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मनमानी बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला डेमाे
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मैनपुरी। गर्मी में मनमानी से हो रही बिजली कटौती ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी का कारण बन रही है। शहरी क्षेत्रों में तो विभाग प्राथमिकता पर फाल्ट सही कराता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अनदेखा कर दिया जाता है। बिजली कब आएगी यह पूछने के लिए ग्रामीण जब बिजली अधिकारियों को फोन मिलाते हैं तो फोन नहीं उठता है।
भोगांव और दन्नाहार क्षेत्र के गांवों में लोग बिजली कटौती से परेशान हैं। यहां के सैकड़ों गांवों को रोजाना तार टूटने या फाल्ट के कारण घंटों अंधेरे में रहना पड़ता है। इतना ही नहीं गेहूं की कटाई के बाद भी रोजाना दिन में आठ घंटे तक की कटौती की जा रही है। सुबह दस बजे तक जहां बिजली की आंख मिचोली चलती रहती है, तो वहीं दस बजे के बाद शाम छह बजे तक बिजली गायब हो जाती है। शाम छह बजे भी लाइट आएगी या नहीं इसका कोई ठिकाना नहीं होता है।
वहीं शाम को लाइट आने के बाद भी रात दस बजे तक आती जाती रहती है। सप्ताह में चार दिन ऐसा होता है कि जर्जर हो चुके तार रात में ही टूट जाते हैं। इससे बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। रात भर लोगों को बैठकर ही गुजारनी पड़ती है। आलीपुर खेड़ा फीडर से जुड़े गांवों में पुराने तार लोगों के लिए सबसे बड़ा संकट हैं। यहां से जुड़ने वाले गांव आलीपुर, मानिकपुर, विक्रमपुर, बरहट, नगरिया, कल्यानपुर, छतुरीबरी समेत आसपास के गांवों में लोगों को तार टूटने से मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
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बुधवार रात को मानिकपुर में रात साढ़े दस बजे तार टूट गया था। इसके बाद लोगों ने लाइनमैन को भी फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। रातभर उन्हें गर्मी में ही परेशान होना पड़ा। दूसरे दिन सुबह दस बजे करीब 12 घंटे बाद आपूर्ति शुरू हो सकी। इन सभी गांवों में बंच केबल डालने का काम चल रहा है, लेकिन धीमी गति से कार्य होने के चलते महीनों बाद भी केबिल नहीं डाली जा सकी। इसके चलते गांवों में पड़े जर्जर तार लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
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भोगांव और दन्नाहार क्षेत्र के गांवों में लोग बिजली कटौती से परेशान हैं। यहां के सैकड़ों गांवों को रोजाना तार टूटने या फाल्ट के कारण घंटों अंधेरे में रहना पड़ता है। इतना ही नहीं गेहूं की कटाई के बाद भी रोजाना दिन में आठ घंटे तक की कटौती की जा रही है। सुबह दस बजे तक जहां बिजली की आंख मिचोली चलती रहती है, तो वहीं दस बजे के बाद शाम छह बजे तक बिजली गायब हो जाती है। शाम छह बजे भी लाइट आएगी या नहीं इसका कोई ठिकाना नहीं होता है।
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वहीं शाम को लाइट आने के बाद भी रात दस बजे तक आती जाती रहती है। सप्ताह में चार दिन ऐसा होता है कि जर्जर हो चुके तार रात में ही टूट जाते हैं। इससे बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। रात भर लोगों को बैठकर ही गुजारनी पड़ती है। आलीपुर खेड़ा फीडर से जुड़े गांवों में पुराने तार लोगों के लिए सबसे बड़ा संकट हैं। यहां से जुड़ने वाले गांव आलीपुर, मानिकपुर, विक्रमपुर, बरहट, नगरिया, कल्यानपुर, छतुरीबरी समेत आसपास के गांवों में लोगों को तार टूटने से मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
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बुधवार रात को मानिकपुर में रात साढ़े दस बजे तार टूट गया था। इसके बाद लोगों ने लाइनमैन को भी फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। रातभर उन्हें गर्मी में ही परेशान होना पड़ा। दूसरे दिन सुबह दस बजे करीब 12 घंटे बाद आपूर्ति शुरू हो सकी। इन सभी गांवों में बंच केबल डालने का काम चल रहा है, लेकिन धीमी गति से कार्य होने के चलते महीनों बाद भी केबिल नहीं डाली जा सकी। इसके चलते गांवों में पड़े जर्जर तार लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।