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खुद के ही घर में कैद हुए अमीर खुसरो
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खुद के ही घर में कैद हुए अमीर खुसरो
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। मुगल काल में जब भाषाओं की विविधता लोगों को एक दूसरे से अलग कर रही थी तब अमीर खुसरों ने हिंदी की खड़ी बोली से लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। आगे चलकर खड़ी बोली से हिंदी का मान तो बढ़ा ही, वहीं खुसरों ने पहेलियां एवं मुकरियां रच कर हिंदी की रोचकता और बढ़ा दी। देश-दुनिया में हिंदी को पहचान दिलाने वाले सूफी संत कवि अमीर खुसरो को लोगों ने आज अपने ही घर में कैद कर दिया है।
अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर खुसरो ने जिले और पटियाली की पहचान देश व दुनिया में कराई। खुसरो 13वीं व 14वीं सदी के प्रमुख शायर, लेखक, गायक, संगीतकार, कव्वाली सितार राग इमान जिल्फ साजगरी के जनक व तबला वाद्य यंत्र के आविष्कारक, सूफी संत हिंदी खड़ी बोली के प्रथम कवि ने यहां पहचान से देश व दुनिया को रूबरू कराया। अमीर खुसरो भारत के ऐसे पहले कवि थे जो हिंदी व फारसी में एक साथ कविताएं लिखीं। अमीर खुसरो के पिता सैफुद्दीन तुर्क सेनापति उन्हें सात वर्ष की अवस्था में पटियाली से दिल्ली ले गए। उसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया। खुसरो का जीवन राज्याश्रय में बीता। 8 वर्ष की उम्र में अमीर खुसरो दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य बने और वह 16-17 साल की आयु तक व अच्छे कवि व शायर बन गए। उन्हें तू-ती-ए-हिंद, हीरामन जैसे सम्मानों से नवाजा गया। खुसरो की हिंदवी भाषा हिंदी खड़ी बोली के रूप में जानी गयी, जो हमारे संविधान की राजभाषा बनी। अमीर खुसरो की मां दौलत नाज एक हिंदू राजपूत वंशज थीं।
अमीर खुसरो जब पैदा हुए थे तब एक सूफी दरवेश ने अमीर खुसरो को देखकर एक भविष्य वांणी करते हुए खुसरो के पिता से कहा कि ‘आवरदी कसे राके दो कदम अज खाकानी पेश ख्वाहिंद बंद’ अर्थात तुम मेरे पास एक ऐसे होनहार बच्चे को लाये हो यह खाकानी विश्व प्रसिद्ध विद्वान से भी दो कदम आगे निकलेगा। अमीर खुसरो की प्रमुख कृतियों में तुहफा-तुस-सिगर, बाकिया नाकिया, तुगलक नामा, नुह-सिफर आदि प्रमुख रचनाएं रहीं।
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दिल छूते खुसरों के दोहे -
दिल्ली में सन 1276 ईस्वी में आयोजित एक कार्यक्रम में खुसरो ने पटियाली को याद किया। उन्होंने सुनाया कि गौरी सोवे सेज पर, मुहं पर डारे केश, चल खुसरो देश आपने, रैन चंहू देश। इसके अतिरिक्त खुसरों ने पढ़ा था कि-
खुसरो दरिया प्रेम का, सो उल्टी वा की धार, जो उबरो सो डूब गया, जो डूबा सो पार।
एक नजर में परिचय:
जन्म: 1253 ई.
स्थान: पटियाली (कासगंज)
मृत्यु: 1324 ई.
शैलियां: गजल, ख्याल, कव्वाली, रूबाई, तराना
व्यवसाय: संगीतज्ञ एवं कवि
जनवरी में कैद से बाहर आएगी खुसरो की प्रतिमा
पिछले तीन वर्षों से मालखाने में कैद अमीर खुसरो की प्रतिमा को मुकाम मिलने वाला है। प्रशासन खुसरो की प्रतिमा की स्थापना कराएगा और कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।
- एसडीएम पटियाली से रिपोर्ट मांग रहे हैं। नए साल में देश के कवि अमीर खुसरो की प्रतिमा की स्थापना करा दी जाएगी। तैयारियां की जा रही हैं, उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
- आरपी सिंह, डीएम, कासगंज।
राजीनीतिक विवाद में उलझ गया मूर्ति लगाने का कार्य
कासगंज। अमीर खुसरो की मूर्ति लगाने का कार्य राजनीतिक विवाद में उलझ गया। वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने मूर्ति लगवाने के लिए पहल की। भाजपा नेता श्यामसुंदर गुप्ता ने जयपुर से मूर्ति मंगवा ली। मूर्ति को खुसरो पार्क में लगवाने के लिए दीवार कटाई का कार्य भी शुरू हो गया। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी, जिससे सपा नेताओं को यह गवारा नहीं हुआ कि एक मुस्लिम कवि की मूर्ति भाजपा नेता लगवाएं। इस विवाद के बाद मूर्ति तहसील के मालखाने में रखवा दी गई।
खुसरो की प्रतिमा लगवाने की भाकियू ने की मांग, सौंपा ज्ञापन
कासगंज। भारतीय किसान यूनियन भानु के प्रांतीय संगठन मंत्री भगवान सिंह राघव ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर खुसरो की प्रतिमा को पुस्तकालय परिसर में स्थापित कराए जाने की मांग की है। प्रांतीय संगठन मंत्री ने कहा कि अमीर खुसरो की प्रतिमा ट्रेजरी में कैद है, उसे बाहर निकलवाया जाए। वहीं स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अमर शहीद महावीर सिंह राठोर की प्रतिमा जिला मुख्यालय परिसर में लगवाई जाए। इस मौके पर देशराज सिंह वर्मा, केपी सक्सेना, रामदास कश्यप, संजय प्रजापति, धर्मेंद्र शर्मा, एआरएन पचोरी, राकेश पंडित, सत्यभान सिंह, स्वदेश सिंह, जयपाल वर्मा, जयसिंह पंडित, आदि मौजूद रहे।
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अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर खुसरो ने जिले और पटियाली की पहचान देश व दुनिया में कराई। खुसरो 13वीं व 14वीं सदी के प्रमुख शायर, लेखक, गायक, संगीतकार, कव्वाली सितार राग इमान जिल्फ साजगरी के जनक व तबला वाद्य यंत्र के आविष्कारक, सूफी संत हिंदी खड़ी बोली के प्रथम कवि ने यहां पहचान से देश व दुनिया को रूबरू कराया। अमीर खुसरो भारत के ऐसे पहले कवि थे जो हिंदी व फारसी में एक साथ कविताएं लिखीं। अमीर खुसरो के पिता सैफुद्दीन तुर्क सेनापति उन्हें सात वर्ष की अवस्था में पटियाली से दिल्ली ले गए। उसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया। खुसरो का जीवन राज्याश्रय में बीता। 8 वर्ष की उम्र में अमीर खुसरो दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य बने और वह 16-17 साल की आयु तक व अच्छे कवि व शायर बन गए। उन्हें तू-ती-ए-हिंद, हीरामन जैसे सम्मानों से नवाजा गया। खुसरो की हिंदवी भाषा हिंदी खड़ी बोली के रूप में जानी गयी, जो हमारे संविधान की राजभाषा बनी। अमीर खुसरो की मां दौलत नाज एक हिंदू राजपूत वंशज थीं।
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अमीर खुसरो जब पैदा हुए थे तब एक सूफी दरवेश ने अमीर खुसरो को देखकर एक भविष्य वांणी करते हुए खुसरो के पिता से कहा कि ‘आवरदी कसे राके दो कदम अज खाकानी पेश ख्वाहिंद बंद’ अर्थात तुम मेरे पास एक ऐसे होनहार बच्चे को लाये हो यह खाकानी विश्व प्रसिद्ध विद्वान से भी दो कदम आगे निकलेगा। अमीर खुसरो की प्रमुख कृतियों में तुहफा-तुस-सिगर, बाकिया नाकिया, तुगलक नामा, नुह-सिफर आदि प्रमुख रचनाएं रहीं।
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दिल छूते खुसरों के दोहे -
दिल्ली में सन 1276 ईस्वी में आयोजित एक कार्यक्रम में खुसरो ने पटियाली को याद किया। उन्होंने सुनाया कि गौरी सोवे सेज पर, मुहं पर डारे केश, चल खुसरो देश आपने, रैन चंहू देश। इसके अतिरिक्त खुसरों ने पढ़ा था कि-
खुसरो दरिया प्रेम का, सो उल्टी वा की धार, जो उबरो सो डूब गया, जो डूबा सो पार।
एक नजर में परिचय:
जन्म: 1253 ई.
स्थान: पटियाली (कासगंज)
मृत्यु: 1324 ई.
शैलियां: गजल, ख्याल, कव्वाली, रूबाई, तराना
व्यवसाय: संगीतज्ञ एवं कवि
जनवरी में कैद से बाहर आएगी खुसरो की प्रतिमा
पिछले तीन वर्षों से मालखाने में कैद अमीर खुसरो की प्रतिमा को मुकाम मिलने वाला है। प्रशासन खुसरो की प्रतिमा की स्थापना कराएगा और कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।
- एसडीएम पटियाली से रिपोर्ट मांग रहे हैं। नए साल में देश के कवि अमीर खुसरो की प्रतिमा की स्थापना करा दी जाएगी। तैयारियां की जा रही हैं, उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
- आरपी सिंह, डीएम, कासगंज।
राजीनीतिक विवाद में उलझ गया मूर्ति लगाने का कार्य
कासगंज। अमीर खुसरो की मूर्ति लगाने का कार्य राजनीतिक विवाद में उलझ गया। वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने मूर्ति लगवाने के लिए पहल की। भाजपा नेता श्यामसुंदर गुप्ता ने जयपुर से मूर्ति मंगवा ली। मूर्ति को खुसरो पार्क में लगवाने के लिए दीवार कटाई का कार्य भी शुरू हो गया। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी, जिससे सपा नेताओं को यह गवारा नहीं हुआ कि एक मुस्लिम कवि की मूर्ति भाजपा नेता लगवाएं। इस विवाद के बाद मूर्ति तहसील के मालखाने में रखवा दी गई।
खुसरो की प्रतिमा लगवाने की भाकियू ने की मांग, सौंपा ज्ञापन
कासगंज। भारतीय किसान यूनियन भानु के प्रांतीय संगठन मंत्री भगवान सिंह राघव ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर खुसरो की प्रतिमा को पुस्तकालय परिसर में स्थापित कराए जाने की मांग की है। प्रांतीय संगठन मंत्री ने कहा कि अमीर खुसरो की प्रतिमा ट्रेजरी में कैद है, उसे बाहर निकलवाया जाए। वहीं स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अमर शहीद महावीर सिंह राठोर की प्रतिमा जिला मुख्यालय परिसर में लगवाई जाए। इस मौके पर देशराज सिंह वर्मा, केपी सक्सेना, रामदास कश्यप, संजय प्रजापति, धर्मेंद्र शर्मा, एआरएन पचोरी, राकेश पंडित, सत्यभान सिंह, स्वदेश सिंह, जयपाल वर्मा, जयसिंह पंडित, आदि मौजूद रहे।