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मूरतिन की खान रहौ है मथुरा को कंकाली टीलौ
Updated Thu, 29 Mar 2018 08:29 PM IST
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डैमो
- फोटो : डैमो
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मथुरा। कंकाली टीला के नाम से सभी परिचित हैं। यहां कंकाली देवी का प्राचीन मंदिर है। लेकिन इसके अलावा भी इस टीला के साथ एक और महत्वपूर्ण और प्राचीन इतिहास जुड़ा है। सबसे अधिक मूर्तियां इसी टीले से प्राप्त हुई हैं।
वैसे तो धर्म और आस्था की भूमि मथुरा मूर्तिकला का बड़ा केंद्र रहा है। यहां विभिन्न धर्मों के देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं। इसी में प्रमुख स्थान कंकाली टीला है। यह टीला भूतेश्वर के निकट स्थित है, जहां कंकाली देवी विराजमान है। यह टीला मथुरा के लिए ही नहीं देश और दुनियां के लिए बहुत भी महत्वपूर्ण है। यहां से सर्वाधिक 736 मूर्तियां मिली हैं, जो वर्तमान में मथुरा राजकीय संग्रहालय के साथ लखनऊ, दिल्ली और राष्ट्रीय संग्रहालय कलकत्ता में प्रदर्शित हैं।
मथुरा संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. एसपी सिंह बताते हैं कि जैन, बौद्ध और हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां इस टीले की खोदाई के दौरान मिली हैं। इसमें जैन धर्म का पहला स्तूप भी शामिल है। इसके अवशेष यहां मिले हैं। सबसे पहले इस टीले की खुदाई अंग्रेजी अफसर फ्यूहरर ने कराई थी। 10 साल से ज्यादा चली खोदाई में बेशकीमती मूर्तियां निकल कर आई। इसमें जैन सरस्वती की पहली मूर्ति भी है। इसके अलाव बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की भी मूर्तियां यहां मिली हैं। यह टीला मूर्ति कला की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है।
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वैसे तो धर्म और आस्था की भूमि मथुरा मूर्तिकला का बड़ा केंद्र रहा है। यहां विभिन्न धर्मों के देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं। इसी में प्रमुख स्थान कंकाली टीला है। यह टीला भूतेश्वर के निकट स्थित है, जहां कंकाली देवी विराजमान है। यह टीला मथुरा के लिए ही नहीं देश और दुनियां के लिए बहुत भी महत्वपूर्ण है। यहां से सर्वाधिक 736 मूर्तियां मिली हैं, जो वर्तमान में मथुरा राजकीय संग्रहालय के साथ लखनऊ, दिल्ली और राष्ट्रीय संग्रहालय कलकत्ता में प्रदर्शित हैं।
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मथुरा संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. एसपी सिंह बताते हैं कि जैन, बौद्ध और हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां इस टीले की खोदाई के दौरान मिली हैं। इसमें जैन धर्म का पहला स्तूप भी शामिल है। इसके अवशेष यहां मिले हैं। सबसे पहले इस टीले की खुदाई अंग्रेजी अफसर फ्यूहरर ने कराई थी। 10 साल से ज्यादा चली खोदाई में बेशकीमती मूर्तियां निकल कर आई। इसमें जैन सरस्वती की पहली मूर्ति भी है। इसके अलाव बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की भी मूर्तियां यहां मिली हैं। यह टीला मूर्ति कला की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है।
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