{"_id":"5ae0b58e4f1c1bc03d8b4fc4","slug":"181524675982-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मलेरिया दिवस को भूला स्वास्थ्य विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मलेरिया दिवस को भूला स्वास्थ्य विभाग
Updated Wed, 25 Apr 2018 11:08 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक चित्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज।
जिले में मलेरिया के लिए काफी खतरा रहता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर बीमारी को गंभीरता से नहीं लेता। लोगों को जागरूक करने के लिए मलेरिया दिवस निर्धारित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मलेरिया दिवस को ही भूल गया।
जिले में अप्रैल माह से ही मलेरिया की बीमारी पैर पसारना शुरू कर देती है। इस समय इक्का दुक्का मरीज मलेरिया पीड़ित सामने आने लगे हैं। करीब छह माह तक मलेरिया, डेंगू का प्रकोप रहता है। मलेरिया की फैल्सी फेरम, डेंगू बीमारी सबसे अधिक खतरनाक होती है। मलेरिया का फैलाव रोकने के लिए 25 अप्रैल को मलेरिया दिवस निर्धारित किया गया है ताकि स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक कर सके, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को जागरूकता के लिए कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया।
ये बरतें सावधानी
बुखार आने पर स्वयं बुखार उतारने या फिर दर्द निवारक दवा न लें, जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श से ही दवा लें। पेन किलर लेने पर डेंगू की स्थिति में रक्त स्राव का खतरा रहता है।
विज्ञापन
मलेरिया, डेंगू आदि बुखार में एंटीबायोटिक दवा की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए बुखार आने पर स्वयं इस तरह की दवा न लें।
बुखार उतारने के लिए शरीर को चादर से ढकना ठीक नहीं रहता, मरीज को ताजी व खुली हवा में रखें। मरीज को नहाने से न रोके।
नार्मल या हल्के गुनगुने पानी से नहला दें। यदि मरीज नहाने की स्थिति में नहीं है तो टावल गीला करके शरीर को साफ कर दें ।
बुखार आने पर आराम करें। ठीक होने के तुरंत बाद ही काम पर न जाएं। डेंगू में कम से कम 15 दिन में शरीर रिकवर होता है। चिकिनगुनिया का दर्द जाने में एक माह तक का समय लग जाता है। पर्याप्त आराम न करने पर विपरीत असर पड़ सकता है।
जिले में अभी मलेरिया का प्रकोप नहीं है। विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए जल्द ही कार्यक्रम का आयोजन करेगा। मलेरिया दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। राज कुमार सारस्वत जिला मलेरिया अधिकारी
विज्ञापन
जिले में मलेरिया के लिए काफी खतरा रहता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर बीमारी को गंभीरता से नहीं लेता। लोगों को जागरूक करने के लिए मलेरिया दिवस निर्धारित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मलेरिया दिवस को ही भूल गया।
जिले में अप्रैल माह से ही मलेरिया की बीमारी पैर पसारना शुरू कर देती है। इस समय इक्का दुक्का मरीज मलेरिया पीड़ित सामने आने लगे हैं। करीब छह माह तक मलेरिया, डेंगू का प्रकोप रहता है। मलेरिया की फैल्सी फेरम, डेंगू बीमारी सबसे अधिक खतरनाक होती है। मलेरिया का फैलाव रोकने के लिए 25 अप्रैल को मलेरिया दिवस निर्धारित किया गया है ताकि स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक कर सके, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को जागरूकता के लिए कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया।
विज्ञापन
ये बरतें सावधानी
बुखार आने पर स्वयं बुखार उतारने या फिर दर्द निवारक दवा न लें, जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श से ही दवा लें। पेन किलर लेने पर डेंगू की स्थिति में रक्त स्राव का खतरा रहता है।
विज्ञापन
मलेरिया, डेंगू आदि बुखार में एंटीबायोटिक दवा की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए बुखार आने पर स्वयं इस तरह की दवा न लें।
बुखार उतारने के लिए शरीर को चादर से ढकना ठीक नहीं रहता, मरीज को ताजी व खुली हवा में रखें। मरीज को नहाने से न रोके।
नार्मल या हल्के गुनगुने पानी से नहला दें। यदि मरीज नहाने की स्थिति में नहीं है तो टावल गीला करके शरीर को साफ कर दें ।
बुखार आने पर आराम करें। ठीक होने के तुरंत बाद ही काम पर न जाएं। डेंगू में कम से कम 15 दिन में शरीर रिकवर होता है। चिकिनगुनिया का दर्द जाने में एक माह तक का समय लग जाता है। पर्याप्त आराम न करने पर विपरीत असर पड़ सकता है।
जिले में अभी मलेरिया का प्रकोप नहीं है। विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए जल्द ही कार्यक्रम का आयोजन करेगा। मलेरिया दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। राज कुमार सारस्वत जिला मलेरिया अधिकारी