ऑपरेशन पहचान: एक क्लिक पर मिलेगा अपराधियों का डाटा, एडीजी ने की शुरुआत, जानिए इसकी खासियत
एडीजी राजीव कृष्ण ने बताया कि आगरा जोन में वर्ष 2010 से अब तक विभिन्न मुकदमों में एक लाख से अधिक को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें सबसे ज्यादा आगरा में 21 हजार से ज्यादा अभियुक्त हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा जोन में अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एडीजी राजीव कृष्ण ने ऑपरेशन पहचान की शुरूआत की है। इसके तहत पिछले दस साल में किसी न किसी अपराध में आरोपी बनाए गए अभियुक्तों का डाटा पहचान साफ्टवेयर और एप की मदद से फीड किया जाएगा। इससे सिपाही से लेकर अधिकारी तक को एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी मिल जाएगी। उसने कहां और कब अपराध किया? कितने मुकदमे दर्ज हैं? कहां का रहने वाला है? सबसे ज्यादा अपराध किस जिले और थाना क्षेत्र में किए? अपराध का तरीका क्या है? अब हाल में कहां अपराध किया? यह सब पता चल जाएगा।
एडीजी राजीव कृष्ण ने बताया कि आगरा जोन में वर्ष 2010 से अब तक विभिन्न मुकदमों में एक लाख से अधिक को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें सबसे ज्यादा आगरा में 21 हजार से ज्यादा अभियुक्त हैं। बाद में अलीगढ़ और मथुरा के आरोपी हैं। इनमें सामान्य आरोपी से लेकर आदतन अपराध करने वाले अपराधी भी शामिल हैं।
इन अपराधियों पर नजर रखने के लिए ऑपरेशन पहचान की शुरूआत की गई है। इसके लिए एक साफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसका एक मोबाइल एप भी बनाया गया है, जिसे पुलिसकर्मी से लेकर अधिकारी तक अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकेंगे। थाना स्तर पर अपराधियों के डाटा फीडिंग का 95 प्रतिशत काम कर लिया गया है। साफ्टवेयर की मदद से अपराधी के बारे में जानकारी भरी गई है। उसके अपराध, अपराध के तरीके और स्थान का डाटा फीड किया गया है।
सत्यापन की होगी मॉनीटरिंग
मोबाइल एप की मदद से बीट सिपाही से लेकर अधिकारी तक फीडिंग करेंगेे। जिस अपराधी का डाटा फीड किया गया है, उसकी मॉनीटरिंग भी अधिकारियों के स्तर पर की जाएगी। कोई अपराधी सक्रिय है भी या फिर सत्यापन में लापरवाही बरती गई है। इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
क्राइम स्पॉट की मिलेगी जानकारी
इस साफ्टवेयर और एप की मदद से यह भी जानकारी मिल जाएगी कि किस जिले के किस इलाके में कितने अपराधी रह रहे हैं। उन्होंने कहां पर सबसे ज्यादा अपराध किया है। कौन से इलाके में अपराध नहीं हुए हैं। इससे अधिकारियों को फोर्स लगाने में भी आसानी होगी।
आपरेशन पहचान साफ्टवेयर और मोबाइल एप से तीन संदेश जाएंगे। पहला अपराधियों के लिए होगा कि वे अपराध करने से बाज आएं। उन पर नजर रखी जा रही है। अगर, वह अपराध करेंगे तो पकड़े जाएंगे। दूसरा जनता के लिए होगा कि वह खुद को सुरक्षित महसूस करें। पुलिस कार्रवाई के लिए तत्पर है। तीसरा पुलिसकर्मियों के पास अपराधियों के बारे में बेहतर जानकारी होना है। - राजीव कृष्ण, एडीजी जोन
अपराजिता: पति और दो बेटों की मौत, दुकान संभाल रहीं लता, कोरोना ने छीन लीं थी खुशियां