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घायल श्रमिक ने राज्यपाल से मांगी इच्छा मृत्यु
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:23 AM IST
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फिरोजाबाद। कांच इकाई में कार्य के दौरान गंभीर रूप से घायल श्रमिक ने न्याय न मिलने की उम्मीद देख राज्यपाल से इच्छा मृत्यु मांगी है।
महादेव नगर निवासी सौरभ उर्फ संजय शर्मा पूजा ग्लास वर्क्स में कार्यरत था। 15 जून को कार्य के दौरान वह ब्लोअर की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। राज्यपाल के नाम डीएम को सौंपे पत्र में पीड़ित श्रमिक ने कहा कि हादसे के बाद मुझे इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया।
यहां से मुझे आगरा के पुष्पांजलि अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद एम्स में भर्ती कराया गया। सेवायोजक द्वारा इलाज पर चार लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बाद मुझे व मेरे परिवार को अपने हाल पर छोड़ दिया।
चिकित्सकों द्वारा आपरेशन का खर्चा एक करोड़ रुपया बताया गया है, जिसे मै वहन करने में असमर्थ हूं। 20 जून को जनता दरबार में मुख्यमंत्री को समस्या बताई थी। मुख्यमंत्री ने जांच श्रमायुक्त को सौंपी थी। चार जुलाई को सहायक श्रमायुक्त ने श्रम प्रर्वतन अधिकारी से जांच कराई।
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इसमें मेरी रिपोर्ट बदल कर बीमार दर्शा दी गई है। ऐसे भ्रष्टाचार प्रशासन से मुझे न्याय मिलना असंभव लग रहा है। अत: मुझे उचित न्याय दिलाया जाए अथवा इच्छा मृत्यु प्रदान की जाए।
श्रमिक की शिकायत पर कमेटी बनाकर श्रम प्रवर्तन अधिकारी से जांच कराई है।
जांच में सेवायोजक ने कहा है कि श्रमिक के इलाज पर चार लाख से अधिक की धनराशि खर्च की गई है, जबकि उसने मात्र पांच दिन कार्य किया था। उसे यह धनराशि इस शर्त पर दी गई कि स्वस्थ पर कार्य पर वापस आएगा।
इलाज के लिए दी गई धनराशि वेतन से समायोजित कर ली जाएगी। स्वस्थ होने के बाद भी श्रमिक कार्य पर नहीं लौटा। फिर भी कोई समस्या है तो वह समक्ष प्राधिकारी के समक्ष वाद प्रस्तुत कर सकता है।
राजीव कुमार सिंह, सहायक श्रमायुक्त
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महादेव नगर निवासी सौरभ उर्फ संजय शर्मा पूजा ग्लास वर्क्स में कार्यरत था। 15 जून को कार्य के दौरान वह ब्लोअर की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। राज्यपाल के नाम डीएम को सौंपे पत्र में पीड़ित श्रमिक ने कहा कि हादसे के बाद मुझे इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया।
यहां से मुझे आगरा के पुष्पांजलि अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद एम्स में भर्ती कराया गया। सेवायोजक द्वारा इलाज पर चार लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बाद मुझे व मेरे परिवार को अपने हाल पर छोड़ दिया।
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चिकित्सकों द्वारा आपरेशन का खर्चा एक करोड़ रुपया बताया गया है, जिसे मै वहन करने में असमर्थ हूं। 20 जून को जनता दरबार में मुख्यमंत्री को समस्या बताई थी। मुख्यमंत्री ने जांच श्रमायुक्त को सौंपी थी। चार जुलाई को सहायक श्रमायुक्त ने श्रम प्रर्वतन अधिकारी से जांच कराई।
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इसमें मेरी रिपोर्ट बदल कर बीमार दर्शा दी गई है। ऐसे भ्रष्टाचार प्रशासन से मुझे न्याय मिलना असंभव लग रहा है। अत: मुझे उचित न्याय दिलाया जाए अथवा इच्छा मृत्यु प्रदान की जाए।
श्रमिक की शिकायत पर कमेटी बनाकर श्रम प्रवर्तन अधिकारी से जांच कराई है।
जांच में सेवायोजक ने कहा है कि श्रमिक के इलाज पर चार लाख से अधिक की धनराशि खर्च की गई है, जबकि उसने मात्र पांच दिन कार्य किया था। उसे यह धनराशि इस शर्त पर दी गई कि स्वस्थ पर कार्य पर वापस आएगा।
इलाज के लिए दी गई धनराशि वेतन से समायोजित कर ली जाएगी। स्वस्थ होने के बाद भी श्रमिक कार्य पर नहीं लौटा। फिर भी कोई समस्या है तो वह समक्ष प्राधिकारी के समक्ष वाद प्रस्तुत कर सकता है।
राजीव कुमार सिंह, सहायक श्रमायुक्त