{"_id":"5b2163d84f1c1bca228b55c3","slug":"181528914904-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न स्पीड पर लगाम, न नियम तोड़ते वाहन चालकों पर अंकुश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न स्पीड पर लगाम, न नियम तोड़ते वाहन चालकों पर अंकुश
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। मैनपुरी में हुआ हादसा एक बड़ा सबक है। सुहाग नगरी में भी टूंडला से लेकर कठफोरी तक हाईवे पर मौत के कट हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर भी हादसों के लिए प्वांइट हैं। जसराना में भी कई रास्ते ऐसे हैं जहां आए दिन हादसे होते हैं। कहीं संकेतक नहीं हैं तो कहीं यातायात के नियमों की अनदेखी है। न स्पीड पर लगाम है और न ही नियम तोड़ते वाहन चालकों पर अंकुुश है।
फिरोजाबाद-टूंडला के बीच एनएचटू पर राजा का ताल चौराहा पर स्पीड ब्रेकर टूट गए गए। कोई संकेतांक तक नहीं लगाया गया। छह वर्ष पूर्व इसी चौराहे पर ट्रैक्टर में टक्कर लगने से सात श्रमिकों की मौत हुई थी। उसायनी चौराहा दूसरा हादसे का ही प्वाइंट बन गया। यहां बाइक सवार कभी ट्रक की चपेट में आ जाने के कारण हादसे होते हैं। सेंटजोंस चौराहे पर यूं तो ब्रेकर बनाने के साथ ही संकेतक भी लगे हैं। लेकिन हादसे फिर भी नहीं रुकते। क्योंकि यहां पर लालऊ की ओर से आने वाले वाहनों के साथ,कारखानों के श्रमिक की भीड़ रहने के कारण अधिकांश हादसे होते हैं। हादसों का कारण सड़क किनारे वाहनों का खड़ा रहना भी है। मार्ग किनारे लोड अनलोड ट्रक खड़े रहते हैं।
नगला भाऊ चौराहा, रहना नाला तिराहे पर अक्सर ही हादसे होते रहते हैं। नगला भाऊ चौराहे पर श्रमिकों की भीड़ रहती है। इंडस्ट्रियल क्षेत्र से काफी तेज रफ्तार से हाइवे की ओर आने पर हादसे होते हैं। रेहना नाले पर नाला रोड के वाहनों के मोडने के कारण हादसे होते है। चौराहे पर कोई संकेतक नहीं लगे है। कोटला रोड के बंबा चौराहा, जलेसर रोड के ककरऊ चौराहे पर अक्सर हादसे होते हैं। इन चौराहों पर वाहनों की गति धीमी भी करने का कोई संकेतांक नहीं लगे हैं।नगर निगम के अफसर व पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
जसराना के खड़ीत नहर पुल के पास मोड़ होने के कारण यहां अधिकांश हादसे होते हैं। बाइक सवार हो या फिर कार सवार यहां वाहनों के आपस में टकराने के कारण कई मौतें हो चुकी हैं। इसके साथ ही पटीकरा नहर पुल के समीप भी मोड़ होने के कारण हादसे को लोग शिकार हो जाते हैं। विभाग ने कोई संकेतांक तक नहीं लगाए हैं।नगला शादी मोड़ के साथ मुस्तफाबाद नहर पुल के समीप अक्सर हादसे होते हैं। सिरसागंज के नगला राधे मोड़ शिकोहाबाद की ओर से आने वालों के लिए शहर में आने का मुख्य रास्ता है। चौराहे पर वाहनों की गति धीमी एवं सिरसागंज कसबा में प्रवेश का मुख्य मार्ग कुछ भी संकेतांक नहीं लगे हैं।
सिरसागंज के ग्रामीण क्षेत्र के आने के साथ मैनपुरी की ओर से आने एवं जाने का क्रम अधिकांश रहता है। चौराहे पर हमेशा ही हादसे होते रहते हैं। एनएचटू के द्वारा ओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन संकेतांक लगाने आवश्यक हैं। यहां हर माह हादसे होते हैं।
शिकोहाबाद क्षेत्र में हादसे एनएच-टू पर मैनपुरी चौराहा तथा सुभाष तिराहे पर अक्सर हादसे होते हैं। इन चौराहों के साथ -साथ ही बटेश्वर रोड पर डाहिनी बंबा चौराहे पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। संत जनूबाबा पुलिस चौकी के पास मां अंजनीस्कूल के साथ ही नहर पुल बालाजी मंदिर के पास में अक्सर हादसे होते हैं।
- सात जनवरी 2018 को सोथरा चौराहे पर सड़क के किनारे ट्रांसपोर्ट से माल से लगा ट्रक बैगनआर एवं टैंपों पर गिरने से 11 लोगों की हुई थी मौत।
-23 मई 2018 को मुस्तफाबाद नहर पुल के समीप दो बाइकों के टकराने से चार लोगों की हुई मौत।
-22 अप्रैल को डाहिनी बंबा चौराहे पर हुए हादसे में बुआ एवं भतीजे की मौत।
-2016 में बंबा बाईपास पर ट्रक बारात पर चढने के कारण बैंडवाजा कर्मियों सहित सात लोगों की हुई थी मौत।
-2012 में जाटवपुरी चौराहा पर बेकाबू ट्रक ने छह श्रमिकों की रौंद दिया था। इसके कारण घंटों जाम लगा रहा था।
विज्ञापन
फिरोजाबाद-टूंडला के बीच एनएचटू पर राजा का ताल चौराहा पर स्पीड ब्रेकर टूट गए गए। कोई संकेतांक तक नहीं लगाया गया। छह वर्ष पूर्व इसी चौराहे पर ट्रैक्टर में टक्कर लगने से सात श्रमिकों की मौत हुई थी। उसायनी चौराहा दूसरा हादसे का ही प्वाइंट बन गया। यहां बाइक सवार कभी ट्रक की चपेट में आ जाने के कारण हादसे होते हैं। सेंटजोंस चौराहे पर यूं तो ब्रेकर बनाने के साथ ही संकेतक भी लगे हैं। लेकिन हादसे फिर भी नहीं रुकते। क्योंकि यहां पर लालऊ की ओर से आने वाले वाहनों के साथ,कारखानों के श्रमिक की भीड़ रहने के कारण अधिकांश हादसे होते हैं। हादसों का कारण सड़क किनारे वाहनों का खड़ा रहना भी है। मार्ग किनारे लोड अनलोड ट्रक खड़े रहते हैं।
विज्ञापन
नगला भाऊ चौराहा, रहना नाला तिराहे पर अक्सर ही हादसे होते रहते हैं। नगला भाऊ चौराहे पर श्रमिकों की भीड़ रहती है। इंडस्ट्रियल क्षेत्र से काफी तेज रफ्तार से हाइवे की ओर आने पर हादसे होते हैं। रेहना नाले पर नाला रोड के वाहनों के मोडने के कारण हादसे होते है। चौराहे पर कोई संकेतक नहीं लगे है। कोटला रोड के बंबा चौराहा, जलेसर रोड के ककरऊ चौराहे पर अक्सर हादसे होते हैं। इन चौराहों पर वाहनों की गति धीमी भी करने का कोई संकेतांक नहीं लगे हैं।नगर निगम के अफसर व पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
जसराना के खड़ीत नहर पुल के पास मोड़ होने के कारण यहां अधिकांश हादसे होते हैं। बाइक सवार हो या फिर कार सवार यहां वाहनों के आपस में टकराने के कारण कई मौतें हो चुकी हैं। इसके साथ ही पटीकरा नहर पुल के समीप भी मोड़ होने के कारण हादसे को लोग शिकार हो जाते हैं। विभाग ने कोई संकेतांक तक नहीं लगाए हैं।नगला शादी मोड़ के साथ मुस्तफाबाद नहर पुल के समीप अक्सर हादसे होते हैं। सिरसागंज के नगला राधे मोड़ शिकोहाबाद की ओर से आने वालों के लिए शहर में आने का मुख्य रास्ता है। चौराहे पर वाहनों की गति धीमी एवं सिरसागंज कसबा में प्रवेश का मुख्य मार्ग कुछ भी संकेतांक नहीं लगे हैं।
सिरसागंज के ग्रामीण क्षेत्र के आने के साथ मैनपुरी की ओर से आने एवं जाने का क्रम अधिकांश रहता है। चौराहे पर हमेशा ही हादसे होते रहते हैं। एनएचटू के द्वारा ओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन संकेतांक लगाने आवश्यक हैं। यहां हर माह हादसे होते हैं।
शिकोहाबाद क्षेत्र में हादसे एनएच-टू पर मैनपुरी चौराहा तथा सुभाष तिराहे पर अक्सर हादसे होते हैं। इन चौराहों के साथ -साथ ही बटेश्वर रोड पर डाहिनी बंबा चौराहे पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। संत जनूबाबा पुलिस चौकी के पास मां अंजनीस्कूल के साथ ही नहर पुल बालाजी मंदिर के पास में अक्सर हादसे होते हैं।
- सात जनवरी 2018 को सोथरा चौराहे पर सड़क के किनारे ट्रांसपोर्ट से माल से लगा ट्रक बैगनआर एवं टैंपों पर गिरने से 11 लोगों की हुई थी मौत।
-23 मई 2018 को मुस्तफाबाद नहर पुल के समीप दो बाइकों के टकराने से चार लोगों की हुई मौत।
-22 अप्रैल को डाहिनी बंबा चौराहे पर हुए हादसे में बुआ एवं भतीजे की मौत।
-2016 में बंबा बाईपास पर ट्रक बारात पर चढने के कारण बैंडवाजा कर्मियों सहित सात लोगों की हुई थी मौत।
-2012 में जाटवपुरी चौराहा पर बेकाबू ट्रक ने छह श्रमिकों की रौंद दिया था। इसके कारण घंटों जाम लगा रहा था।