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Agra News: आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति पर 46 हजार का जुर्माना
Thu, 17 Jul 2025 12:34 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 17 Jul 2025 12:34 AM IST
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मैनपुरी। वर्ष 2010 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्व विद्यालय से बीएससी की परीक्षा पास करने वाली छात्रा को डिग्री / उपाधि नहीं देने पर विश्वविद्यालय के कुलपति पर 46 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह धनराशि दो महीने मेंं आयोग के खाते में जमा करनी होगी। पीड़िता को दो महीने के अंदर वांछित डिग्री / उपाधि भी देनी होगी। पीड़िता की याचिका पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यह फैसला सुनाया है।
थाना कुर्रा के सड़ तखरऊ की श्वेता मिश्रा दीवानी में वकालत करती हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्व विद्यालय से संबद्ध बाबूराम पीजी कॉलेज करहल से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बाद में डिग्री/उपाधि पाने के लिए तय 500 रुपये की फीस ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद भी उनको बीएससी की डिग्री/उपाधि नहीं दी गई। उन्होंने कई बार विश्व विद्यालय में संपर्क किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके द्वारा दिए गए विधिक नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
पीड़िता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 30 जुलाई 2024 को याचिका दायर करके डिग्री / उपाधि दिलाने की मांग की। याचिका की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय तथा सदस्य नीतिका दास ने की। याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर विश्व विद्यालय के कुलपति को दो महीने के अंदर पीड़िता को बीएससी की डिग्री / उपाधि देने का आदेश दिया है। डिग्री / उपाधि नहीं देने पर विश्व विद्यालय के कुलपति पर 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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आयोग के खाते में जमा होगी धनराशि
आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय तथा सदस्य नीतिका दास ने आदेश में लिखा है कि विश्व विद्यालय के कुलपति द्वारा पीड़िता को मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 40 हजार रुपये दिए जाएं। वाद व्यय के रूप में छह हजार रुपये अदा करने होंगे। यह धनराशि दो महीने के अंदर आयोग के खाते में जमा करनी होगी।
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थाना कुर्रा के सड़ तखरऊ की श्वेता मिश्रा दीवानी में वकालत करती हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्व विद्यालय से संबद्ध बाबूराम पीजी कॉलेज करहल से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बाद में डिग्री/उपाधि पाने के लिए तय 500 रुपये की फीस ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद भी उनको बीएससी की डिग्री/उपाधि नहीं दी गई। उन्होंने कई बार विश्व विद्यालय में संपर्क किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके द्वारा दिए गए विधिक नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
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पीड़िता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 30 जुलाई 2024 को याचिका दायर करके डिग्री / उपाधि दिलाने की मांग की। याचिका की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय तथा सदस्य नीतिका दास ने की। याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर विश्व विद्यालय के कुलपति को दो महीने के अंदर पीड़िता को बीएससी की डिग्री / उपाधि देने का आदेश दिया है। डिग्री / उपाधि नहीं देने पर विश्व विद्यालय के कुलपति पर 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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आयोग के खाते में जमा होगी धनराशि
आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय तथा सदस्य नीतिका दास ने आदेश में लिखा है कि विश्व विद्यालय के कुलपति द्वारा पीड़िता को मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 40 हजार रुपये दिए जाएं। वाद व्यय के रूप में छह हजार रुपये अदा करने होंगे। यह धनराशि दो महीने के अंदर आयोग के खाते में जमा करनी होगी।