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कांच इकाईयों को मिलेगी गैस, हटेगी टीटीजेड पर लगी रोक
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:04 AM IST
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फिरोजाबाद। पर्यावरण मंत्रालय में शुक्रवार को आगरा-फिरोजाबाद के उद्योग को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें मंत्रालय के सचिव एसएन झा ने आश्वासन दिया कि टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना पर लगी रोक हटेगी। सभी लंबित इकाइयों को गैस दी जाएगी।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की बैठक मंत्रालय सचिव एसएन झा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई। इसमें नए उद्योग लगाने और क्षमता विस्तार पर रोक का मामला प्रमुखता से उठा।
बैठक में फिरोजाबाद के उद्योगों की रिपोर्ट लेकर गए उपायुक्त उद्योग विभाग शरद टंडन ने बताया कि मंडलायुक्त की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का अध्ययन करने के उपरांत सचिव ने कहा कि नई इकाइयां लगाने पर जो रोक लगी है, इसको हटाया जाएगा। टीटीजेड में जो इकाइयां गैस लेने की इच्छुक हैं, जो इकाइयां प्रतीक्षारत सूची में चल रही हैं, उन सभी इकाइयों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
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मंत्रालय सचिव ने कहा कि टीटीजेड की रोक हटाने व इकाइयां को गैस देने से पूर्व उद्योग विभाग को सर्वे कराकर यह रिपोर्ट देनी होगी कि वर्ष 1996 से पहले 625 इकाइयों की सूची में कितनी इकाइयां संचालित हो रही हैं कितनी बंद हैं। ऐसी कितनी इकाइयां हैं, जो गैस मिलने से वंचित रह गई हैं। वर्तमान में प्रतीक्षारत कितनी इकाइयां हैं।
इन सभी इकाइयों को कितनी गैस की जरूरत है, इसका सर्वे कराकर 20 अगस्त तक हर हाल में रिपोर्ट करें। 31 जुलाई को उद्यमियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ मंत्रालय के मुख्य सचिव से मुलाकात की थी। मंडलायुक्त के. राममोहन राव, डीएम आगरा गौरव दयाल, डीएम फिरोजाबाद नेहा शर्मा, उपायुक्त उद्योग शरद टंडन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर शामिल रहे।
पर्यावरण मंत्रालय सचिव ने कहा कि उद्योग में डीजल चालित वाहन, जेनरेटर सेट, कूड़ा जलाने, अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ रहा है, इन पर सख्ती से रोक लगाने का इंतजाम करें।
पर्यावरण मंत्रालय की बैठक इससे पूर्व बैठक 15 अक्तूबर 2014 में आयोजित हुई थी। मंत्रालय के सचिव ने कहा कि 20 अगस्त तक सर्वे कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसी माह पुन: बैठक बुलाई जाएगी।
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जनवरी-2015 को आयोजित टीटीजेड की बैठक में कांच इकाइयों द्वारा किए गए क्षमता विस्तार को फ्रीज करते हुए नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगा दी थी। गेल गैस को निर्देश दिए गए थे। किसी इकाइयों को गैस न दी जाए जबकि टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना के संबंध में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
टीटीजेड के फरमान से प्रतीक्षारत चल रही 43 इकाइयां अधर में लटक गई हैं। करोड़ों का सेटअप लगाने के बाद उद्यमी गैस पाने को पिछले ढाई से साल से नई दिल्ली व लखनऊ के चक्कर काट रहे हैं। 31 जुलाई को भी उद्यमियों ने पर्यावरण मंत्रालय के मुख्य सचिव के समक्ष अपना रखा है।
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की बैठक मंत्रालय सचिव एसएन झा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई। इसमें नए उद्योग लगाने और क्षमता विस्तार पर रोक का मामला प्रमुखता से उठा।
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बैठक में फिरोजाबाद के उद्योगों की रिपोर्ट लेकर गए उपायुक्त उद्योग विभाग शरद टंडन ने बताया कि मंडलायुक्त की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का अध्ययन करने के उपरांत सचिव ने कहा कि नई इकाइयां लगाने पर जो रोक लगी है, इसको हटाया जाएगा। टीटीजेड में जो इकाइयां गैस लेने की इच्छुक हैं, जो इकाइयां प्रतीक्षारत सूची में चल रही हैं, उन सभी इकाइयों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
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मंत्रालय सचिव ने कहा कि टीटीजेड की रोक हटाने व इकाइयां को गैस देने से पूर्व उद्योग विभाग को सर्वे कराकर यह रिपोर्ट देनी होगी कि वर्ष 1996 से पहले 625 इकाइयों की सूची में कितनी इकाइयां संचालित हो रही हैं कितनी बंद हैं। ऐसी कितनी इकाइयां हैं, जो गैस मिलने से वंचित रह गई हैं। वर्तमान में प्रतीक्षारत कितनी इकाइयां हैं।
इन सभी इकाइयों को कितनी गैस की जरूरत है, इसका सर्वे कराकर 20 अगस्त तक हर हाल में रिपोर्ट करें। 31 जुलाई को उद्यमियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ मंत्रालय के मुख्य सचिव से मुलाकात की थी। मंडलायुक्त के. राममोहन राव, डीएम आगरा गौरव दयाल, डीएम फिरोजाबाद नेहा शर्मा, उपायुक्त उद्योग शरद टंडन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर शामिल रहे।
पर्यावरण मंत्रालय सचिव ने कहा कि उद्योग में डीजल चालित वाहन, जेनरेटर सेट, कूड़ा जलाने, अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ रहा है, इन पर सख्ती से रोक लगाने का इंतजाम करें।
पर्यावरण मंत्रालय की बैठक इससे पूर्व बैठक 15 अक्तूबर 2014 में आयोजित हुई थी। मंत्रालय के सचिव ने कहा कि 20 अगस्त तक सर्वे कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसी माह पुन: बैठक बुलाई जाएगी।
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जनवरी-2015 को आयोजित टीटीजेड की बैठक में कांच इकाइयों द्वारा किए गए क्षमता विस्तार को फ्रीज करते हुए नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगा दी थी। गेल गैस को निर्देश दिए गए थे। किसी इकाइयों को गैस न दी जाए जबकि टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना के संबंध में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
टीटीजेड के फरमान से प्रतीक्षारत चल रही 43 इकाइयां अधर में लटक गई हैं। करोड़ों का सेटअप लगाने के बाद उद्यमी गैस पाने को पिछले ढाई से साल से नई दिल्ली व लखनऊ के चक्कर काट रहे हैं। 31 जुलाई को भी उद्यमियों ने पर्यावरण मंत्रालय के मुख्य सचिव के समक्ष अपना रखा है।