{"_id":"6642048a144ffec1e309cfe1","slug":"advocate-in-serious-crime-cases-by-making-a-roster-mainpuri-news-c-174-1-sagr1039-117343-2024-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: गंभीर अपराध के मुकदमों में रोस्टर बनाकर पैरवी करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: गंभीर अपराध के मुकदमों में रोस्टर बनाकर पैरवी करें
Mon, 13 May 2024 05:46 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 13 May 2024 05:46 PM IST
विज्ञापन
गंभीर अपराध के मुकदमों में रोस्टर बनाकर पैरवी करें
-डीजीसी फौजदारी ने एडीजीसी के साथ बैठक की
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। दीवानी परिसर स्थित डीजीसी कक्ष में सोमवार को डीजीसी फौजदारी पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने एडीजीसी के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध के मुकदमों में रोस्टर बनाकर प्रभावी पैरवी करें। तय तारीख पर सरकारी गवाहों की गवाही कराकर मुकदमों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने के लिए पहल करें।
उन्होंने कहा कि सत्र न्यायालयों में गंभीर अपराध के कई मुकदमे लंबित चल रहे हैं। इनमें नाबालिग से दुष्कर्म, छेड़छाड़, दहेज हत्या, हत्या के मुकदमे शामिल हैं। खाली चल रहे न्यायालयों में उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के बाद से मुकदमों की सुनवाई शुरू हो गई है। इसी हिसाब से इन न्यायालयों में एडीजीसी की तैनाती कर दी गई है। एडीजीसी ऐसे मुकदमों को चिन्हित करके उनमें पैरवी शुरू करें।
डीजीसी ने कहा कि पुराने लंबित मुकदमों को बेवजह लंबित नहीं होने दें। स्थगन प्रार्थना पत्रों को कम से कम मंजूर होने दें। तय तारीख पर आने वाले गवाहों की हर हालत में गवाही कराएं। कोई भी गवाह बिना गवाही दिए वापस नहीं लौटे। इन मुकदमों को निस्तारित कराने के लिए रोस्टर बनाकर काम करें। शैलेंद्री राजपूत, पुष्पेंद्र दुबे, मुकुल रायजादा, विपिन चतुर्वेदी, अनूप कुमार यादव, विश्वजीत सिंह राठौर, मनोज वर्मा, रोहित शुक्ला, संजीव चौहान, एमपी सिंह चौहान मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
-डीजीसी फौजदारी ने एडीजीसी के साथ बैठक की
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। दीवानी परिसर स्थित डीजीसी कक्ष में सोमवार को डीजीसी फौजदारी पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने एडीजीसी के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध के मुकदमों में रोस्टर बनाकर प्रभावी पैरवी करें। तय तारीख पर सरकारी गवाहों की गवाही कराकर मुकदमों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने के लिए पहल करें।
उन्होंने कहा कि सत्र न्यायालयों में गंभीर अपराध के कई मुकदमे लंबित चल रहे हैं। इनमें नाबालिग से दुष्कर्म, छेड़छाड़, दहेज हत्या, हत्या के मुकदमे शामिल हैं। खाली चल रहे न्यायालयों में उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के बाद से मुकदमों की सुनवाई शुरू हो गई है। इसी हिसाब से इन न्यायालयों में एडीजीसी की तैनाती कर दी गई है। एडीजीसी ऐसे मुकदमों को चिन्हित करके उनमें पैरवी शुरू करें।
विज्ञापन
डीजीसी ने कहा कि पुराने लंबित मुकदमों को बेवजह लंबित नहीं होने दें। स्थगन प्रार्थना पत्रों को कम से कम मंजूर होने दें। तय तारीख पर आने वाले गवाहों की हर हालत में गवाही कराएं। कोई भी गवाह बिना गवाही दिए वापस नहीं लौटे। इन मुकदमों को निस्तारित कराने के लिए रोस्टर बनाकर काम करें। शैलेंद्री राजपूत, पुष्पेंद्र दुबे, मुकुल रायजादा, विपिन चतुर्वेदी, अनूप कुमार यादव, विश्वजीत सिंह राठौर, मनोज वर्मा, रोहित शुक्ला, संजीव चौहान, एमपी सिंह चौहान मौजूद रहे।
विज्ञापन