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यूपी: 415 करोड़ की जीएसटी देनदारी, वसूली सिर्फ 2.5 करोड़; गिरफ्तारी-संपत्ति जब्ती के बाद भी मास्टरमाइंड फरार
Thu, 08 Oct 2026 11:48 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:48 AM IST
सार
42 फर्जी फर्मों के जरिए 236 करोड़ रुपये के आईटीसी फर्जीवाड़े के मामले में जीएसटी विभाग ने 415 करोड़ रुपये की देनदारी तय की, लेकिन एक साल में सिर्फ 2.5 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी। सात लोगों की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती के अधिकार के बावजूद मास्टरमाइंड पकड़ से बाहर हैं और सरकारी धन की वसूली एक फीसदी तक नहीं पहुंच सकी।
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करोड़ों की आईटीसी हड़पी
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कागजों पर कारोबार से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के 236 करोड़ लेकर लापता 42 फर्मों पर जीएसटी विभाग ने 415 करोड़ रुपये की देनदारी निकाली गई है। लेकिन वसूली 1% भी नहीं हो सकी। एक साल में महज 2.5 करोड़ रुपये वसूले गए। ये हाल तब है जब जीएसटी एक्ट में विभाग को गिरफ्तारी से लेकर संपत्तियों की जब्ती तक की शक्ति है।
बोगस फर्मों को आईटीसी में घोटाला करने का मौका सेंट्रल जीएसटी में पंजीकरण के समय सत्यापन न होने से मिला। इस खामी से टैक्स माफिया ने सरकार को 236 करोड़ रुपये का चूना गया। कागजों पर बनी 42 फर्जी शेल कंपनियां आईटीसी दूसरे राज्यों में डंप कर दिया। नुकसान की भरपाई के लिए विभाग ने 415 करोड़ रुपये की देनदारी (डिमांड) तो निकाली है, लेकिन वसूली अब तक महज 2.5 करोड़ रुपये हो सकी। यह देनदारी का एक प्रतिशत भी नहीं। एसआईटी जांच में 42 में से 33 फर्जी फर्में सेंट्रल जीएसटी अधिकार क्षेत्र की पाई गई हैं।
इस सिंडिकेट को विभाग की रडार से बचाने के लिए फर्मों को केवल 3 से 6 महीने तक ही सक्रिय रखा गया। इस छोटी अवधि में फर्जी बिलों के जरिए तेजी से करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट पास-ऑन हो गया। और जांच शुरू होने से पहले ही फर्म बंद कर मास्टरमाइंड गायब हो गए। इस संबंध में जीएसटी एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी का कहना है कि एसटीआई आरोपियों की तलाश में जुटी है। आईटीसी की वसूली के प्रयास जारी हैं। संपत्तियां तलाशी जा रही हैं। उन्हें जब्त किया जाएगा।
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कानूनी प्रावधानों के बावजूद वसूली में नाकाम
कर विशेषज्ञ मनोज शर्मा के अनुसार जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 (अपराध और दंड), धारा 74 (धोखाधड़ी में टैक्स डिमांड), और धारा 69 (गिरफ्तारी का अधिकार) के तहत कड़े प्रावधान हैं। विभाग ने न्याय निर्णयन के तहत 415 करोड़ की डिमांड भी बनाई और 7 लोगों की गिरफ्तारी भी की, लेकिन मास्टरमाइंड पकड़ में नहीं आए। वे संपत्तियां भी ठिकाने लगा चुके होंगे। यही कारण है कि धारा 83 के तहत संपत्ति जब्ती के बावजूद रिकवरी 2.5 करोड़ तक ही सीमित रह गई है।
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बोगस फर्मों को आईटीसी में घोटाला करने का मौका सेंट्रल जीएसटी में पंजीकरण के समय सत्यापन न होने से मिला। इस खामी से टैक्स माफिया ने सरकार को 236 करोड़ रुपये का चूना गया। कागजों पर बनी 42 फर्जी शेल कंपनियां आईटीसी दूसरे राज्यों में डंप कर दिया। नुकसान की भरपाई के लिए विभाग ने 415 करोड़ रुपये की देनदारी (डिमांड) तो निकाली है, लेकिन वसूली अब तक महज 2.5 करोड़ रुपये हो सकी। यह देनदारी का एक प्रतिशत भी नहीं। एसआईटी जांच में 42 में से 33 फर्जी फर्में सेंट्रल जीएसटी अधिकार क्षेत्र की पाई गई हैं।
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इस सिंडिकेट को विभाग की रडार से बचाने के लिए फर्मों को केवल 3 से 6 महीने तक ही सक्रिय रखा गया। इस छोटी अवधि में फर्जी बिलों के जरिए तेजी से करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट पास-ऑन हो गया। और जांच शुरू होने से पहले ही फर्म बंद कर मास्टरमाइंड गायब हो गए। इस संबंध में जीएसटी एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी का कहना है कि एसटीआई आरोपियों की तलाश में जुटी है। आईटीसी की वसूली के प्रयास जारी हैं। संपत्तियां तलाशी जा रही हैं। उन्हें जब्त किया जाएगा।
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कानूनी प्रावधानों के बावजूद वसूली में नाकाम
कर विशेषज्ञ मनोज शर्मा के अनुसार जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 (अपराध और दंड), धारा 74 (धोखाधड़ी में टैक्स डिमांड), और धारा 69 (गिरफ्तारी का अधिकार) के तहत कड़े प्रावधान हैं। विभाग ने न्याय निर्णयन के तहत 415 करोड़ की डिमांड भी बनाई और 7 लोगों की गिरफ्तारी भी की, लेकिन मास्टरमाइंड पकड़ में नहीं आए। वे संपत्तियां भी ठिकाने लगा चुके होंगे। यही कारण है कि धारा 83 के तहत संपत्ति जब्ती के बावजूद रिकवरी 2.5 करोड़ तक ही सीमित रह गई है।