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Agra: बेबी ताज की हुई ऐसी दुर्दशा...कोठरियों में जमा हो गया सिल्ट, टूट गए दरवाजे; यहां अब बैठते हैं अराजक तत्व
Tue, 14 Oct 2025 07:49 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Oct 2025 07:49 AM IST
सार
यमुना में जलस्तर बढ़ने के बाद बेबी ताज की कोठियों में पानी घुस गया। जलस्तर कम हुआ तो इन कोठियों में सिल्ट जमा हो गया। तेज धारा के दबाव से लकड़ी के दरवाजे टूट गए हैं।
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एत्माउद्दाैला स्मारक में भरी गाद
विस्तार
बेबी ताज यानी एत्माउद्दौला स्मारक के भूमिगत तहखाने में मौजूद 20 कोठरियों में यमुना नदी की बाढ़ का पानी उतरने के बाद यहां एक फुट तक सिल्ट जमा हो गई है। तेज धारा के दबाव से लकड़ी के दरवाजे टूट गए हैं। इन कोठरियों में अराजक तत्वों के प्रवेश से स्मारक की सुरक्षा का भी खतरा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों ने माह के अंत तक मरम्मत कराने का दावा किया है।
यमुना नदी की बाढ़ का पानी एत्माउद्दौला मकबरे की कोठरियों में भर गया था। यहां यमुना किनारे बनी संगमरमर की मछली भी पानी में डूब गई थी, जो इस स्मारक के पीछे बने प्लेटफाॅर्म पर लगी हुई है। कोठरियों का तल इस मछली से ऊपर है। करीब 6 फीट तक बाढ़ का पानी एत्माउद्दौला की कोठरियों में भर गया था, जिसके उतरने के बाद यहां एक फुट तक सिल्ट जमा है।
ये भी पढ़ें - Agra: दिवाली से पहले अतिक्रमण के खिलाफ, फुटपाथ पर लगीं दुकानें हटवाईं; सामान किया जब्त
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए यह सिल्ट हटवाना बड़ी चुनौती है। बाढ़ और सिल्ट के कारण कोठरियों के संरक्षण पर भी असर पड़ा है। एएसआई के संरक्षण सहायक अंकित नामदेव के मुताबिक इसी माह कोठरियों से सिल्ट हटाने का काम शुरू किया जाएगा। जो नुकसान दरवाजों को हुआ है, उसकी मरम्मत भी कराई जाएगी।
1978 की बाढ़ में 8 फीट तक थी सिल्ट
इस बार यमुना की बाढ़ में सिल्ट कम जमा हुई है। बाहर प्लेटफाॅर्म पर 6 से 10 इंच और कोठरियों के अंदर एक फुट तक सिल्ट जमा हुई है जो पानी के उतरने के बाद नजर आ रही है। यह अब तक गीली है, जिससे इसके हटाने का काम शुरू नहीं किया जा सका है। इससे पहले वर्ष 1924 और 1978 की बाढ़ में स्मारक की कोठरियों में 8 फीट तक सिल्ट जमा हो गई थी। वर्ष 1978 और इसके बाद आई बाढ़ के कारण कोठरियों में जमा सिल्ट को हटाने का काम वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। तब वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंड ने स्मारक की सभी 20 कोठरियों से सिल्ट बाहर निकाली और संरक्षण कार्य कराया था। उसी दौरान यहां यमुना किनारे लकड़ी के दरवाजे लगाए गए थे।
पच्चीकारी का सबसे शानदार नमूना
मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा ग्यास बेग की स्मृति में वर्ष 1622 में संगमरमर से मकबरा बनवाया था, जिसे एत्माउद्दौला का नाम दिया गया। यह वर्ष 1628 में बनकर पूरा हुआ। पहली बार इसमें संगमरमर पर कीमती पत्थरों से की गई पच्चीकारी का उपयोग किया गया। सबसे महीन और शानदार पच्चीकारी का यह नमूना है। इसके बाद ही ताजमहल पर पच्चीकारी का उपयोग किया गया।यह 149 फीट वर्गाकार प्लेटफाॅर्म पर बना है जो जमीन से 3 फीट 4 इंच ऊपर है।
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यमुना नदी की बाढ़ का पानी एत्माउद्दौला मकबरे की कोठरियों में भर गया था। यहां यमुना किनारे बनी संगमरमर की मछली भी पानी में डूब गई थी, जो इस स्मारक के पीछे बने प्लेटफाॅर्म पर लगी हुई है। कोठरियों का तल इस मछली से ऊपर है। करीब 6 फीट तक बाढ़ का पानी एत्माउद्दौला की कोठरियों में भर गया था, जिसके उतरने के बाद यहां एक फुट तक सिल्ट जमा है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए यह सिल्ट हटवाना बड़ी चुनौती है। बाढ़ और सिल्ट के कारण कोठरियों के संरक्षण पर भी असर पड़ा है। एएसआई के संरक्षण सहायक अंकित नामदेव के मुताबिक इसी माह कोठरियों से सिल्ट हटाने का काम शुरू किया जाएगा। जो नुकसान दरवाजों को हुआ है, उसकी मरम्मत भी कराई जाएगी।
1978 की बाढ़ में 8 फीट तक थी सिल्ट
इस बार यमुना की बाढ़ में सिल्ट कम जमा हुई है। बाहर प्लेटफाॅर्म पर 6 से 10 इंच और कोठरियों के अंदर एक फुट तक सिल्ट जमा हुई है जो पानी के उतरने के बाद नजर आ रही है। यह अब तक गीली है, जिससे इसके हटाने का काम शुरू नहीं किया जा सका है। इससे पहले वर्ष 1924 और 1978 की बाढ़ में स्मारक की कोठरियों में 8 फीट तक सिल्ट जमा हो गई थी। वर्ष 1978 और इसके बाद आई बाढ़ के कारण कोठरियों में जमा सिल्ट को हटाने का काम वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। तब वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंड ने स्मारक की सभी 20 कोठरियों से सिल्ट बाहर निकाली और संरक्षण कार्य कराया था। उसी दौरान यहां यमुना किनारे लकड़ी के दरवाजे लगाए गए थे।
पच्चीकारी का सबसे शानदार नमूना
मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा ग्यास बेग की स्मृति में वर्ष 1622 में संगमरमर से मकबरा बनवाया था, जिसे एत्माउद्दौला का नाम दिया गया। यह वर्ष 1628 में बनकर पूरा हुआ। पहली बार इसमें संगमरमर पर कीमती पत्थरों से की गई पच्चीकारी का उपयोग किया गया। सबसे महीन और शानदार पच्चीकारी का यह नमूना है। इसके बाद ही ताजमहल पर पच्चीकारी का उपयोग किया गया।यह 149 फीट वर्गाकार प्लेटफाॅर्म पर बना है जो जमीन से 3 फीट 4 इंच ऊपर है।