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अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों के निर्माण पर सुस्ती
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एटा। जिले में फसलों को बर्बाद कर रहे आवारा पशुओं को अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल तक पहुंचाने की कवायद सुस्त पड़ रही है। आलम यह है कि शहर में ही तमाम स्थानों पर आवारा पशु घूम रहे हैं। इसके चलते लोग हादसों के शिकार हो रहे हैं। वहीं कई ग्राम पंचायतों में आश्रय स्थल का निर्माण पूरा नहीं होने से ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है।
जिले में प्रदेश सरकार के निर्देश पर 21 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें अब तक 1919 पशुओं को आश्रय दिया गया है। जबकि कई स्थानों पर आश्रय स्थलों का निर्माण अधूरा पड़ा है। निधौलीकलां में रामादेवी गौशाला हुसैनपुर में टिनशेड डालने का काम चल रहा है। मिरहची की पांच न्याय पंचायतों में मनरेगा द्वारा आश्रय स्थल बनाने का काम चल रहा है। जलेसर के जैनपुरा और जमालपुर में आश्रय स्थल के लिए अब भूमि का चिन्हांकन हो सका है। वहीं अवागढ़ के दुल्हावा में भी भूमि का चिन्हांकन चल रहा है। इसके साथ ही गांव इसौली और पतहा में खुदाई का काम चल रहा है। इससे साफ है कि प्रशासन गोवंश आश्रय स्थलों के निर्माण को लेकर सुस्त है। जबकि शासन से 20 जनवरी तक आश्रय स्थलों का निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए थे। आलम यह है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशु घूमकर फसलों को बर्बाद करने के साथ लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं।
पशुओं पर लगेगा टैग
गोवंश आश्रय स्थलों में पहुंचाए गए पशुओं की पहचान के लिए टैग लगाया जाएगा। इसके बाद पालकों के यहां मौजूद पशुओं पर टैग लगेगा। ताकि आवारा पशु घूमता मिलने पर पशुपालक और आश्रय स्थल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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चारे-पानी को मिला एक करोड़
जिले में संचालित अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों में पशुओं के चारे-पानी के लिए एक करोड़ रुपये का बजट मिला है। दरअसल, कई गोवंश आश्रय स्थलों में चारे-पानी की व्यवस्था नहीं होने से पशुओं के रख-रखाव में समस्या आ रही है। जबकि कई जगहों पर चारे-पानी की व्यवस्था नहीं होने से पशु नहीं रखे जा रहे हैं।
कहां कितने पशु
आर्ष गुरुकुल- 06
गोपाल गोशाला- 344
बकरी प्रेक्षत्र, गंगनपुर- 91
मलावन- 87
मंडी समिति निधौली- 450
जिन्हैरा, मिरहची- 11
कदरागंज, अलीपुर- 16
सिकंदपुर सालवाहनपुर- 14
कान्हा पशु आश्रय स्थल अलीगंज- 65
खरसुलिया- 20
नगला सबल- 05
कान्हा आश्रय स्थल जैथरा- 302
गढ़ी रोशन- 35
बरना- 65
फरीदपुर जलेसर- 50
गंगेश्वर गौशाला जलेसर- 224
पौंडरी अवागढ़- 26
अवागढ़- 34
जरानीकलां- 31
पुन्हैरा- 03
कुल- 1919
गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण तेजी से चल रहा है। आवरा पशुओं को आश्रय स्थलों में पहुंचाया जा रहा है। चारे पानी के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। नर पशुओं का बधियाकरण किया जा रहा है।
डा. केपी सिंह, सीवीओ एटा
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जिले में प्रदेश सरकार के निर्देश पर 21 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें अब तक 1919 पशुओं को आश्रय दिया गया है। जबकि कई स्थानों पर आश्रय स्थलों का निर्माण अधूरा पड़ा है। निधौलीकलां में रामादेवी गौशाला हुसैनपुर में टिनशेड डालने का काम चल रहा है। मिरहची की पांच न्याय पंचायतों में मनरेगा द्वारा आश्रय स्थल बनाने का काम चल रहा है। जलेसर के जैनपुरा और जमालपुर में आश्रय स्थल के लिए अब भूमि का चिन्हांकन हो सका है। वहीं अवागढ़ के दुल्हावा में भी भूमि का चिन्हांकन चल रहा है। इसके साथ ही गांव इसौली और पतहा में खुदाई का काम चल रहा है। इससे साफ है कि प्रशासन गोवंश आश्रय स्थलों के निर्माण को लेकर सुस्त है। जबकि शासन से 20 जनवरी तक आश्रय स्थलों का निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए थे। आलम यह है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशु घूमकर फसलों को बर्बाद करने के साथ लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं।
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पशुओं पर लगेगा टैग
गोवंश आश्रय स्थलों में पहुंचाए गए पशुओं की पहचान के लिए टैग लगाया जाएगा। इसके बाद पालकों के यहां मौजूद पशुओं पर टैग लगेगा। ताकि आवारा पशु घूमता मिलने पर पशुपालक और आश्रय स्थल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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चारे-पानी को मिला एक करोड़
जिले में संचालित अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों में पशुओं के चारे-पानी के लिए एक करोड़ रुपये का बजट मिला है। दरअसल, कई गोवंश आश्रय स्थलों में चारे-पानी की व्यवस्था नहीं होने से पशुओं के रख-रखाव में समस्या आ रही है। जबकि कई जगहों पर चारे-पानी की व्यवस्था नहीं होने से पशु नहीं रखे जा रहे हैं।
कहां कितने पशु
आर्ष गुरुकुल- 06
गोपाल गोशाला- 344
बकरी प्रेक्षत्र, गंगनपुर- 91
मलावन- 87
मंडी समिति निधौली- 450
जिन्हैरा, मिरहची- 11
कदरागंज, अलीपुर- 16
सिकंदपुर सालवाहनपुर- 14
कान्हा पशु आश्रय स्थल अलीगंज- 65
खरसुलिया- 20
नगला सबल- 05
कान्हा आश्रय स्थल जैथरा- 302
गढ़ी रोशन- 35
बरना- 65
फरीदपुर जलेसर- 50
गंगेश्वर गौशाला जलेसर- 224
पौंडरी अवागढ़- 26
अवागढ़- 34
जरानीकलां- 31
पुन्हैरा- 03
कुल- 1919
गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण तेजी से चल रहा है। आवरा पशुओं को आश्रय स्थलों में पहुंचाया जा रहा है। चारे पानी के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। नर पशुओं का बधियाकरण किया जा रहा है।
डा. केपी सिंह, सीवीओ एटा