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शिक्षकों की कमी से जूझेंगे सहायता प्राप्त कॉलेज
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मैनपुरी। नवीन शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के जो हालात हैं उनके सुधार की अभी कोई तैयारी नहीं है। गत सत्र में जिस प्रकार से छात्र-छात्राएं शिक्षकों की कमी से जूझते रहे। इस सत्र में भी हाल वही दिख रहे हैं।
जनपद में 53 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी चल रही है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए न तो विभाग कुछ कर पा रहा है और न ही शासन। सत्र 2018-19 में शिक्षकों की कमी के कारण कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल नहीं बन सका वहीं स्थिति इस सत्र में भी दिखाई दे रही है। नवीन सत्र का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन शिक्षकों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जहां सरकार एक तरफ सहायता प्राप्त व सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा व्यवस्था की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर नहीं कर पा रही है। जिसके चलते यहां संविदा शिक्षकों के ऊपर ही छात्रों का भविष्य निर्भर है। प्रबंधक और प्रधानाचार्यों ने मिली भगत कर कई कॉलेजों में अप्रशिक्षित शिक्षकों को ही संविदा पर नियुक्ति दे रखी है। जिससे यहां शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है।
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जनपद में 53 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी चल रही है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए न तो विभाग कुछ कर पा रहा है और न ही शासन। सत्र 2018-19 में शिक्षकों की कमी के कारण कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल नहीं बन सका वहीं स्थिति इस सत्र में भी दिखाई दे रही है। नवीन सत्र का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन शिक्षकों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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जहां सरकार एक तरफ सहायता प्राप्त व सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा व्यवस्था की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर नहीं कर पा रही है। जिसके चलते यहां संविदा शिक्षकों के ऊपर ही छात्रों का भविष्य निर्भर है। प्रबंधक और प्रधानाचार्यों ने मिली भगत कर कई कॉलेजों में अप्रशिक्षित शिक्षकों को ही संविदा पर नियुक्ति दे रखी है। जिससे यहां शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है।
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