प्रकाश सिंह, रामेंद्र पचौरी, सुनील पारासर, उमेश यादव, नरोत्तम सिंह आदि मौजूद रहे।

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'राजनीतिक कमजोरी से बेंच स्थापित नहीं हुई'
आगरा बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र बाजपेई ने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ आगरा का अधिकार है। राजनीतिक कमजोरी के चलते आज तक बेंच की स्थापना नहीं हो सकी। जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया। यह जनता के साथ विश्वासघात है।

'सस्ते-सुलभ न्याय के लिए खंडपीठ जरूरी'
यूनाइटेड बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि जनता को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके, इसके लिए खंडपीठ की स्थापना होना बहुत आवश्यक है। अन्य प्रदेशों में 300 किलोमीटर के अंदर खंडपीठ बनी हुई हैं। जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट आगरा के पक्ष में है।

'खंडपीठ आगरा का अधिकार है, हमें मिले'
आगरा बार एसोसिएशन के सचिव रामप्रकाश शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय खंडपीठ आगरा का अधिकार है, जिसकी संस्तुति जसंवत सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में की है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ अति आवश्यक है। इस मांग को सरकार को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।

'गेंद को इस पाले से उस पाले में न उछालें'
आगरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू कर केंद्र और प्रदेश सरकार को शीघ्र ही खंडपीठ की घोषणा करनी चाहिए। क्योंकि आज केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। पार्टी गेंद को इस पाले से उस पाले में नहीं उछाल सकती।

'चुनाव पर प्रलोभन देते हैं, गंभीर प्रयास नहीं'
आगरा बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि राजनीति के चलते अभी तक कोई भी सरकार खंडपीठ के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। चुनाव के समय मंत्रियों की ओर से प्रलोभन दिए जाते हैं। लेकिन खंडपीठ स्थापना के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। 

'जिले के विकास में मील का पत्थर साबित होगा'
यूनाइटेड बार एसोसिएशन के सचिव अनूप कुमार शर्मा ने कहा कि आगरा में खंडपीठ बनने से न सिर्फ जनता को जल्दी न्याय मिलेगा बल्कि आगरा सहित आसपास के जिलों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।  

'सत्ताधारी दल का बहिष्कार करेंगे'
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच के लिए अधिवक्ता 50 साल से संघर्ष कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि बेवकूफ बना रहे हैं। मुद्दे पर स्पष्ट बात नहीं की तो हम सत्ताधारी दल और चुनाव दोनों के बहिष्कार को मजबूर होंगे।  

'वोटों की राजनीति चल रही'
यूनाइटेड बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य रामेंद्र पचौरी ने कहा कि वोटों की राजनीति के चलते अभी तक की सरकारें खंडपीठ की मांग को नजरअंदाज करती रही हैं लेकिन अब समय रहते खंडपीठ की घोषणा आगरा में नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

'नोटा का विकल्प भी अपना सकते हैं हम'
आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि आगरा के जनप्रतिनिधि हाईकोर्ट बेंच के विषय पर विफल साबित हुए हैं। हाईकोर्ट बेंच की मांग पूरा नहीं करा पाते हैं तो अधिवक्ता समाज के पास नोटा का ही विकल्प रहेगा।  

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