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चिरागों से रोशन हुई दरगाह
Updated Fri, 06 Oct 2017 11:00 PM IST
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दरगाह में चिराग रोशन करती महिलाएं
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। ईदगाह स्थित सैय्यद कलीममुल्ला साहब की दरगाह पर शुक्रवार को रोशनी हुई। यहां हर साल मोहर्रम की 15वीं तारीख को चिराग चढ़ाए और उठाए जाते हैं। शुक्रवार को अकीदतमंदों ने मुरादें पूरी होने पर बड़ी संख्या में सोने और चांदी के चिराग मजार पर चढ़ाए। वहीं मुराद मांगकर चिराग उठाए।
खानकाहे रशीदिया के सज्जादा नशीन अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बबलू मियां ने बताया कि मोहर्रम की हर 15वीं तारीख को दरगाह पर चिराग रोशन किए जाते हैं। इसकी मान्यता है कि जो शख्स अपनी मुराद पूरी होने के लिए यहां से चिराग उठाकर ले जाता है, और वह चिराग घर तक जलता हुआ जाएगा तो उस बंदे की मुराद यकीनन पूरी होगी।
दरगाह से तेल से भरे चिराग अकीदतमंद ले जाते हैं और मुराद पूरी होने पर वापस सोने और चांदी के चिराग चढ़ाते हैं।
इस दौरान उलेमाओं ने दरगाह पर तकरीर करते हुए कहा कि पैगंबरे इस्लाम ने इरशाद फरमाया कि ‘मेरे रहम दिल उम्मतियों ‘वलियों’ के पास जाओ, हाजत तलब करो, खुदा का फजल मांगो, उनसे भलाई चाहो रोजी और रिज्क की। उनके दामन में आराम से रहोगे। उनकी पनाह में चैन पाओगे कि उनमे मेरी रहमत है।
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इस दौरान बड़े चौराहे से लेकर ईदगाह तक मुसलिम समाज के लोगों ने छबील आदि लगाकर लोगों को शरबत पिलाया। महिला और पुरुषों ने सैय्यद कलीममुल्ला साहब की दरगाह पर चादरपोशी भी की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुसलिम समाज के अलावा हिंदू लोगों ने भी मजार पर चादर चढ़ाई और दीपक जलाए।
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खानकाहे रशीदिया के सज्जादा नशीन अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बबलू मियां ने बताया कि मोहर्रम की हर 15वीं तारीख को दरगाह पर चिराग रोशन किए जाते हैं। इसकी मान्यता है कि जो शख्स अपनी मुराद पूरी होने के लिए यहां से चिराग उठाकर ले जाता है, और वह चिराग घर तक जलता हुआ जाएगा तो उस बंदे की मुराद यकीनन पूरी होगी।
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दरगाह से तेल से भरे चिराग अकीदतमंद ले जाते हैं और मुराद पूरी होने पर वापस सोने और चांदी के चिराग चढ़ाते हैं।
इस दौरान उलेमाओं ने दरगाह पर तकरीर करते हुए कहा कि पैगंबरे इस्लाम ने इरशाद फरमाया कि ‘मेरे रहम दिल उम्मतियों ‘वलियों’ के पास जाओ, हाजत तलब करो, खुदा का फजल मांगो, उनसे भलाई चाहो रोजी और रिज्क की। उनके दामन में आराम से रहोगे। उनकी पनाह में चैन पाओगे कि उनमे मेरी रहमत है।
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इस दौरान बड़े चौराहे से लेकर ईदगाह तक मुसलिम समाज के लोगों ने छबील आदि लगाकर लोगों को शरबत पिलाया। महिला और पुरुषों ने सैय्यद कलीममुल्ला साहब की दरगाह पर चादरपोशी भी की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुसलिम समाज के अलावा हिंदू लोगों ने भी मजार पर चादर चढ़ाई और दीपक जलाए।