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UP: अमेरिकी हमले ने तोड़ी आगरा के कारोबारियों की कमर, जूता-हस्तशिल्प निर्यात ठप; कंटेनर भाड़ा चार गुना बढ़ा
Thu, 09 Jul 2026 09:48 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 09 Jul 2026 09:48 AM IST
सार
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद आगरा के जूता और हस्तशिल्प निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कंटेनर का भाड़ा 500-700 डॉलर से बढ़कर 2000 डॉलर पहुंच गया है, जबकि अमेरिका और खाड़ी देशों को निर्यात लगभग ठप हो गया है।
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आगरा के जूता उद्योग में बदलाव की बयार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमेरिका की ओर से बुधवार को ईरान के 80 ठिकानों पर हमले के बाद निर्यातकों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। पहले ही कच्चे माल और भाड़े की महंगाई से निर्यातक मुश्किल में हैं। ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध विराम समझौता लागू हुआ तो निर्यात फिर शुरू होने की उम्मीद थी लेकिन बुधवार को ईरान पर अमेरिकी हमलों ने फुटवियर, हस्तशिल्प और कालीन के निर्यात पर ब्रेक लगा दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर युद्ध शुरू होने और वैश्विक टैरिफ की मार का सीधा असर आगरा के जूता और हस्तशिल्प उद्योग पर पड़ रहा है। अमेरिका और खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात पूरी तरह से रुक गया है। लगातार बढ़ते लॉजिस्टिक खर्चों और महंगे कच्चे माल ने शहर के 4000 करोड़ रुपये के सालाना निर्यात कारोबार को घुटनों पर ला दिया है। पिछले तीन महीनों से विदेशी ऑर्डर बंद पड़े हैं, जिससे 100 से अधिक बड़े निर्यातक अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं।
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आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चर्स एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि शिपिंग संकट के कारण जो कंटेनर पहले 500 से 700 डॉलर में बुक होता था, उसका भाड़ा अब 2000 डॉलर तक पहुंच गया है। जूता उद्योग मात्र 10% के प्रॉफिट मार्जिन पर काम करता है और विदेशी खरीदार से कीमतें पहले से तय होती हैं। ऐसे में सरकार की ओर से बढ़ाई गई श्रम लागत और युद्ध के कारण महंगे कच्चे माल से उत्पादन और मुनाफे में 15 से 20% तक की गिरावट आई है। वर्तमान में इटली, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन जैसे कुछ यूरोपीय देशों में सीमित मात्रा में माल जा रहा है, लेकिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए निर्यात पूरी तरह बाधित है।
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हस्तशिल्प सहित अन्य निर्यात भी प्रभावित
जूता उद्योग के अलावा हस्तशिल्प कारोबार भी मंदी की चपेट में है। हस्तशिल्प निर्यातक शीनू के मुताबिक, युद्ध के हालात ने इस सेक्टर की कमर तोड़ दी है। यह स्थानीय संकट देश के व्यापक निर्यात हालातों को भी दर्शाता है। लाल सागर संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश भर के चमड़ा, परिधान और इंजीनियरिंग गुड्स निर्यातकों को शिपिंग लागत में 30 से 40% की वृद्धि और ट्रांजिट समय में 15-20 दिनों की देरी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुश्किल हालातों में आगरा के निर्यातकों को सरकारी प्रोत्साहन और राहत पैकेज की सख्त दरकार है, जो फिलहाल नदारद है।
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अमेरिका और ईरान के बीच फिर युद्ध शुरू होने और वैश्विक टैरिफ की मार का सीधा असर आगरा के जूता और हस्तशिल्प उद्योग पर पड़ रहा है। अमेरिका और खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात पूरी तरह से रुक गया है। लगातार बढ़ते लॉजिस्टिक खर्चों और महंगे कच्चे माल ने शहर के 4000 करोड़ रुपये के सालाना निर्यात कारोबार को घुटनों पर ला दिया है। पिछले तीन महीनों से विदेशी ऑर्डर बंद पड़े हैं, जिससे 100 से अधिक बड़े निर्यातक अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं।
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हस्तशिल्प सहित अन्य निर्यात भी प्रभावित
जूता उद्योग के अलावा हस्तशिल्प कारोबार भी मंदी की चपेट में है। हस्तशिल्प निर्यातक शीनू के मुताबिक, युद्ध के हालात ने इस सेक्टर की कमर तोड़ दी है। यह स्थानीय संकट देश के व्यापक निर्यात हालातों को भी दर्शाता है। लाल सागर संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश भर के चमड़ा, परिधान और इंजीनियरिंग गुड्स निर्यातकों को शिपिंग लागत में 30 से 40% की वृद्धि और ट्रांजिट समय में 15-20 दिनों की देरी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुश्किल हालातों में आगरा के निर्यातकों को सरकारी प्रोत्साहन और राहत पैकेज की सख्त दरकार है, जो फिलहाल नदारद है।
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