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‘रेरा’ ने छुड़ा दिया बिल्डरों के पसीना
Updated Sat, 16 Sep 2017 08:06 PM IST
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- फोटो : demo
मथुरा। रेरा (रियल इस्टेट रेगुलेशन एक्ट) के दबाव से बिल्डरों का पसीना छूट गया है। एक्ट की शर्तों को लेकर प्रॉपर्टी डीलर परेशान हैं। अभी तक जनपद के मात्र 12 प्रॉपर्टी डीलरों ने ही रजिस्ट्रेशन कराए हैं।
प्रॉपर्टी डीलरों की धोखाधड़ी पर शिकंजा कसने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किया गया रेरा अब बिल्डरों पर भारी पड़ने लगा। रेरा में प्रावधान है कि बिल्डर अपने प्रोजेक्ट की सारी शर्तों को ऑनलाइन करेगा। रजिस्ट्री से लेकर एग्रीमेंट तक सब कुछ ऑनलाइन होगा यहां तक कि खरीददार के भुगतान तक की जानकारी ऑनलाइन होगी। रेरा की इन शर्तों को लेकर ऐसे प्रॉपर्टी डीलर परेशान हैं जो कि ग्राहक के साथ धोखाधड़ी करते थे। जनपद में अभी तक मात्र 12 बिल्डर ही अपना रजिस्ट्रेशन करा सके हैं। हालांकि रेरा में किसने रजिस्टेशन कराया है किसने नहीं कराया है इसकी जानकारी विकास प्राधिकरण को नहीं है । विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि इसकी जानकारी उनके पास भी होनी चाहिए ताकि वे जान सकें कि कौन सा बिल्डर रजिस्टर्ड है और कौन सा बिल्डर गैर रजिस्टर्ड है। ज्ञात इस एक्ट में रजिस्ट्रेशन के चलते कई बिल्डरों ने अपनी नई योजनाओं में तब्दीली की है। कई बिल्डरों के काम भी रुके पड़े हैं अब वे इस एक्ट से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
बिल्डर नहीं कर सकेंगे मानमानी
मथुरा। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष यशु रुस्तगी ने कहा कि इस कानून के लागू होने से बिल्डरों की मनमानी खत्म हो रही है। लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकेंगे। अब प्राधिकरण भी रजिस्टर्ड बिल्डरों की सूची मांगेगा।
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प्रॉपर्टी डीलरों की धोखाधड़ी पर शिकंजा कसने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किया गया रेरा अब बिल्डरों पर भारी पड़ने लगा। रेरा में प्रावधान है कि बिल्डर अपने प्रोजेक्ट की सारी शर्तों को ऑनलाइन करेगा। रजिस्ट्री से लेकर एग्रीमेंट तक सब कुछ ऑनलाइन होगा यहां तक कि खरीददार के भुगतान तक की जानकारी ऑनलाइन होगी। रेरा की इन शर्तों को लेकर ऐसे प्रॉपर्टी डीलर परेशान हैं जो कि ग्राहक के साथ धोखाधड़ी करते थे। जनपद में अभी तक मात्र 12 बिल्डर ही अपना रजिस्ट्रेशन करा सके हैं। हालांकि रेरा में किसने रजिस्टेशन कराया है किसने नहीं कराया है इसकी जानकारी विकास प्राधिकरण को नहीं है । विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि इसकी जानकारी उनके पास भी होनी चाहिए ताकि वे जान सकें कि कौन सा बिल्डर रजिस्टर्ड है और कौन सा बिल्डर गैर रजिस्टर्ड है। ज्ञात इस एक्ट में रजिस्ट्रेशन के चलते कई बिल्डरों ने अपनी नई योजनाओं में तब्दीली की है। कई बिल्डरों के काम भी रुके पड़े हैं अब वे इस एक्ट से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
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बिल्डर नहीं कर सकेंगे मानमानी
मथुरा। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष यशु रुस्तगी ने कहा कि इस कानून के लागू होने से बिल्डरों की मनमानी खत्म हो रही है। लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकेंगे। अब प्राधिकरण भी रजिस्टर्ड बिल्डरों की सूची मांगेगा।
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