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एक सितंबर से शुरू होगी ई-टेंडरिंग
Updated Sun, 06 Aug 2017 11:44 PM IST
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- फोटो : ie
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एटा। आगामी एक सितंबर से ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने से ठेकेदार घर बैठे टेंडर डाल सकेंगे। इसके साथ ही ठेकेदार कागजात से लेकर टेंडर खुलने, रिजेक्ट होने, मिलने सबंधी सभी जानकारियां घर बैठे कंप्यूटर पर देख सकेंगे। ठेका मिलने पर भुगतान भी आनलाइन मिलेगा।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि शासन से जारी वेबसाइट पर विभागीय अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर से टेंडर प्रकाशित होंगे। इन्हें देखने के लिए ठेकेदारों को अपने डिजिटल हस्ताक्षरों से अपना पंजीकरण वेबसाइट पर कराना होगा। पंजीकरण कराते ही एक यूनिक नंबर और पासवर्ड स्वत: जनरेट होगा। इस यूनिक नंबर और पासवर्ड की सहायता से ठेकेदार मुख्य साइट पर पहुंचकर टेंडर के लिए आवेदन कर सकेंगे।
आवेदन के साथ ठेकेदार अपनी टेक्निकल, फाइनेंशियल बिड समेत अन्य आवश्यक कागजात आनलाइन अपलोड कर सकेंगे। टेंडर खुलने पर ठेकेदार के पास एसएमएस से जानकारी आएगी। इसके बाद टेंडर खुलने और निरस्त होने की जानकारी भी आवेदक ठेकेदार के पास एसएमएस से पहुंचेगी।
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कोई भी परख सकेगा पादर्शिता
ई-टेंडरिंग प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से बैठकर समूची टेंडर प्रक्रिया की जानकारी हासिल कर सकेगा। साइट पर जाकर कितने लोगों ने टेंडर डाला, किसे और किस वजह से टेंडर मिला। काम कितने का है जैसी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
विकास से जुड़े अफसरों की होगी ट्रेनिंग
एक सितंबर से पहले सभी विकास से जुड़े अफसरों को कोषाधिकारी की अगुवाई में ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग में फर्मों के ठेकेदार भी शिरकत करेंगे। अधिकारियों की मानें तो टेंडर तभी खुलेगा जब विभागीय अधिकारी अपने डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग करेंगे।
ई-टेंडरिंग की पूरी प्रक्रिया फुल प्रूफ है। कोई भी व्यक्ति अन्य ठेकेदार के रेट से लेकर किसी प्रकार की जानकारी टेंडर खुलने से पहले हासिल नहीं कर सकता। इसके चलते ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी या मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं है।
संजय कुमार
जिला सूचना विज्ञान
अधिकारी एटा
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जिला सूचना विज्ञान अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि शासन से जारी वेबसाइट पर विभागीय अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर से टेंडर प्रकाशित होंगे। इन्हें देखने के लिए ठेकेदारों को अपने डिजिटल हस्ताक्षरों से अपना पंजीकरण वेबसाइट पर कराना होगा। पंजीकरण कराते ही एक यूनिक नंबर और पासवर्ड स्वत: जनरेट होगा। इस यूनिक नंबर और पासवर्ड की सहायता से ठेकेदार मुख्य साइट पर पहुंचकर टेंडर के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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आवेदन के साथ ठेकेदार अपनी टेक्निकल, फाइनेंशियल बिड समेत अन्य आवश्यक कागजात आनलाइन अपलोड कर सकेंगे। टेंडर खुलने पर ठेकेदार के पास एसएमएस से जानकारी आएगी। इसके बाद टेंडर खुलने और निरस्त होने की जानकारी भी आवेदक ठेकेदार के पास एसएमएस से पहुंचेगी।
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कोई भी परख सकेगा पादर्शिता
ई-टेंडरिंग प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से बैठकर समूची टेंडर प्रक्रिया की जानकारी हासिल कर सकेगा। साइट पर जाकर कितने लोगों ने टेंडर डाला, किसे और किस वजह से टेंडर मिला। काम कितने का है जैसी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
विकास से जुड़े अफसरों की होगी ट्रेनिंग
एक सितंबर से पहले सभी विकास से जुड़े अफसरों को कोषाधिकारी की अगुवाई में ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग में फर्मों के ठेकेदार भी शिरकत करेंगे। अधिकारियों की मानें तो टेंडर तभी खुलेगा जब विभागीय अधिकारी अपने डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग करेंगे।
ई-टेंडरिंग की पूरी प्रक्रिया फुल प्रूफ है। कोई भी व्यक्ति अन्य ठेकेदार के रेट से लेकर किसी प्रकार की जानकारी टेंडर खुलने से पहले हासिल नहीं कर सकता। इसके चलते ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी या मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं है।
संजय कुमार
जिला सूचना विज्ञान
अधिकारी एटा