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सरकारी मशीनरी चुनाव में व्यस्त, आम जनता हो रही त्रस्त
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एटा। सरकारी मशीनरी के चुनाव में जुट जाने से पूरी तरह व्यस्त है। ऐसे में आने वाले दिनों में जनता त्रस्त हो सकती है। सरकारी विभागों का शायद ही कोई ऐसा कर्मचारी हो जो चुनाव में व्यस्त न हो। इतना ही नहीं आवागमन भी प्रभावित होगा, क्यों कि अभी से वाहनों को धरपकड़ शुरू हो गई है।
चुनावी नैया को पार करने में जुटा सरकारी महकमा तैयारियों में लगा हुआ है। एक भी विभाग ऐसा अछूता नहीं है जिसको कोई न कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई हो। विभागों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहता है। फरियादी किसी काम के लिए जाता है तो सिर्फ एक ही जवाब मिलता है पहले चुनाव उसके बाद कुछ और। अभी मई तक यही हालात रहने हैं ऐसे में आम लोग और भी परेशान हो सकते हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों को चुनाव से दूर रखा गया है। हालांकि सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को चुनाव में लगाया गया है। इतना ही नहीं चुनाव संपन्न कराने के लिए वाहनों की धरपकड़ तेज हो गई है, इसके चलते वाहनों का टोटा दिखने लगा है। इन सब को लेकर सुने लोगों की राय-
सरकारी दफ्तरों में जाते हैं तो चुनाव की ही बात की जाती है। वहां पर फरियादियों की कोई सुनने वाला नहीं है। लखमी सिंह
शहर में प्राइवेट वाहनों की पकड़ा धकड़ी हो रही हैं। ऐसे में वाहन स्वामी अपने वाहनों को बचाने के चक्कर में लगे हुए हैं। रिंकू सिंह
ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सा प्रभारियों की ड्यूटी लगने से ग्रामीणों को दिक्कत उठानी पड़ेगी। गांव के लोग बीमार होने पर यहीं से उपचार कराते हैं। भगवान सिंह
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चुनाव जब तक संपन्न नहीं हो जाते हैं सरकारी कर्मचारी कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं। - रावेंद्र बहादुर सिंह
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चुनावी नैया को पार करने में जुटा सरकारी महकमा तैयारियों में लगा हुआ है। एक भी विभाग ऐसा अछूता नहीं है जिसको कोई न कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई हो। विभागों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहता है। फरियादी किसी काम के लिए जाता है तो सिर्फ एक ही जवाब मिलता है पहले चुनाव उसके बाद कुछ और। अभी मई तक यही हालात रहने हैं ऐसे में आम लोग और भी परेशान हो सकते हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों को चुनाव से दूर रखा गया है। हालांकि सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को चुनाव में लगाया गया है। इतना ही नहीं चुनाव संपन्न कराने के लिए वाहनों की धरपकड़ तेज हो गई है, इसके चलते वाहनों का टोटा दिखने लगा है। इन सब को लेकर सुने लोगों की राय-
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सरकारी दफ्तरों में जाते हैं तो चुनाव की ही बात की जाती है। वहां पर फरियादियों की कोई सुनने वाला नहीं है। लखमी सिंह
शहर में प्राइवेट वाहनों की पकड़ा धकड़ी हो रही हैं। ऐसे में वाहन स्वामी अपने वाहनों को बचाने के चक्कर में लगे हुए हैं। रिंकू सिंह
ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सा प्रभारियों की ड्यूटी लगने से ग्रामीणों को दिक्कत उठानी पड़ेगी। गांव के लोग बीमार होने पर यहीं से उपचार कराते हैं। भगवान सिंह
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चुनाव जब तक संपन्न नहीं हो जाते हैं सरकारी कर्मचारी कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं। - रावेंद्र बहादुर सिंह