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UP: पीएसी में 27 साल तक करता रहा नौकरी, फिर सामने आई ऐसी सच्चाई, पुलिस ने किया गिरफ्तार; ये सजा मिली
Thu, 09 Jul 2026 09:00 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 09 Jul 2026 09:00 AM IST
सार
फर्जी शपथपत्र के आधार पर पीएसी में सिपाही की नौकरी पाने वाले भोजराज सिंह को 27 साल पुराने मामले में आगरा की अदालत ने दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई। विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने पर आरोपी पहले ही सेवा से बर्खास्त हो चुका था, अब कोर्ट ने भी उसे दोषी मानते हुए दंडित किया।
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arrested, arrest demo
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
फर्जी शपथपत्र के आधार पर 27 वर्ष पूर्व पीएसी में सिपाही की नौकरी हासिल करने के मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की कोर्ट ने दोषी भोजराज सिंह को तीन वर्ष के साधारण कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
हाथरस के सादाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम सिथरापुर निवासी भोजराज सिंह ने फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत कर पीएसी में सिपाही के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। मामले का खुलासा होने पर एआरआईएम कार्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधान लिपिक प्रदीप कुमार वर्मा ने 8 सितंबर, 1998 को थाना ताजगंज में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
थाना ताजगंज पुलिस ने 1 जनवरी, 1999 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर उसे सेवा से भी हटा दिया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 31 मई, 1999 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार ने न्यायालय में गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भोजराज सिंह को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया।
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हाथरस के सादाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम सिथरापुर निवासी भोजराज सिंह ने फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत कर पीएसी में सिपाही के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। मामले का खुलासा होने पर एआरआईएम कार्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधान लिपिक प्रदीप कुमार वर्मा ने 8 सितंबर, 1998 को थाना ताजगंज में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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थाना ताजगंज पुलिस ने 1 जनवरी, 1999 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर उसे सेवा से भी हटा दिया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 31 मई, 1999 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार ने न्यायालय में गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भोजराज सिंह को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया।
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