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हाईवे चौड़ीकरण में छिन जाएंगे 200 परिवारों के आशियाने
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:54 PM IST
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हाईवे
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद/कठफोरी। सिक्सलेन निर्माण को एनएचएआई के चिह्नांकन के साथ कठफोरी के 200 परिवारों की नींद उड़ गई। इससे उनके आशियाने खत्म हो जाएंगे, वहीं कई परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। एनएचएआई मुआवजा 2012 की सर्किल दरों के आधार पर देने की तैयारी कर ली। ग्रामीण इससे सहमत नहीं। कई के आवास ग्रामसभा में बताकर भूमि का मुआवजा नहीं देने की बात कही। परेशान ग्रामीण बड़ा आंदोलन कर सकते हैं।
फोरलेन को सिक्स लेन में तब्दील किया जा रहा है। किसानों की भूमि ली तथा मुआवजा भी बांट दिया। कस्बा कठफोरी ऐसा हैं, जहां चौड़ीकरण के कारण कई परिवारों के मकान ढहेंगे तो कइयों की रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों की मानें तो सीमांकन सही नहीं हो रहा। एक बार 26 मीटर पर चिह्न लगाया तो दूसरी बार 33.5 मीटर पर लगा दिए। ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी भूमि अधिग्रहीत होगी।
मकान चाहे आबादी में बना हो, खुद की भूमि पर मुआवजा पूरा देना चाहिए। प्रशासन को मुआवजा वर्तमान सर्किल दरों के हिसाब से देना चाहिए। हाईवे से प्रभावित होने वालों में मुख्यरूप से ब्रजमोहन, दलवीर सिंह, गुलाब सिंंह, अमन कुमार, रमन कुमार, भगवान सिंह, आधेराम, सुनील कुमार, जयश्रीराम, रामवीर सिंह, सुल्तान सिंंह, दिवारीलाल, हरनरायन, मोहर सिंह, नाथूराम के पूरा ही मकान समाप्त हो जाएगा।
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राजवीर सिंह ने कहा कि प्रशासन एवं एनएचएआई के अफसरों को सोचना चाहिए कि किसी को उजाड़ रहे हैं तो उसे इतना तो दें ताकि वह बस जाए। शहरी क्षेत्र में किराएदार मकान मालिक बन सकता हैं तो हम तो वर्षों से रह रहे हैं। आदिराम ने कहा कि 2012 की सर्किल दरें नहीं चलेंगी, हमें आज की सर्किल दरों और चारगुना मुआवजा चाहिए।
हमारे घर एवं प्रतिष्ठानों को उजाड़ें और हमें मुआवजा भी नहीं दें यह कहां का न्याय है। नेत्रपाल ने कहा कि जमीन एक्सप्रेस वे में चली गई और दुकान सिक्सलेन बनाने में जा रही है। भूमिहीन हो गए थे अब दुकान भी जा रही है। भाजपा इसी तरह किसानों के चेहरों पर खुशहाली लाएगी।
जेड़ाझाल परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला। भाकियू भानु के जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंंह टाइगर लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं लेकिन नहर विभाग के अधिकारी कोई ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। सिक्सलेन से प्रभावि होने वाले पचवान तथा नैपई, कपावली,नगला अमान के साथ खैरगढ़ क्षेत्र के काफी किसानों ने आंदोलन किया था। मालभाड़ा कारीडोर से जिले के किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिल सका।
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फोरलेन को सिक्स लेन में तब्दील किया जा रहा है। किसानों की भूमि ली तथा मुआवजा भी बांट दिया। कस्बा कठफोरी ऐसा हैं, जहां चौड़ीकरण के कारण कई परिवारों के मकान ढहेंगे तो कइयों की रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों की मानें तो सीमांकन सही नहीं हो रहा। एक बार 26 मीटर पर चिह्न लगाया तो दूसरी बार 33.5 मीटर पर लगा दिए। ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी भूमि अधिग्रहीत होगी।
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मकान चाहे आबादी में बना हो, खुद की भूमि पर मुआवजा पूरा देना चाहिए। प्रशासन को मुआवजा वर्तमान सर्किल दरों के हिसाब से देना चाहिए। हाईवे से प्रभावित होने वालों में मुख्यरूप से ब्रजमोहन, दलवीर सिंह, गुलाब सिंंह, अमन कुमार, रमन कुमार, भगवान सिंह, आधेराम, सुनील कुमार, जयश्रीराम, रामवीर सिंह, सुल्तान सिंंह, दिवारीलाल, हरनरायन, मोहर सिंह, नाथूराम के पूरा ही मकान समाप्त हो जाएगा।
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राजवीर सिंह ने कहा कि प्रशासन एवं एनएचएआई के अफसरों को सोचना चाहिए कि किसी को उजाड़ रहे हैं तो उसे इतना तो दें ताकि वह बस जाए। शहरी क्षेत्र में किराएदार मकान मालिक बन सकता हैं तो हम तो वर्षों से रह रहे हैं। आदिराम ने कहा कि 2012 की सर्किल दरें नहीं चलेंगी, हमें आज की सर्किल दरों और चारगुना मुआवजा चाहिए।
हमारे घर एवं प्रतिष्ठानों को उजाड़ें और हमें मुआवजा भी नहीं दें यह कहां का न्याय है। नेत्रपाल ने कहा कि जमीन एक्सप्रेस वे में चली गई और दुकान सिक्सलेन बनाने में जा रही है। भूमिहीन हो गए थे अब दुकान भी जा रही है। भाजपा इसी तरह किसानों के चेहरों पर खुशहाली लाएगी।
जेड़ाझाल परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला। भाकियू भानु के जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंंह टाइगर लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं लेकिन नहर विभाग के अधिकारी कोई ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। सिक्सलेन से प्रभावि होने वाले पचवान तथा नैपई, कपावली,नगला अमान के साथ खैरगढ़ क्षेत्र के काफी किसानों ने आंदोलन किया था। मालभाड़ा कारीडोर से जिले के किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिल सका।
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