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मृत्यु पूर्व बयान की हेराफेरी में फंसे एसडीएम, सीओ
Updated Thu, 29 Jun 2017 11:59 PM IST
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मथुरा। जिस मृत्यु पूर्व बयान को सबसे बड़ा साक्ष्य माना जाता है अब उसमें भी हेराफेरी हो रही है। एसडीएम और एसओ ने जलने से मरी एक महिला के मृत्यु पूर्व बयान अपने हिसाब से लिखकर लाश के हाथ और पैर का अंगूठा लगवा लिया। सुनवाई के दौरान अदालत में पूरा मामला खुला। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट विवेकानन्द शरण त्रिपाठी ने बयान लेने वाले एसडीएम और थानाध्यक्ष के साथ ही वादी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है।
घटनाक्रम 16 जून, 2016 का है। मगोर्रा थाना क्षेत्र के गांव नगला भूरिया निवासी संतोष की पत्नी आरती (25) की जलने से मौत हो गई थी। आरती के चाचा हाथरस जनपद के शिखरपुर निवासी किशन सिंह ने मगोर्रा थाने में पति संतोष, सास राम दुलारी, ससुर बलबीर, ननद सबीना के खिलाफ मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
झुलसी आरती को इलाज के लिए पहले भरतपुर के अस्पताल ले जाया गया और फिर वहां से दिल्ली ले गए। अस्सी फीसदी झुलस चुकी आरती की 26 जून को मौत हो गई थी। एसडीएम और थानाध्यक्ष ने अस्पताल पहुंचकर महिला का बयान भी लिया था। अफसरों ने रिकार्ड में जो दिखाया उसके मुताबिक 17 जून को मृत्यु पूर्व बयान हुए थे। जबकि पोस्टमार्टम में कहा गया कि महिला के हाथ और पैर के अंगूठे पर जो स्याही के निशान है वह उसकी मृत्यु के बाद के हैं।
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डाक्टर ने अदालत में भी यही बयान दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने बताया कि इस बयान के आधार पर माना गया कि दिल्ली के तत्कालीन एसडीएम विनोद कुमार और थानाध्यक्ष कुंवर साहब सिंह ने मृत्यु पूर्व बयान में हेराफेरी की है। मृतका के चाचा किशन सिंह की प्रथम सूचना रिपोर्ट और अदालत में दिए गए बयानाें में विरोधाभास मिलने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया।
आरती के पति संतोष, सास राम दुलारी, ससुर बलबीर, ननद सबीना को हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। देवर का मुकदमा बच्चों की अदालत में चल रहा है।
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घटनाक्रम 16 जून, 2016 का है। मगोर्रा थाना क्षेत्र के गांव नगला भूरिया निवासी संतोष की पत्नी आरती (25) की जलने से मौत हो गई थी। आरती के चाचा हाथरस जनपद के शिखरपुर निवासी किशन सिंह ने मगोर्रा थाने में पति संतोष, सास राम दुलारी, ससुर बलबीर, ननद सबीना के खिलाफ मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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झुलसी आरती को इलाज के लिए पहले भरतपुर के अस्पताल ले जाया गया और फिर वहां से दिल्ली ले गए। अस्सी फीसदी झुलस चुकी आरती की 26 जून को मौत हो गई थी। एसडीएम और थानाध्यक्ष ने अस्पताल पहुंचकर महिला का बयान भी लिया था। अफसरों ने रिकार्ड में जो दिखाया उसके मुताबिक 17 जून को मृत्यु पूर्व बयान हुए थे। जबकि पोस्टमार्टम में कहा गया कि महिला के हाथ और पैर के अंगूठे पर जो स्याही के निशान है वह उसकी मृत्यु के बाद के हैं।
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डाक्टर ने अदालत में भी यही बयान दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने बताया कि इस बयान के आधार पर माना गया कि दिल्ली के तत्कालीन एसडीएम विनोद कुमार और थानाध्यक्ष कुंवर साहब सिंह ने मृत्यु पूर्व बयान में हेराफेरी की है। मृतका के चाचा किशन सिंह की प्रथम सूचना रिपोर्ट और अदालत में दिए गए बयानाें में विरोधाभास मिलने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया।
आरती के पति संतोष, सास राम दुलारी, ससुर बलबीर, ननद सबीना को हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। देवर का मुकदमा बच्चों की अदालत में चल रहा है।