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कागजों में हुई खरीद की जांच भी कागजी: सीवीओ कार्यालय में 25 लाख का घोटाला, बिना सामान खरीदे पास हुए बिल
Sat, 02 May 2026 10:46 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 02 May 2026 10:46 AM IST
सार
आगरा के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में बिना सामान खरीदे 25 लाख रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है, जिसकी जांच आठ महीने बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। मंडलायुक्त के आदेश के बावजूद जांच टीम गठित नहीं होने से पूरा मामला अब भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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फर्जी बिल सांकेतिक
- फोटो : AI
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विस्तार
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) कार्यालय में सामान की खरीद में हुए घोटाले की जांच कागजों में ही उलझकर रह गई। बिना कोई सामान खरीदे 25 लाख से अधिक के भुगतान के मामले में मंडलायुक्त के आदेश के आठ महीने बाद भी जांच समिति का गठन नहीं किया गया है।
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17 सितंबर 2024 को तत्कालीन कार्यवाहक सीवीओ जयंत यादव ने 25 लाख रुपये से अधिक के प्लास्टिक के जूते, ग्लब्स, अलमारी, कुर्सी समेत अन्य सामान के लिए नियमों को ताक पर रखकर बिना जिला क्रय समिति का गठन किए तीन फर्मों से सामान की खरीदारी का ऑर्डर दिन। अगले ही दिन यानी 18 सितंबर को ही फर्मों की ओर से सीवीओ कार्यालय में सामान की आपूर्ति दिखाकर बिल पास करा लिए। बिलों का भुगतान कार्यवाहक सीवीओ के हस्ताक्षर से किया गया, जबकि 17 सितंबर 2024 को सीवीओ डीके पांडे ने कार्यभार संभाल लिया था। बावजूद इसके बिलों का भुगतान कर दिया गया।
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जब इस मामले की जानकारी विभाग के ही तत्कालीन कर्मचारी सतीश शर्मा को हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत सितंबर 2025 को मंडलायुक्त के साथ मुख्यमंत्री को भी लिखकर की। सतीश शर्मा ने बताया कि मंडलायुक्त ने एडीएम की अध्यक्षता में लेखा संभागीय अधिकारी के साथ टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन विभागीय अधिकारी की लापरवाही से मामले की जांच अभी भी ठंडे बस्ते में है।
सीवीओ डीके पांडे ने का कहना है कि मामला मेरे आने से पहले का है। शासन स्तर से इसकी जांच के लिए अधिकारी आए थे। जांच में बाबू को दोषी पाया था, जिनकी माैत हो चुकी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि मेरी शिकायत पर मंडलायुक्त के आदेश के बावजूद अभी तक कोई जांच टीम गठित नहीं की गई है।