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चांद के दीदार के साथ पहला रोजा आज
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चांद का दीदार करते लोग।
- फोटो : demo pic
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मैनपुरी/करहल। रहमतों और बरकतों के माह रमजान की शुरुआत हो गई है। पहला रोजा मंगलवार को रखा जाएगा। रमजान को देखते हुए मस्जिदों में विशेष साफ सफाई और पानी के इंतजामात किए गए हैं। पूरे महीने नमाज और रोजा इफ्तार के लिए वहां खासी भीड़ जुटेगी।
सोमवार शाम को चांद देखने के लिए रोजेदारों में उत्सुकता रही। चांद दिखते ही मस्जिदों में रात को तरावीह पढ़े जाने के साथ मंगलवार की सुबह से रोजे रखे जाने की शुरुआत हो गई। इसके लिए मुस्लिम समाज के पुरुष, महिलाओं व युवाओं ने सभी तैयारियां पहले से ही कर ली थीं। रमजान के दौरान मुस्लिम समाज में लोग रोजा रखते हैं। ज्यादातर लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं। बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अशक्त तथा कामगार लोग भी पहला और आखिरी रोजा तो रखते ही हैं। पूरे महीने इबादत का दौर चलता है।
मुस्लिम समाज में ऐसी धारणा है माहे रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत का खजाना लुटाते हैं। इस दौरान हर नेकी का सत्तर गुना पुण्य मिलता है। हालांकि इस बार माहे रमजान भीषण गर्मी के दौर में पड़ा है, फिर भी मुस्लिम समाज में इसे लेकर विशेष उत्साह है। रमजान माह में सहरी और इफ्तार के लिए विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री दुकानों पर नजर आने लगी हैं। खजूर की खरीदारी करने के लिए दुकानों पर देर शाम तक भीड़ लगी रही। खजूर से रोजा खेलने को सुन्नत माना जाता है।
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सोमवार शाम को चांद देखने के लिए रोजेदारों में उत्सुकता रही। चांद दिखते ही मस्जिदों में रात को तरावीह पढ़े जाने के साथ मंगलवार की सुबह से रोजे रखे जाने की शुरुआत हो गई। इसके लिए मुस्लिम समाज के पुरुष, महिलाओं व युवाओं ने सभी तैयारियां पहले से ही कर ली थीं। रमजान के दौरान मुस्लिम समाज में लोग रोजा रखते हैं। ज्यादातर लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं। बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अशक्त तथा कामगार लोग भी पहला और आखिरी रोजा तो रखते ही हैं। पूरे महीने इबादत का दौर चलता है।
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मुस्लिम समाज में ऐसी धारणा है माहे रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत का खजाना लुटाते हैं। इस दौरान हर नेकी का सत्तर गुना पुण्य मिलता है। हालांकि इस बार माहे रमजान भीषण गर्मी के दौर में पड़ा है, फिर भी मुस्लिम समाज में इसे लेकर विशेष उत्साह है। रमजान माह में सहरी और इफ्तार के लिए विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री दुकानों पर नजर आने लगी हैं। खजूर की खरीदारी करने के लिए दुकानों पर देर शाम तक भीड़ लगी रही। खजूर से रोजा खेलने को सुन्नत माना जाता है।
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