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Agra News: 13 साल की उम्र में किया था अपराध, 19 साल बाद रिहाई का रास्ता साफ

Sun, 14 Aug 2022 03:35 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 14 Aug 2022 03:35 PM IST
सार

ताजगंज क्षेत्र के रहने वाले 13 साल के किशोर के खिलाफ बालिका के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ। उसे दो साल बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। 

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accused of kidnapping and murder of girl child got interim bail from Supreme Court after 19 years
कोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

ताजनगरी आगरा में  13 साल की उम्र में अपराध कर जेल में आया। दो साल बाद मौत की सजा हुई। बचपन और किशोरावस्था ही नहीं जवानी भी जेल में बीत गई। नौ साल बाद मौत की सजा उम्रकैद में बदली। नाबालिग उम्र भी साबित हो गई। मगर, रिहाई का रास्ता अब जाकर साफ हो सका है। सुप्रीम कोर्ट से केंद्रीय कारागार में बंद आरोपी को अंतरिम जमानत पर रिहाई के आदेश किए गए हैं।

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मामला वर्ष 2003 का है। ताजगंज क्षेत्र के रहने वाले 13 साल के किशोर के खिलाफ बालिका के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ। उसे दो साल बाद मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि 2012 में सजा ए मौत की सजा उम्र कैद में बदल गई। निचली अदालत के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। 
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आरोपी के पास अपनी उम्र का कोई प्रमाणपत्र नहीं था। इस पर उसकी गुहार पर मेडिकल परीक्षण कराया गया। वर्ष 2013 में उसकी उम्र 23 साल होना पाया गया। इससे पता चला कि वारदात के समय उसकी उम्र 13 साल रही होगी। आरोपी के परिवार में कोई नहीं था। इस वजह से उसे दिक्कत हुई। उसे अब भी जेल में रहना पड़ रहा है। वर्ष 2014 में उसके वारदात के समय नाबालिग होने की पुष्टि हो गई।
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केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि बंदी को वर्ष 2014 मेें नाबालिग घोषित किया गया था। उसे पहले मौत की सजा सुनाई गई थी। अब बंदी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली है। इसका आदेश शुक्रवार शाम को ही मिला है। इसमें अभी कागजी कार्रवाई पूरी की जानी है। इसके बाद ही बंदी को रिहा कर दिया जाएगा।

नाबालिग उम्र साबित होने के बाद भी नौ साल जेल में रहा

आरोपी ने जेल में रहने के दौरान ही अन्य बंदियों से वकीलों से बात की। तब घटना के समय नाबालिग होने के बारे में साबित करने के लिए जुवेनाइल याचिका दाखिल करने की बात आई। बंदियों की सहायता से वकील के पास अपनी गुहार पहुंचा सका। नाबालिग उम्र साबित होने के बाद भी आरोपी की मुश्किल कम नहीं हुईं। उसके परिवार में कोई नहीं था। इस पर कोई पैरवी नहीं हो सकी। नाबालिग उम्र साबित होने के बाद भी जेल में रहा।

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