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108 करोड़ रुपये के खर्च का कोई हिसाब नहीं दे रहीं पंचायतें
Updated Thu, 03 Aug 2017 11:01 PM IST
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panchayat
- फोटो : amar ujala
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एटा। वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 में 14वें वित्त और राज्य वित्त से मिले 108 करोड़ रुपये का हिसाब जिले की 576 ग्राम पंचायतों के पास नहीं हैं। हैरानी की बात है कि ग्राम पंचायतों ने दो साल खर्च का ऑडिट तक नहीं कराया है। अब पंचायती राज विभाग ने नोटिस जारी कर प्रधानों से खर्च का हिसाब मांगा है।
डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि जिले की 576 ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2015-16 में राज्य वित्त से 21 करोड़ और 14वें वित्त से 47 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य वित्त से 20 करोड़ और 14वें वित्त से 20 करोड़ रुपये शासन से आवंटित किया गया था। डीपीआरओ ने बताया कि ग्राम पंचायतों ने पूरा धन खर्च कर लिया, लेकिन खर्च का हिसाब नहीं दिया है। सरकारी धन में बंदरबांट होने के कारण विगत दो साल से ग्राम पंचायतों ने खर्च का ऑडिट तक नहीं कराया है। डीपीआरओ ने ग्राम प्रधानों और पंचायत सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर दो साल में हुए खर्च का हिसाब ऑडिट रिपोर्ट के साथ देने के निर्देश जारी किए हैं।
पंचायतों के खर्च में गोलमाल का शक
ग्राम पंचायतों द्वारा 108 करोड़ रुपये खर्च में गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। सपा सरकार में कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए बिना ग्राम पंचायत निधि खाते से रुपये निकालने के मामले प्रकाश आ चुके हैं। ऐसे में आशंका है कि पंचायतों ने खाते से पैसा निकाल कर खर्च कर लिया हो।
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ग्राम पंचायतों और पंचायत सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर पिछले साल में 14 वित्त और राज्य वित्त के पैसे का खर्च ऑडिट रिपोर्ट के साथ मांगा गया है। यदि समय रहते हिसाब नहीं दिया गया तो पंचायत सेक्रेटरी के साथ ग्राम प्रधान को पद से हाथ धोना पड़ सकता है।
धनंजय जायसवाल
डीपीआरओ एटा
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डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि जिले की 576 ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2015-16 में राज्य वित्त से 21 करोड़ और 14वें वित्त से 47 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य वित्त से 20 करोड़ और 14वें वित्त से 20 करोड़ रुपये शासन से आवंटित किया गया था। डीपीआरओ ने बताया कि ग्राम पंचायतों ने पूरा धन खर्च कर लिया, लेकिन खर्च का हिसाब नहीं दिया है। सरकारी धन में बंदरबांट होने के कारण विगत दो साल से ग्राम पंचायतों ने खर्च का ऑडिट तक नहीं कराया है। डीपीआरओ ने ग्राम प्रधानों और पंचायत सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर दो साल में हुए खर्च का हिसाब ऑडिट रिपोर्ट के साथ देने के निर्देश जारी किए हैं।
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पंचायतों के खर्च में गोलमाल का शक
ग्राम पंचायतों द्वारा 108 करोड़ रुपये खर्च में गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। सपा सरकार में कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए बिना ग्राम पंचायत निधि खाते से रुपये निकालने के मामले प्रकाश आ चुके हैं। ऐसे में आशंका है कि पंचायतों ने खाते से पैसा निकाल कर खर्च कर लिया हो।
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ग्राम पंचायतों और पंचायत सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर पिछले साल में 14 वित्त और राज्य वित्त के पैसे का खर्च ऑडिट रिपोर्ट के साथ मांगा गया है। यदि समय रहते हिसाब नहीं दिया गया तो पंचायत सेक्रेटरी के साथ ग्राम प्रधान को पद से हाथ धोना पड़ सकता है।
धनंजय जायसवाल
डीपीआरओ एटा