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टेंपर्ड अंकपत्र वाले 33 शिक्षकों का सेवा से बाहर होना तय

Sat, 26 Jun 2021 10:52 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 10:52 PM IST
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33 teachers with tempered marksheets set to be out of service
मैनपुरी। बीएड के टेंपर्ड अंकपत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले जिले में तैनात 33 शिक्षकों को सेवा से शीघ्र बाहर किया जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही विश्वविद्यालय समिति ने इन सभी के अंकपत्रों को टेंपर्ड माना है। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई 28 जून को है। एसआईटी ने इन शिक्षकों के अंकपत्र टेंपर्ड घोषित किए थे। विश्वविद्यालय समिति के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें बाहर करने की तैयारियां शुरू कर दी है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से वर्ष 2004-05 में बीएड की फेंक और टेंपर्ड अंकपत्र हासिल कर जिले में 77 लोगों ने शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली थी। एसआईटी ने मामले की जांच की तो जिले में कार्यरत 44 शिक्षकों का बीएड अंकपत्र और डिग्री फेंक निकली। इसका डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कोई रिकार्ड नहीं मिला। एसआईटी ने 33 शिक्षकों की बीएड डिग्री टेंपर्ड घोषित की। फेंक डिग्री वाले 44 शिक्षकों को पूर्व में ही सेवा से बाहर किया जा चुका है। टेंपर्ड अंकपत्र वाले शिक्षकों की विश्वविद्यालय जांच कर रहा था।
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शुक्रवार को विश्वविद्यालय की जांच समिति ने एसआईटी सूची में शामिल 1021 शिक्षकों का अंकपत्र टेंपर्ड माने। इनमें जिले में कार्यरत 33 शिक्षक भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय द्वारा अंकपत्र को टेंपर्ड माने जाने के बाद जिले में तैनात 33 शिक्षकों का सेवा से बाहर होना तय हो गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इन्हें सेवा से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी हैं।
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44 शिक्षकों को पूर्व में किया जा चुका है बाहर
एसआईटी सूची में शामिल जिले के 77 शिक्षकों में से 44 फेंक बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को पूर्व में ही सेवा से बाहर कर दिया गया है। चार शिक्षकों को जनवरी 2020 में सेवा से बाहर किया गया था, जबकि 40 शिक्षकों को फरवरी 2021 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेवा से बाहर किया गया है।
बिना वेतन के कर रहे हैं कार्य
एसआईटी सूची में शामिल जिले के 77 में से 73 शिक्षकों को 30 नवंबर 2020 और चार शिक्षकों को जनवरी माह में एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सेवा से बाहर कर दिया था। बाद में 73 शिक्षक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट आने तक इन्हें बिना वेतन के कार्य करने के आदेश दिए थे। 26 फरवरी को फेंक डिग्रीधारक 40 शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया गया था। वर्तमान में टेंपर्ड अंकपत्र वाले 33 शिक्षक बिना वेतन के कार्य कर रहे हैं।

कब क्या हुई कार्रवाई
दो नवंबर 2017 को एसआईटी ने फर्जी शिक्षकों की सूची जनपद भेजी
15 नवंबर 2017 बीएसए ने बर्खास्तगी का प्रथम नोटिस जारी कर मांगा जवाब
20 अगस्त 2018 बीएसए ने बर्खास्तगी के लिए दूसरा नोटिस जारी कर मांगा जवाब
जुलाई 2019 बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारी को जांच के लिए विश्वविद्यालय भेजा
21 सितंबर 2019 बीएसए ने तीसरा और अंतिम बर्खास्तगी नोटिस किया जारी
30 नवंबर 2019, 73 शिक्षकों की जिला चयन समिति के निर्देश पर बीएसए ने सेवा की समाप्त
जनवरी 2020, चार शिक्षकों की सेवा की गई समाप्त
फरवरी 2020, 73 बर्खास्त शिक्षकों ने बर्खास्तगी को कोर्ट में दी चुनौती, कोर्ट ने बिना वेतन के काम करने के दिया आदेश
फरवरी, 2020, कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जांच कर मांगी रिपोर्ट
26 फरवरी 2021, विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के बाद फर्जी डिग्री धारक 40 शिक्षक सेवा से हुए बाहर
25 जून, 2021, विश्वविद्यालय ने एसआईटी सूची में शामिल 33 शिक्षकों के अंकपत्र माने टेंपर्ड
एसआईटी सूची में शामिल टेंपर्ड शिक्षक बिना वेतन के काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने उनके अंकपत्रों को टेंपर्ड माना है, इसकी सूचना मिली है। कोर्ट में 28 जून को सुनवाई है। जो निर्णय आएगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। शिक्षकों को सेवा से बाहर करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए
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