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अवैध क्लीनिकों को मिला है स्वास्थ्य विभाग का अभयदान
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मैनपुरी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। विभाग को उस समय कार्रवाई की याद आती है, जब अवैध क्लीनिकों पर कोई हादसा होता है। इसके बाद विभाग सब कुछ भूल जाता है। यही कारण है कि जिले में अवैध क्लीनिकों का संचालन लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, झोलाछाप बीमारी से मजबूर लोगों से धन वसूल कर मौज कर रहे हैं।
जिले में मात्र 26 अस्पताल पंजीकृत हैं। जबकि 100 से अधिक क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। लगभग 75 अस्पताल अवैध रूप से बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं करता है। जब कोई हादसा होता है और पीड़ित परिवार रिपोर्ट दर्ज कराता है तब उस पर कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है और पता नहीं कब संबंधित क्लीनिक को क्लीन चिट दे दी जाती है यह पता ही नहीं चलता। यही कारण है कि जिले में अवैध क्लीनिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिन पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
चार महीने में अलग-अलग स्थानों पर संचालित अवैध क्लीनिकों पर चार मरीजों की मौत हो चुकी हैं। इसमें विभाग ने घटना के बाद पहुंचकर इन क्लीनिकों को सील किया था। उसके बाद अन्य क्लीनिकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो आगे गलत उपचार से मरने वाले लोगों को बचाया जा सकता है।
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जिले में मात्र 26 अस्पताल पंजीकृत हैं। जबकि 100 से अधिक क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। लगभग 75 अस्पताल अवैध रूप से बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं करता है। जब कोई हादसा होता है और पीड़ित परिवार रिपोर्ट दर्ज कराता है तब उस पर कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है और पता नहीं कब संबंधित क्लीनिक को क्लीन चिट दे दी जाती है यह पता ही नहीं चलता। यही कारण है कि जिले में अवैध क्लीनिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिन पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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चार महीने में अलग-अलग स्थानों पर संचालित अवैध क्लीनिकों पर चार मरीजों की मौत हो चुकी हैं। इसमें विभाग ने घटना के बाद पहुंचकर इन क्लीनिकों को सील किया था। उसके बाद अन्य क्लीनिकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो आगे गलत उपचार से मरने वाले लोगों को बचाया जा सकता है।
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