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आजादी के टूटे-फूटे सपने लेकर बैठा हूं ...
Updated Mon, 26 Nov 2018 10:27 PM IST
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आजादी के टूटे-फूटे सपने लेकर बैठा हूं ...
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। ओल्ड स्डूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा श्रीगणेश इंटर कॉलेज की 101 वर्षगांठ पूर्ण होने पर वार्षिकोत्सव समारोह के दौरान आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देर रात्रि तक काव्य की रसधारा बही।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ सिविल जज सीनियर डिवीजन हरेंद्र कुमार ओझा, पुलिस अधीक्षक एके शुक्ल, मुख्य विकास अधिकारी श्रीनिवास मिश्र, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सदस्य डा. अशोक अग्रवाल, डीआईओएस आरएस सिंह राजपूत, प्रबंधक विकास तायल, जिला विज्ञान क्लब समन्वय जयंत गुप्ता ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। तुषा शर्मा ने सरस्वती वंदना की।
कवि हरिओम पवार ने कविता पाठ किया कि ‘आजादी के स्वर्ण जयंती वाले गीत सुनाऊं मैं, लेकिन सरगम वाला वातावरण कहां से लाऊं मैं, मेघ मल्हारों वाले अंत:करण कहा से लाऊं मैं।’ तुषा शर्मा ने ‘ये प्यार तेरा मुझ पर जादू कर देगा, जो कमी है जीवन में उनको भर देगा।’ जमुना प्रसाद उपाध्याय ने ‘नदी के घाट पर अगर सियासी लोग बस जाएं, तो प्यासे होठ बूंद-बूंद पानी को तरस जाएं।’ सुमनेश सुमन ने ‘संवारेगी निखारेगी, हंसाएगी रुलाएगी, कभी खुशियां लुटाएगी, कभी खुद रूठ जाएगी। सुनील जोगी ने ‘वो कविता है मानस बनकर, घर-घर गायी जाती है।’ प्रवीण शुक्ल ने ‘जहां भी कहोगे वहां बाढ़ को भेज दूंगा।’ समरस मुरसानी व दीपक वार्ष्णेय की कविता भी लोगों ने खूब पसंद की। कालेज के अध्यक्ष सुशील गोयल, जयसिंह वर्मा, विनीत तायल, विवेक तायल, डा. संदीप गुप्ता, डा. सुरेंद्र कुमार गुप्ता. शकुंतला गुप्ता, ललित गुप्ता, श्यामसुंदर पाठक, प्रधानाचार्य एचपीएन दुबे, अजय तिवारी, अमित अग्रवाल, तरुण शर्मा, सुभाष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, राकेश माहेश्वरी, अंकित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ सिविल जज सीनियर डिवीजन हरेंद्र कुमार ओझा, पुलिस अधीक्षक एके शुक्ल, मुख्य विकास अधिकारी श्रीनिवास मिश्र, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सदस्य डा. अशोक अग्रवाल, डीआईओएस आरएस सिंह राजपूत, प्रबंधक विकास तायल, जिला विज्ञान क्लब समन्वय जयंत गुप्ता ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। तुषा शर्मा ने सरस्वती वंदना की।
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कवि हरिओम पवार ने कविता पाठ किया कि ‘आजादी के स्वर्ण जयंती वाले गीत सुनाऊं मैं, लेकिन सरगम वाला वातावरण कहां से लाऊं मैं, मेघ मल्हारों वाले अंत:करण कहा से लाऊं मैं।’ तुषा शर्मा ने ‘ये प्यार तेरा मुझ पर जादू कर देगा, जो कमी है जीवन में उनको भर देगा।’ जमुना प्रसाद उपाध्याय ने ‘नदी के घाट पर अगर सियासी लोग बस जाएं, तो प्यासे होठ बूंद-बूंद पानी को तरस जाएं।’ सुमनेश सुमन ने ‘संवारेगी निखारेगी, हंसाएगी रुलाएगी, कभी खुशियां लुटाएगी, कभी खुद रूठ जाएगी। सुनील जोगी ने ‘वो कविता है मानस बनकर, घर-घर गायी जाती है।’ प्रवीण शुक्ल ने ‘जहां भी कहोगे वहां बाढ़ को भेज दूंगा।’ समरस मुरसानी व दीपक वार्ष्णेय की कविता भी लोगों ने खूब पसंद की। कालेज के अध्यक्ष सुशील गोयल, जयसिंह वर्मा, विनीत तायल, विवेक तायल, डा. संदीप गुप्ता, डा. सुरेंद्र कुमार गुप्ता. शकुंतला गुप्ता, ललित गुप्ता, श्यामसुंदर पाठक, प्रधानाचार्य एचपीएन दुबे, अजय तिवारी, अमित अग्रवाल, तरुण शर्मा, सुभाष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, राकेश माहेश्वरी, अंकित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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