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कई परिवारों के लिए मसीहा बने अटल
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:53 PM IST
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कासगंज। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिले के कई बीमर लोगों के लिए मसीहा बन गए। बीमारी की बात जानकर स्वयं चिकित्सकों से संपर्क कर उनके इलाज में मदद की। अटल की अचानक हुई मौत से ऐसे परिवार काफी दुखी हैं।
शहर के कपड़ा कारोबारी प्रमोद काकांडी कहते हैं कि उनकी बेटी रचना को वर्ष 2000 में ब्लड कैंसर हो गया। वे अपनी बेटी के इलाज के लिए काफी परेशान थे। जब उन्होंने वाजपेयी से संपर्क साधा तो उन्होंने तुरंत बेटी के इलाज के लिए व्यवस्था की। एम्स के चिकित्सक डा. चौधरी को स्वयं फोन किया। इसके बाद उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।
नगर पालिका के अध्यक्ष रहे भाजपा नेता जगदीश नरायन मूना के पुत्र राजू मूना कहते हैं कि वर्ष 1968 में उनकी मां शकुंतला देवी की तबियत काफी खराब हो गई। उनके पिता इलाज के लिए मां को एम्स ले कर गए। वह भी उनके साथ में थे। उनके पिता इलाज के लिए व्यवस्था न हो पाने से काफी परेशान थे। इसी बीच अटल मसीहा की तरह अस्पताल पर पहुंच गए। उनके पिता को वे चेहरे से अच्छी तरह से पहचानते थे। पिता को देखकर पूछताछ की। जब उनको मां की बीमारी के बारे में पता चला तो अस्पताल के चिकित्सक से मिलकर मां के इलाज की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 में उनके पिता को हार्ट अटैक हुआ था। उनके इलाज के समय भी अटल बिहारी वाजपेयी ने मदद की। चिकित्सक हबीबुल्ला को फोन करके इलाज की व्यवस्था कराई। इससे उनके पिता पूरी तरह से स्वस्थ हो गए।
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फोटो सहित
अटल की सादगी और हंसमुख स्वभाव के कायल हैं लोग
उनसे जुड़े परिवारों ने सुनाए अटल के किस्से
हाथ पकड़कर अपने घर अटल जी को ले गए प्रमोद
अमर उजाला ब्यूरो
कासगंज।
बेदाग व्यक्तित्व के धनी हर किसी के चहेते भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से यूं तो पूरा देश ही शोक में डूबा हैै, लेकिन वे लोग और वे परिवार अटल के जाने के दर्द से बेहद आहत हैं जिन परिवारों से और लोगों से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव था।
जिले में अटल जी का आगमन कासगंज, सोरों, पटियाली में कई बार हुआ। उनका सर्वाधिक कासगंज और सोरों में आना रहा। कासगंज और एटा पहले एक ही जनपद था। जिनहरा और मिरहची के लोग कासगंज से जुड़े उनकी रिश्तेदारी कासगंज में थीं जिससे सब अटल जी के आगमन के मौके पर एक दूसरे के यहां एकत्रित होते थे और उनसे मिलते थे। जिनहरा में रामभरोसे लाल झंवर के यहां अटल जी का आगमन हुआ। इस दौरान वे चुनावी दौरे पर निकले तो उनका तांगा दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जब भी कासगंज की बात आती तो वे इस संस्मरण को जरूर दोहराते। बाद में रामभरोसे लाल की बेटी की शादी शहर के प्रमोद कांकाणी से हुई। शादी के बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी का आगमन शहर में हुआ तो गंगेश कांकाणी के पति प्रमोद कांकाणी उनका हाथ पकड़कर अपने घर ले गए तो सहज भाव से अटल उनके घर पहुंच गए। लक्ष्मीगंज की जनसभा में उनकी बेटी कल्पना ने अटल जी का तिलक किया। गंगेश कांकाणी अटल के संस्मरण सुनाते हुए कहतीं हैं कि जितनी उनके अंदर सरलता और सहजता थी वे उतने ही हंसमुख थे। शहर के ही अनिल अग्रवाल खादिम जब मुगलसराय में थे तो कासगंज का नाम सुनकर अटल उनके परिवार में पहुंचें और परिवार के साथ 8 घंटे बिताए। उस समय उनके साथ मौजूद (वर्तमान) रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी थे जो अनिल अग्रवाल खादिम के अच्छे मित्र हैं। अनिल अग्रवाल ने भी उनके संस्मरण को याद करते हुए बताया कि अटल जी ने उनके घर भोजन करने के बाद 4 घंटे विश्राम किया और फिर वे रवाना हो गए। अनिल अग्रवाल के परिवार के लोगों में विभा, मिनी, सुम्मी आदि आज भी अटल जी को याद करके बेहद भावुक नजर आए।
फोटो प्रेषित है
मुझे नहीं सुरेशानंद को दो रोटी
एटा। नौ अप्रैल 1996 को जिले में आए अटल जी ने दोपहर का भोजन स्थानीय पीडब्लूडी निरीक्षण भवन में लिया था। भोजन व्यवस्था में लगाए गए तत्कालीन युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष विक्रांत माधौरिया के अनुसार भोजन में मक्का की रोटी व बैंगन का भुर्ता बनवाया गया था। डायनिंग टेबल पर अटल जी के साथ डॉ मुरली मनोहर जोशी एवं तत्कालीन सांसद सुरेशानंद भी थे। एक रोटी खाने के बाद अटल जी ने स्वंय तो दूसरी रोटी लेने से मना कर दिया। लेकिन माधौरिया को सुरेशानंद को एक रोटी और परोसने को कहा। बताते चलें कि पार्टी से नाराज चल रहे सुरेशानंद से पार्टी के शीर्ष नेता बात कर रहे थे।
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शहर के कपड़ा कारोबारी प्रमोद काकांडी कहते हैं कि उनकी बेटी रचना को वर्ष 2000 में ब्लड कैंसर हो गया। वे अपनी बेटी के इलाज के लिए काफी परेशान थे। जब उन्होंने वाजपेयी से संपर्क साधा तो उन्होंने तुरंत बेटी के इलाज के लिए व्यवस्था की। एम्स के चिकित्सक डा. चौधरी को स्वयं फोन किया। इसके बाद उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।
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नगर पालिका के अध्यक्ष रहे भाजपा नेता जगदीश नरायन मूना के पुत्र राजू मूना कहते हैं कि वर्ष 1968 में उनकी मां शकुंतला देवी की तबियत काफी खराब हो गई। उनके पिता इलाज के लिए मां को एम्स ले कर गए। वह भी उनके साथ में थे। उनके पिता इलाज के लिए व्यवस्था न हो पाने से काफी परेशान थे। इसी बीच अटल मसीहा की तरह अस्पताल पर पहुंच गए। उनके पिता को वे चेहरे से अच्छी तरह से पहचानते थे। पिता को देखकर पूछताछ की। जब उनको मां की बीमारी के बारे में पता चला तो अस्पताल के चिकित्सक से मिलकर मां के इलाज की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 में उनके पिता को हार्ट अटैक हुआ था। उनके इलाज के समय भी अटल बिहारी वाजपेयी ने मदद की। चिकित्सक हबीबुल्ला को फोन करके इलाज की व्यवस्था कराई। इससे उनके पिता पूरी तरह से स्वस्थ हो गए।
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अटल की सादगी और हंसमुख स्वभाव के कायल हैं लोग
उनसे जुड़े परिवारों ने सुनाए अटल के किस्से
हाथ पकड़कर अपने घर अटल जी को ले गए प्रमोद
अमर उजाला ब्यूरो
कासगंज।
बेदाग व्यक्तित्व के धनी हर किसी के चहेते भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से यूं तो पूरा देश ही शोक में डूबा हैै, लेकिन वे लोग और वे परिवार अटल के जाने के दर्द से बेहद आहत हैं जिन परिवारों से और लोगों से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव था।
जिले में अटल जी का आगमन कासगंज, सोरों, पटियाली में कई बार हुआ। उनका सर्वाधिक कासगंज और सोरों में आना रहा। कासगंज और एटा पहले एक ही जनपद था। जिनहरा और मिरहची के लोग कासगंज से जुड़े उनकी रिश्तेदारी कासगंज में थीं जिससे सब अटल जी के आगमन के मौके पर एक दूसरे के यहां एकत्रित होते थे और उनसे मिलते थे। जिनहरा में रामभरोसे लाल झंवर के यहां अटल जी का आगमन हुआ। इस दौरान वे चुनावी दौरे पर निकले तो उनका तांगा दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जब भी कासगंज की बात आती तो वे इस संस्मरण को जरूर दोहराते। बाद में रामभरोसे लाल की बेटी की शादी शहर के प्रमोद कांकाणी से हुई। शादी के बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी का आगमन शहर में हुआ तो गंगेश कांकाणी के पति प्रमोद कांकाणी उनका हाथ पकड़कर अपने घर ले गए तो सहज भाव से अटल उनके घर पहुंच गए। लक्ष्मीगंज की जनसभा में उनकी बेटी कल्पना ने अटल जी का तिलक किया। गंगेश कांकाणी अटल के संस्मरण सुनाते हुए कहतीं हैं कि जितनी उनके अंदर सरलता और सहजता थी वे उतने ही हंसमुख थे। शहर के ही अनिल अग्रवाल खादिम जब मुगलसराय में थे तो कासगंज का नाम सुनकर अटल उनके परिवार में पहुंचें और परिवार के साथ 8 घंटे बिताए। उस समय उनके साथ मौजूद (वर्तमान) रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी थे जो अनिल अग्रवाल खादिम के अच्छे मित्र हैं। अनिल अग्रवाल ने भी उनके संस्मरण को याद करते हुए बताया कि अटल जी ने उनके घर भोजन करने के बाद 4 घंटे विश्राम किया और फिर वे रवाना हो गए। अनिल अग्रवाल के परिवार के लोगों में विभा, मिनी, सुम्मी आदि आज भी अटल जी को याद करके बेहद भावुक नजर आए।
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मुझे नहीं सुरेशानंद को दो रोटी
एटा। नौ अप्रैल 1996 को जिले में आए अटल जी ने दोपहर का भोजन स्थानीय पीडब्लूडी निरीक्षण भवन में लिया था। भोजन व्यवस्था में लगाए गए तत्कालीन युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष विक्रांत माधौरिया के अनुसार भोजन में मक्का की रोटी व बैंगन का भुर्ता बनवाया गया था। डायनिंग टेबल पर अटल जी के साथ डॉ मुरली मनोहर जोशी एवं तत्कालीन सांसद सुरेशानंद भी थे। एक रोटी खाने के बाद अटल जी ने स्वंय तो दूसरी रोटी लेने से मना कर दिया। लेकिन माधौरिया को सुरेशानंद को एक रोटी और परोसने को कहा। बताते चलें कि पार्टी से नाराज चल रहे सुरेशानंद से पार्टी के शीर्ष नेता बात कर रहे थे।