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गेल ने 20 माह पहले ही रिजेक्ट कर दी थी हाईवे की लाइन
Updated Sun, 11 Jun 2017 11:43 PM IST
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Gas Pipe Line
- फोटो : File Photo
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फिरोजाबाद। हाईवे में दबी गैस की पाइप लाइन किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। खतरे को भांपते हुए गेल ने 20 माह पहले पाइप लाइन को रिजेक्ट कर दिया था। हाइवे पर संचालित एक दर्जन से अधिक इकाइयों को गैस न देने के लिए नोटिस भी जारी किए।
हाईकोर्ट ने टीटीजेड में कोयले के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद वर्ष 1997 में गेल ने शहर में अंडरग्राउंड लाइन डालकर कांच इकाइयों का गैस मुहैया कराई थी। वर्ष 2000 से एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण के अंतर्गत हाईवे एवं सर्विस रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया था। ऐसे में गेल द्वारा डाली गई पाइप लाइन हाइवे एवं सर्विस रोड में दब गई। हाईवे पर पड़ी गैस लाइन से कोटला चुंगी पर वर्मा पेट्रोल पंप के निकट तथा जाटवपुरी के निकट दो बार गैस लीकेज के कारण बड़े हादसे हुए। गेल ने अक्टूबर -15 में पाइप लाइन की मेंटीनेंस करने से हाथ खड़े कर दिए थे।
गेल द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर उद्योग विभाग ने हाईवे पर संचालित 12 से अधिक इकाइयों को नोटिस जारी किए थे, जिसमें कहा कि वह औद्योगिक क्षेत्र में अपनी इकाइयां शिफ्ट कर लें, वर्ना निर्धारित समय के बाद गैस मिलना संभव नहीं होगा। गेल के नोटिस से उद्यमियों में खलबली मच गई। उन्होंने इकाइयां शिफ्ट करने की बजाए गेल पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उद्यमियों के बढ़ते दबाव के कारण गेल ने कांट्रैक्ट का रिन्यूवल कर दिया था, तब से लगातार गैस की आपूर्ति दी जा रही है। यदि प्रशासन सख्ती बरतते हुए इकाइयों को औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट कराने पर जोर देता तो शायद जाटवपुरी चौराहे के निकट घटना होने से बच सकती थी।
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समन्वय समिति ने भी नहीं दिखाई गंभीरता
तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी ने गैस लाइन की निगरानी के लिए समन्वय समिति गठित की थी। समिति में सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, एसडीएम सदर, जीएम डीआईसी, बीएसएनएल के मंडल अभियंता, एक्सईएन पीडब्लूडी, एक्सईएन विद्युत, एक्सईएन नगर निगम, एक्सईएन जलनिगम, विकास प्राधिकरण और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को शामिल थे, समिति में शामिल अफसरों ने लाइन की निगरानी में कोई रुचि नहीं ली।
कारखानों को थमा दिए हैं नोटिस
गेल गैस लि. ने सरस्वती ग्लास, सपना ग्लास, ए.एस. मिर्जा ग्लास, सौभाग्य ग्लास, भूरे खां ग्लास, नेशनल ग्लास, दिनेश ग्लास, कोहिनूर ग्लास, एलोरा ग्लास, सीमा ग्लास, विशेष ग्लास व मीरा ग्लास।
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हाईकोर्ट ने टीटीजेड में कोयले के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद वर्ष 1997 में गेल ने शहर में अंडरग्राउंड लाइन डालकर कांच इकाइयों का गैस मुहैया कराई थी। वर्ष 2000 से एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण के अंतर्गत हाईवे एवं सर्विस रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया था। ऐसे में गेल द्वारा डाली गई पाइप लाइन हाइवे एवं सर्विस रोड में दब गई। हाईवे पर पड़ी गैस लाइन से कोटला चुंगी पर वर्मा पेट्रोल पंप के निकट तथा जाटवपुरी के निकट दो बार गैस लीकेज के कारण बड़े हादसे हुए। गेल ने अक्टूबर -15 में पाइप लाइन की मेंटीनेंस करने से हाथ खड़े कर दिए थे।
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गेल द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर उद्योग विभाग ने हाईवे पर संचालित 12 से अधिक इकाइयों को नोटिस जारी किए थे, जिसमें कहा कि वह औद्योगिक क्षेत्र में अपनी इकाइयां शिफ्ट कर लें, वर्ना निर्धारित समय के बाद गैस मिलना संभव नहीं होगा। गेल के नोटिस से उद्यमियों में खलबली मच गई। उन्होंने इकाइयां शिफ्ट करने की बजाए गेल पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उद्यमियों के बढ़ते दबाव के कारण गेल ने कांट्रैक्ट का रिन्यूवल कर दिया था, तब से लगातार गैस की आपूर्ति दी जा रही है। यदि प्रशासन सख्ती बरतते हुए इकाइयों को औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट कराने पर जोर देता तो शायद जाटवपुरी चौराहे के निकट घटना होने से बच सकती थी।
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समन्वय समिति ने भी नहीं दिखाई गंभीरता
तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी ने गैस लाइन की निगरानी के लिए समन्वय समिति गठित की थी। समिति में सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, एसडीएम सदर, जीएम डीआईसी, बीएसएनएल के मंडल अभियंता, एक्सईएन पीडब्लूडी, एक्सईएन विद्युत, एक्सईएन नगर निगम, एक्सईएन जलनिगम, विकास प्राधिकरण और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को शामिल थे, समिति में शामिल अफसरों ने लाइन की निगरानी में कोई रुचि नहीं ली।
कारखानों को थमा दिए हैं नोटिस
गेल गैस लि. ने सरस्वती ग्लास, सपना ग्लास, ए.एस. मिर्जा ग्लास, सौभाग्य ग्लास, भूरे खां ग्लास, नेशनल ग्लास, दिनेश ग्लास, कोहिनूर ग्लास, एलोरा ग्लास, सीमा ग्लास, विशेष ग्लास व मीरा ग्लास।