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रोडवेज बसों में फर्जी पास पर फ्री में सफर
Agra
Updated Sat, 28 Jun 2014 05:30 AM IST
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आगरा। रोडवेज की बसों मेें फर्जी पास धड़ल्ले से चल रहे हैं। जालसाजी के इस खेल में विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों के रिश्तेदार फ्री सफर का आनंद उठा रहे हैं। ऐसे ही एक मामला हाल ही में प्रकाश में आया है। इटावा में तैनात एक अधिकारी के नाम से फैजाबाद से जारी पास पर कई लोग सफर कर रहे थे।
पिछले दिनों फोर्ड डिपो की आगरा से नोएडा जा रही बस में चार लोग सफर कर रहे थे। परिचालक ने इन यात्रियों से टिकट मांगा। उन्होंने पास थमा दिया। पास जिस कागज पर प्रिंट था, उसे छूते ही परिचालक का माथा ठनका। मौका पाकर सवारियां बस से उतर भागी। इधर, इस पास को देखकर अधिकारी हैरान रह गए। यह पास 22 अप्रैल 2014 से 24 मई 2014 के लिए जारी किया गया था। जबकि विभागीय पास की अवधि सिर्फ 30 दिन ही होती है। यह पास फैजाबाद से पांच लोगों के नाम जारी किया गया था। पास पर फैजाबाद के एआरएम प्रवीण के हस्ताक्षर हैं। एआरएम प्रवीण का फरवरी में ही इटावा ट्रांसफर हो गया था। यह पास लखनऊ से दिल्ली के लिए जारी था।
इधर, एआरएम प्रवीण का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई पास जारी नहीं किया है। वह पिछले कई महीनों से इटावा में तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी रोडवेज के कई फर्जी पास बरामद हो चुके हैं।
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पिछले दिनों फोर्ड डिपो की आगरा से नोएडा जा रही बस में चार लोग सफर कर रहे थे। परिचालक ने इन यात्रियों से टिकट मांगा। उन्होंने पास थमा दिया। पास जिस कागज पर प्रिंट था, उसे छूते ही परिचालक का माथा ठनका। मौका पाकर सवारियां बस से उतर भागी। इधर, इस पास को देखकर अधिकारी हैरान रह गए। यह पास 22 अप्रैल 2014 से 24 मई 2014 के लिए जारी किया गया था। जबकि विभागीय पास की अवधि सिर्फ 30 दिन ही होती है। यह पास फैजाबाद से पांच लोगों के नाम जारी किया गया था। पास पर फैजाबाद के एआरएम प्रवीण के हस्ताक्षर हैं। एआरएम प्रवीण का फरवरी में ही इटावा ट्रांसफर हो गया था। यह पास लखनऊ से दिल्ली के लिए जारी था।
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इधर, एआरएम प्रवीण का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई पास जारी नहीं किया है। वह पिछले कई महीनों से इटावा में तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी रोडवेज के कई फर्जी पास बरामद हो चुके हैं।
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