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खुद को मजिस्ट्रेट बताकर रौब झाड़ने वाला गिरफ्तार
Updated Sat, 12 Aug 2017 12:18 AM IST
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मथुरा। खुद को मजिस्ट्रेट बताकर रौब झाड़ने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मजिस्ट्रेट बनकर अफसरों से भी बात करता था। थानों से लोगों को छुड़ाने के लिए भी सिफारिशें करता था। आने जाने में लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करता मिला। उसके साथ हर वक्त दो सिक्योरिटी गार्ड भी रहते थे।
गिरफ्तार शख्स शिवनारायण सिंह सेंगर पुत्र भोला सिंह सेंगर है। वह मध्यप्रदेश में इंदौर की भोजपुरी कालोनी का रहने वाला है। शिवनारायण सिंह 15 दिन पहले मथुरा आया था। शिवनारायण सिंह ने बालाजीपुरम में स्थित एक सिक्योरिटी कंपनी से दो गार्ड लिए।
एक धर्मपाल और दूसरा महेश सिंह। दोनों से कहा गया कि 35-35 हजार सैलरी मिलेगी। इन दोनों को भी शिवनारायण ने मजिस्ट्रेट ही बताया था। पंद्रह दिन से यह दोनों सिक्योरिटी गार्ड उसके साथ थे। कभी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में घूमा। लोगों की सिफारिश करने के लिए थाने तक चला जाता था। मामला भी तब खुला जब सिक्योरिटी गार्ड धर्मपाल और महेश को शक हुआ। यह दोनों खुद को मजिस्ट्रेट बताने वाले शिवनारायण को पकड़कर थाना हाईवे में ले गए। जब पुलिस ने पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। शिवनारायण के पास से काला कोट और दो मोबाइल मिले हैं। शिवनारायण के खिलाफ 420, 406, 471 का मुकदमा दर्ज हुआ है।
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खुद को वीआईपी साबित करना चाहता था
पुलिस ने जिस शिवनारायण सिंह को गिरफ्तार किया है वह लग्जरी गाड़ियों में घूमता था। गाड़ियों पर हूटर लगाकर चलता था। एक सिक्योरिटी गार्ड गाड़ी में आगे बैठता था तो एक पीछे। जब भी कहीं जाना होता था तो सिक्योरिटी गार्ड ही उसकी पहचान कराया करते थे। वह लोगों को अपना नाम वेदांत मित्रा बताता था।
अदालतों में भी लगा रहता था आना जाना
सिक्योरिटी गार्डों की मानें तो दो दिन पहले फर्जी मजिस्ट्रेट ठकुरेला व्यक्ति के नाम से अलीगढ़ में कोर्ट में गया था। इसके बाद गोंडा थाने पहुंचकर ठकुरेला की एफआईआर दर्ज करवाई। लौटकर सिक्योरिटी गार्ड को घर छोड़ दिया। दूसरे दिन आगरा लेकर गया। यहां से इंदौर भी गया। रास्ते में आरोपी ने दोनों से उधार करीब 30 हजार रुपये ले लिए लेकिन लौटकर नहीं दिए। शक होने पर इसे हाईवे पुलिस के हवाले किया गया।
वोटर आईडी से हुई पहचान
हाईवे प्रभारी निरीक्षक गिरीश चंद तिवारी की मानें तो पकड़े गए फर्जी मजिस्ट्रेट से वोटर आईडी कार्ड मिला है। इसी आधार पर इसका असली नाम शिवनारायण सिंह सेंगर सामने आया। जबकि वेदांत मित्रा कहकर रौब गालिब करता था। फिलहाल मुकद्दमा दर्ज कर लिया गया है।
एलएलबी तक पढ़ा बता रहा फर्जी मजिस्ट्रेट
हाईवे पुलिस की मानें तो पूछताछ में फर्जी मजिस्ट्रेट ने अपने को एलएलबी तक पढ़ना बताया है। अपने पिता की नौकरी प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी अफसर की बता रहा है। पूछताछ की जा रही है।
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गिरफ्तार शख्स शिवनारायण सिंह सेंगर पुत्र भोला सिंह सेंगर है। वह मध्यप्रदेश में इंदौर की भोजपुरी कालोनी का रहने वाला है। शिवनारायण सिंह 15 दिन पहले मथुरा आया था। शिवनारायण सिंह ने बालाजीपुरम में स्थित एक सिक्योरिटी कंपनी से दो गार्ड लिए।
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एक धर्मपाल और दूसरा महेश सिंह। दोनों से कहा गया कि 35-35 हजार सैलरी मिलेगी। इन दोनों को भी शिवनारायण ने मजिस्ट्रेट ही बताया था। पंद्रह दिन से यह दोनों सिक्योरिटी गार्ड उसके साथ थे। कभी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में घूमा। लोगों की सिफारिश करने के लिए थाने तक चला जाता था। मामला भी तब खुला जब सिक्योरिटी गार्ड धर्मपाल और महेश को शक हुआ। यह दोनों खुद को मजिस्ट्रेट बताने वाले शिवनारायण को पकड़कर थाना हाईवे में ले गए। जब पुलिस ने पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। शिवनारायण के पास से काला कोट और दो मोबाइल मिले हैं। शिवनारायण के खिलाफ 420, 406, 471 का मुकदमा दर्ज हुआ है।
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खुद को वीआईपी साबित करना चाहता था
पुलिस ने जिस शिवनारायण सिंह को गिरफ्तार किया है वह लग्जरी गाड़ियों में घूमता था। गाड़ियों पर हूटर लगाकर चलता था। एक सिक्योरिटी गार्ड गाड़ी में आगे बैठता था तो एक पीछे। जब भी कहीं जाना होता था तो सिक्योरिटी गार्ड ही उसकी पहचान कराया करते थे। वह लोगों को अपना नाम वेदांत मित्रा बताता था।
अदालतों में भी लगा रहता था आना जाना
सिक्योरिटी गार्डों की मानें तो दो दिन पहले फर्जी मजिस्ट्रेट ठकुरेला व्यक्ति के नाम से अलीगढ़ में कोर्ट में गया था। इसके बाद गोंडा थाने पहुंचकर ठकुरेला की एफआईआर दर्ज करवाई। लौटकर सिक्योरिटी गार्ड को घर छोड़ दिया। दूसरे दिन आगरा लेकर गया। यहां से इंदौर भी गया। रास्ते में आरोपी ने दोनों से उधार करीब 30 हजार रुपये ले लिए लेकिन लौटकर नहीं दिए। शक होने पर इसे हाईवे पुलिस के हवाले किया गया।
वोटर आईडी से हुई पहचान
हाईवे प्रभारी निरीक्षक गिरीश चंद तिवारी की मानें तो पकड़े गए फर्जी मजिस्ट्रेट से वोटर आईडी कार्ड मिला है। इसी आधार पर इसका असली नाम शिवनारायण सिंह सेंगर सामने आया। जबकि वेदांत मित्रा कहकर रौब गालिब करता था। फिलहाल मुकद्दमा दर्ज कर लिया गया है।
एलएलबी तक पढ़ा बता रहा फर्जी मजिस्ट्रेट
हाईवे पुलिस की मानें तो पूछताछ में फर्जी मजिस्ट्रेट ने अपने को एलएलबी तक पढ़ना बताया है। अपने पिता की नौकरी प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी अफसर की बता रहा है। पूछताछ की जा रही है।