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पशुपालन में फर्जीवाडा, तीन डेयरी खारिज
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कासगंज। पशु चिकित्सा योजनाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी पशु संख्या दर्शाकर तीन जालसाजों ने डेयरियों के नाम पर लाखों रुपये लोन ले लिया। डेढ़ साल तक चिकित्सा विभाग अनुदान के रूप में कर्ज की ब्याज अदा करता रहा, लेकिन फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पशु चिकित्सा विभाग ने तीनों डेयरियां खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही पशुपालन विभाग ने संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। जांच टीम बनाई जांच के साथ-साथ रिकवरी भी करेगी।
प्रदेश सरकार पशु योजनाओं के तहत पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। मिनी कामधेनु, माइक्रो कामधेनु एवं कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को लोन उपलब्ध कराती है। लोन का ब्याज सरकार अनुदान के रूप में अदा करती है। डेयरी पर आने वाली कुल लागत का 20 प्रतिशत अंश डेयरी स्वामी को वहन करना होता है। सरकार की योजना के तहत जिले में भी डेयरियां खोली गईं। जिले में कुल 43 डेयरी खोली गईं। आवेदकों ने करोड़ों रुपये का लोन लिया। 15 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बैंकों ने सरकारी योजना के तहत पशुपालकों को दिया। पशुपालन विभाग लिए गए ऋण के ब्याज का भुगतान अनुदान के रूप करता रहा। डेढ़ साल पहले पशु योजनाओं के तहत लिए कर्ज के ब्याज का भुगतान सरकार ने किया, लेकिन पशु योजनाओं में भी जालसाज खेल कर गए। शासन स्तर से जब पशु डेयरियों की जांच शुरू कराई गई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। पशु चिकित्सा विभाग ने जांच में पाया है कि जिले की 43 डेयरियों में से तीन डेयरी फर्जी सूचनाओं के आधार पर संचालित थी। इनमें न तो पशु थे और न ही संसाधन। पशु चिकित्सा विभाग ने जांच में जिनौल के राजकुमार, नगला झावर के वीरेंद्र एवं पटियाली के राजेंद्र कुमार की डेयरियां फर्जी मिली हैं। चिकित्सा विभाग ने इन डेयरियों को खारिज कर दिया है।
आंकड़े
- 43 डेयरी हैं जिले में
- 16 डेयरी माइक्रो कामधेनु योजना के तहत है जिले में
- 26 डेरी मिनी कामधेनु योजना की है संचालित
- 1 डेयरी कामधेनु योजना के तहत संचालित
यह है व्यवस्था
-1 करोड़ रुपए कामधेनु के लिए
-50 लाख रुपए माइक्रो कामधेनु के लिए
-20 लाख रुपए मिनी कामधेनु के लिए
- फर्जीवाड़ा कर जिले में तीन डेयरियां कागजों में संचालित थीं। जांच में डेयरियों पर पशु नहीं मिले। तीनों डेयरियां खारिज कर दी गई हैं। जांच टीम जांच में जुटी हुई है। ब्याज के भुगतान की रिकवरी की जाएगी। एके सगर, डिप्टी सीवीओ
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प्रदेश सरकार पशु योजनाओं के तहत पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। मिनी कामधेनु, माइक्रो कामधेनु एवं कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को लोन उपलब्ध कराती है। लोन का ब्याज सरकार अनुदान के रूप में अदा करती है। डेयरी पर आने वाली कुल लागत का 20 प्रतिशत अंश डेयरी स्वामी को वहन करना होता है। सरकार की योजना के तहत जिले में भी डेयरियां खोली गईं। जिले में कुल 43 डेयरी खोली गईं। आवेदकों ने करोड़ों रुपये का लोन लिया। 15 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बैंकों ने सरकारी योजना के तहत पशुपालकों को दिया। पशुपालन विभाग लिए गए ऋण के ब्याज का भुगतान अनुदान के रूप करता रहा। डेढ़ साल पहले पशु योजनाओं के तहत लिए कर्ज के ब्याज का भुगतान सरकार ने किया, लेकिन पशु योजनाओं में भी जालसाज खेल कर गए। शासन स्तर से जब पशु डेयरियों की जांच शुरू कराई गई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। पशु चिकित्सा विभाग ने जांच में पाया है कि जिले की 43 डेयरियों में से तीन डेयरी फर्जी सूचनाओं के आधार पर संचालित थी। इनमें न तो पशु थे और न ही संसाधन। पशु चिकित्सा विभाग ने जांच में जिनौल के राजकुमार, नगला झावर के वीरेंद्र एवं पटियाली के राजेंद्र कुमार की डेयरियां फर्जी मिली हैं। चिकित्सा विभाग ने इन डेयरियों को खारिज कर दिया है।
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आंकड़े
- 43 डेयरी हैं जिले में
- 16 डेयरी माइक्रो कामधेनु योजना के तहत है जिले में
- 26 डेरी मिनी कामधेनु योजना की है संचालित
- 1 डेयरी कामधेनु योजना के तहत संचालित
यह है व्यवस्था
-1 करोड़ रुपए कामधेनु के लिए
-50 लाख रुपए माइक्रो कामधेनु के लिए
-20 लाख रुपए मिनी कामधेनु के लिए
- फर्जीवाड़ा कर जिले में तीन डेयरियां कागजों में संचालित थीं। जांच में डेयरियों पर पशु नहीं मिले। तीनों डेयरियां खारिज कर दी गई हैं। जांच टीम जांच में जुटी हुई है। ब्याज के भुगतान की रिकवरी की जाएगी। एके सगर, डिप्टी सीवीओ
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