{"_id":"596e3de74f1c1bac178b4572","slug":"161500397031-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"18 दिन पुलिस स्टाफ के बिना चला जैथरा थाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
18 दिन पुलिस स्टाफ के बिना चला जैथरा थाना
Updated Tue, 18 Jul 2017 10:59 PM IST
विज्ञापन
police demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। सपा सरकार में जिले का एक थाना बिना पुलिस स्टाफ के 18 दिन तक चलता रहा। इन दिनों इस थाने पर न कोई एफआइआर लिखी गई और न ही एनसीआर। पूरा थाना स्टाफ बीमार रहा और अफसरों को भनक तक नहीं लगी। इस खबर को पढ़ कर आप भले ही चौंक गए होंगे, लेकिन ये सब सौ फीसदी सच है। जी हां तत्कालीन एसएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन तक रिपोर्ट नहीं दर्ज करने की शिकायत पर एक दागी दरोगा को बचाने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में यही लिखा है।
हुआ यूं कि कस्बा जैथरा के बिजेंद्र सिंह के साथ डकैती की वारदात मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए। तत्कालीन सीओ धर्मसिंह मार्च्छल ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को 18 अगस्त 2016 को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन एसओ ने 18 दिन बाद 3 सितंबर, 2016 को रिपोर्ट दर्ज की। जब पीड़ित ने विलंब से रिपोर्ट दर्ज करने की शिकातय कर कानूनी कार्रवाई की मांग की तो तत्कालीन एएसपी ने मामले की जांच खुद कर ली। एसएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने के पीछे जो तर्क दिए वे चौंकाने वाले हैं। एएसपी ने एसएसपी को भेजी जांच रिपोर्ट में लिखा कि है सीओ और आयोग का आदेश पहुंचने के वक्त थाने का पूरा स्टाफ डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट में था।
अब एएसपी की जांच रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो साफ है कि पूरा थाना 18 दिन तक बिना स्टाफ के चलता रहा और 18 दिन थाने में रिपोर्ट और एनसीआर दर्ज नहीं हुई। ऐसे में तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। यानी जैथरा थाने में तैनात पुलिस स्टाफ गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा और पुलिस अफसरों को भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
खुद की जांच रिपोर्ट बदलते रहे एएसपी
दागी दरोगा के मामले में तत्कालीन एएसपी और एएसपी अपराध अपनी जांच बदलते रहे। पीड़ित की शिकायत पर दोनों अधिकारी पीड़ित द्वारा कोई पूर्व सूचना थाने पर न दिए जाने का कथन अंकित कर सीओ के आदेश के अनुपालन की आख्या देते रहे। जब पीड़ित ने थाने जाकर सबूत सीएम ऑफिस भेजे, तो दोनों अधिकारी बैकफुट पर आ गए और रिपोर्ट बदल कर लिखा कि पीड़ित के परिवारीजनों का मेडिकल पुलिस ने ही कराया था। जबकि पहले की रिपोर्ट में दोनों अफसर मेडिकल कराने को नाकारते रहे।
विज्ञापन
हुआ यूं कि कस्बा जैथरा के बिजेंद्र सिंह के साथ डकैती की वारदात मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए। तत्कालीन सीओ धर्मसिंह मार्च्छल ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को 18 अगस्त 2016 को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन एसओ ने 18 दिन बाद 3 सितंबर, 2016 को रिपोर्ट दर्ज की। जब पीड़ित ने विलंब से रिपोर्ट दर्ज करने की शिकातय कर कानूनी कार्रवाई की मांग की तो तत्कालीन एएसपी ने मामले की जांच खुद कर ली। एसएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने के पीछे जो तर्क दिए वे चौंकाने वाले हैं। एएसपी ने एसएसपी को भेजी जांच रिपोर्ट में लिखा कि है सीओ और आयोग का आदेश पहुंचने के वक्त थाने का पूरा स्टाफ डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट में था।
विज्ञापन
अब एएसपी की जांच रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो साफ है कि पूरा थाना 18 दिन तक बिना स्टाफ के चलता रहा और 18 दिन थाने में रिपोर्ट और एनसीआर दर्ज नहीं हुई। ऐसे में तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। यानी जैथरा थाने में तैनात पुलिस स्टाफ गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा और पुलिस अफसरों को भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
खुद की जांच रिपोर्ट बदलते रहे एएसपी
दागी दरोगा के मामले में तत्कालीन एएसपी और एएसपी अपराध अपनी जांच बदलते रहे। पीड़ित की शिकायत पर दोनों अधिकारी पीड़ित द्वारा कोई पूर्व सूचना थाने पर न दिए जाने का कथन अंकित कर सीओ के आदेश के अनुपालन की आख्या देते रहे। जब पीड़ित ने थाने जाकर सबूत सीएम ऑफिस भेजे, तो दोनों अधिकारी बैकफुट पर आ गए और रिपोर्ट बदल कर लिखा कि पीड़ित के परिवारीजनों का मेडिकल पुलिस ने ही कराया था। जबकि पहले की रिपोर्ट में दोनों अफसर मेडिकल कराने को नाकारते रहे।