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UP: कागजों में खरीदी दवाइयां, 25 लाख का भुगतान...जांच में खुला बड़ा खेल, फिर भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं

Thu, 09 Jul 2026 09:52 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 09 Jul 2026 09:52 AM IST
सार

आगरा के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कागजों पर दवाइयों और उपकरणों की फर्जी खरीद दिखाकर करीब 25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच में पूर्व अधिकारियों की भूमिका सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

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25 Lakh Fake Purchase Scam Exposed in Agra Veterinary Department No Action Despite Probe
सीडीओ आगरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 कागजों में पशु चिकित्सालय के लिए दवाइयों से लेकर उपकरण तक की खरीद हो गई। 25 लाख रुपये का भुगतान हो गया। शिकायत पर जांच में आरोप सिद्ध हुए फिर भी जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में हुए इस फर्जीवाड़े की जांच में खुलासा हुआ है।
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जांच में सामने आय कि नए सीवीओ डीके पांडेय के कार्यभार ग्रहण करने के बाद, पूर्व अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग कर पूर्व कार्यवाहक सीवीओ डॉ. जयंत यादव ने लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान करा दिया। जांच में पूर्व सीवीओ जयंत यादव और तत्कालीन लेखाकार को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया है। सीवीओ डीके पांडेय के अनभिज्ञता के तर्क को समिति ने खारिज कर दिया गया है। इन खुलासों के बावजूद अब तक इस मामले में जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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शिकायतकर्ता सतीश चंद्र शर्मा और अतुल सिरोही की शिकायतों के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर, 2024 को डॉ. डीके पांडेय ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बावजूद 18 सितंबर, 2024 को पूर्व सीवीओ डॉ. जयंत यादव की आईडी का उपयोग करके 24,44,923 रुपये के फर्जी बिल पास कर दिए गए। सामान की बिना खरीद किए भुगतान हो गया। डॉ. पांडेय ने इस भुगतान की जानकारी होने से इनकार किया, जिसे जांच समिति ने तथ्यों के आधार पर अस्वीकार्य बताया है।

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प्रथम दृष्टया इस अनियमितता के लिए तत्कालीन लेखाकार दिवंगत ज्ञानेंद्र भारद्वाज और पूर्व सीवीओ डॉ. जयंत यादव को उत्तरदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त, जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि अपर सांख्यिकी अधिकारी अरुण कुमार पिछले 20 वर्षों से आगरा में ही तैनात हैं। तमाम गड़बड़ियां उजागर होने और जांच रिपोर्ट में जिम्मेदारों के नाम सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई।

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शासन स्तर से होगी कार्रवाई
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने बताया कि जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं। भुगतान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी है। शासन स्तर से कार्रवाई होगी। 

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