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पहले पायदान से आखिरी पर पहुंचा मारहरा
Updated Fri, 02 Nov 2018 11:50 PM IST
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एटा। जिले को ओडीएफ करने की जल्दबाजी में प्रशासन ने मारहरा ब्लॉक को पीछे कर दिया। विगत वर्ष ओडीएफ घोषित मारहरा ब्लॉक में मौजूदा समय में भी 44 शौचालयों का निर्माण शेष है। वहीं अन्य ब्लॉकों में कोई भी शौचालय निर्माण होना बाकी नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा भारत सरकार की वेबसाइट पर की गई रिपोर्टिंग बताती है कि जिले को ओडीएफ करने में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया है।
विगत वर्ष जिला प्रशासन ने मारहरा ब्लॉक को ओडीएफ घोषित कर दिया था। अब प्रशासन ने ही ओडीएफ में मारहरा ब्लॉक को पीछे कर दिया। भारत सरकार की वेबसाइट पर की गई फीडिंग बताती है कि मारहरा ब्लॉक में 44 शौचालयों का निर्माण शेष है। रिपोर्ट के मुताबिक मारहरा ब्लॉक में 99.84 फीसदी कवरेज हुआ है। वहीं अन्य ब्लॉक की फीडिंग में 100 फीसद शौचालयों का निर्माण पूरा कर दिया गया है।
इससे साफ है कि ओडीएफ के फेर में जिले के कई ब्लॉकों में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल चला। वहीं वेबसाइट की एक और रिपोर्ट बताती है कि मारहरा ब्लॉक के सभी गांव ओडीएफ हो चुके हैं। कुल 85 गांवों में से 61 गांवों का सत्यापन भी हो चुका है। ऐसे में सवाल है कि फिर 44 शौचालयों का निर्माण क्यों छोड़ दिया गया है? पूरी रिपोर्टिंग बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रही है। वहीं ओडीएफ के मामले में सबसे आगे चल रहा मारहरा ब्लॉक सबसे पीछे आ गया है।
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जियो टैग महज 70 फीसद
मानकों के मुताबिक जिले के गांवों को ओडीएफ घोषित करने से पूर्व गांव में बनाए गए शौचालयों की जियो टैगिंग पूरी हो जाती है। हालांकि जिले में अब तक महज 70 फीसद जियो टैगिंग ही पूरी हो सकी है। ऐसे में ओडीएफ की कहानी फर्जी नजर आती है।
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विगत वर्ष जिला प्रशासन ने मारहरा ब्लॉक को ओडीएफ घोषित कर दिया था। अब प्रशासन ने ही ओडीएफ में मारहरा ब्लॉक को पीछे कर दिया। भारत सरकार की वेबसाइट पर की गई फीडिंग बताती है कि मारहरा ब्लॉक में 44 शौचालयों का निर्माण शेष है। रिपोर्ट के मुताबिक मारहरा ब्लॉक में 99.84 फीसदी कवरेज हुआ है। वहीं अन्य ब्लॉक की फीडिंग में 100 फीसद शौचालयों का निर्माण पूरा कर दिया गया है।
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इससे साफ है कि ओडीएफ के फेर में जिले के कई ब्लॉकों में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल चला। वहीं वेबसाइट की एक और रिपोर्ट बताती है कि मारहरा ब्लॉक के सभी गांव ओडीएफ हो चुके हैं। कुल 85 गांवों में से 61 गांवों का सत्यापन भी हो चुका है। ऐसे में सवाल है कि फिर 44 शौचालयों का निर्माण क्यों छोड़ दिया गया है? पूरी रिपोर्टिंग बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रही है। वहीं ओडीएफ के मामले में सबसे आगे चल रहा मारहरा ब्लॉक सबसे पीछे आ गया है।
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जियो टैग महज 70 फीसद
मानकों के मुताबिक जिले के गांवों को ओडीएफ घोषित करने से पूर्व गांव में बनाए गए शौचालयों की जियो टैगिंग पूरी हो जाती है। हालांकि जिले में अब तक महज 70 फीसद जियो टैगिंग ही पूरी हो सकी है। ऐसे में ओडीएफ की कहानी फर्जी नजर आती है।