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एएसआई अफसर मेहरबान तो डब्ल्यूएमएफ पहलवान
Updated Tue, 06 Jun 2017 07:51 PM IST
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आगरा। मंत्रालय के अफसर मेहरबान हों तो फिर किसी का क्या डर। चाहे कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दें या अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को चीन का। विदेशी एनजीओ वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड एएसआई अफसरों की शह पर ऐसे कारनामे करने के बाद भी इन दिनों पहलवान है।
रिवर फ्रंट गार्डन के नाम पर एत्माद्दौला के बागीचे, संरक्षण और पेंटिंग को जब एनजीओ को एएसआई के स्थानीय अधिकारियों ने छूने भी न दिया तो दिल्ली में बैठे अफसरों की ही शह पर एत्माद्दौला स्मारक के अंदर सीवेज ट्रीटमेंट और वाटर ट्रीटमेंट के बड़े प्रोजेक्ट बनवाए गए। इसे पूरा करने का जिम्मा भी एनजीओ को ही दिया गया।
एत्माद्दौला के संरक्षण पर 1.42 करोड़ की योजना हो या फिर 19 लाख रुपये से पेड़ लगाने की। डाक्यूमेंटेशन तक ही सीमित विदेशी एनजीओ वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड पर एएसआई अफसरों ने हाथ रखा तो करोड़ों का एसटीपी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट तैयार किया गया।
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इन्हीं अफसरों ने खत्म हो चुके मुगलिया गार्डन की जगह एत्माद्दौला और महताब बाग के लिए एमओयू कराया। दरअसल, महताब बाग से ताज दिखाकर और मुगल शहंशाह जहांगीर और नूरजहां के नाम पर एत्माद्दौला के लिए दुनिया भर से चंदा ज्यादा इकट्ठा किया जा सकता है। ऐसे में मटियामेट हो चुके मुगलिया गार्डन को विकसित करने की जगह दोनों स्मारकों के नाम पर प्रोजेक्ट बनवाए गए।
ये बागीचे एएसआई के पास
बाग ए शाह नवाज खान, बुलंद बाग, रामबाग, चीनी का रोजा, एत्माद्दौला, 11 सिड्डी, महताब बाग, हवेली खान ए दुर्रान, हवेली आगा खां, ताजमहल, खान ए आलम, पादशाही किला, जफर खां मकबरा, लाल मस्जिद, जसवंत सिंह की छतरी
इनका खत्म हो चुका अस्तित्व
हवेली आसफ खां, हवेली आलमगीर, हवेली आलमगीर, मस्जिद मुबारक मंजिल, हवेली शाईस्ता खां, हवेली जाफर खां, शाईस्ता खां का मकबरा, हवेली वजीर खां, हवेली मुकीम खां, हवेली खलील खां, बाग ए राय शिवदास, बाग ए हाकिम काजिम अली को कोई अवशेष नहीं नजर आता।
इन बागों पर बस गई आबादी
बाग ए जहांआरा, बाग ए ख्वाजा, बाग ए सुल्तान परवेज, मोती बाग पादशाही, बाग पादशाही, लाल बाग पादशाही, चार बाग पादशाही, दाराशिकोह की हवेली
कारीडोर में पुनर्जीवित होंगे ये बाग
हवेली इस्लाम खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान को हेरिटेज कारीडोर में मुगल बागीचों के नाम पर एएसआई द्वारा ही पुनर्जीवित किया जाएगा।
नजूल की जमीन पर ये बाग
बाग ए मुसाबी खां सद्र, अज्ञात उद्यान, बाग पादशाही, महावत खान, असालत खान हवेली बने है, लेकिन एनजीओ ने इन्हें भी विकास के लिए न चुना
झांसे में आ गया विकास प्राधिकरण
मुगल गार्डन पुनर्जीवित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड के झांसे में आगरा विकास प्राधिकरण भी आ गया। पहले पांच लाख रुपये पथकर से फूंक डाले और 17 सदस्यीय कमेटी भी बना दी। यह कमेटी भी अब तक उन बागों की तलाश भी नहीं कर पाई। विदेशी एनजीओ ने पुराने बाग तलाशने की जगह महताब बाग और एत्माद्दौला को ही शिकार बना लिया।
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रिवर फ्रंट गार्डन के नाम पर एत्माद्दौला के बागीचे, संरक्षण और पेंटिंग को जब एनजीओ को एएसआई के स्थानीय अधिकारियों ने छूने भी न दिया तो दिल्ली में बैठे अफसरों की ही शह पर एत्माद्दौला स्मारक के अंदर सीवेज ट्रीटमेंट और वाटर ट्रीटमेंट के बड़े प्रोजेक्ट बनवाए गए। इसे पूरा करने का जिम्मा भी एनजीओ को ही दिया गया।
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एत्माद्दौला के संरक्षण पर 1.42 करोड़ की योजना हो या फिर 19 लाख रुपये से पेड़ लगाने की। डाक्यूमेंटेशन तक ही सीमित विदेशी एनजीओ वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड पर एएसआई अफसरों ने हाथ रखा तो करोड़ों का एसटीपी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट तैयार किया गया।
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इन्हीं अफसरों ने खत्म हो चुके मुगलिया गार्डन की जगह एत्माद्दौला और महताब बाग के लिए एमओयू कराया। दरअसल, महताब बाग से ताज दिखाकर और मुगल शहंशाह जहांगीर और नूरजहां के नाम पर एत्माद्दौला के लिए दुनिया भर से चंदा ज्यादा इकट्ठा किया जा सकता है। ऐसे में मटियामेट हो चुके मुगलिया गार्डन को विकसित करने की जगह दोनों स्मारकों के नाम पर प्रोजेक्ट बनवाए गए।
ये बागीचे एएसआई के पास
बाग ए शाह नवाज खान, बुलंद बाग, रामबाग, चीनी का रोजा, एत्माद्दौला, 11 सिड्डी, महताब बाग, हवेली खान ए दुर्रान, हवेली आगा खां, ताजमहल, खान ए आलम, पादशाही किला, जफर खां मकबरा, लाल मस्जिद, जसवंत सिंह की छतरी
इनका खत्म हो चुका अस्तित्व
हवेली आसफ खां, हवेली आलमगीर, हवेली आलमगीर, मस्जिद मुबारक मंजिल, हवेली शाईस्ता खां, हवेली जाफर खां, शाईस्ता खां का मकबरा, हवेली वजीर खां, हवेली मुकीम खां, हवेली खलील खां, बाग ए राय शिवदास, बाग ए हाकिम काजिम अली को कोई अवशेष नहीं नजर आता।
इन बागों पर बस गई आबादी
बाग ए जहांआरा, बाग ए ख्वाजा, बाग ए सुल्तान परवेज, मोती बाग पादशाही, बाग पादशाही, लाल बाग पादशाही, चार बाग पादशाही, दाराशिकोह की हवेली
कारीडोर में पुनर्जीवित होंगे ये बाग
हवेली इस्लाम खान, हवेली आजम खान, हवेली मुगल खान और हवेली इस्लाम खान को हेरिटेज कारीडोर में मुगल बागीचों के नाम पर एएसआई द्वारा ही पुनर्जीवित किया जाएगा।
नजूल की जमीन पर ये बाग
बाग ए मुसाबी खां सद्र, अज्ञात उद्यान, बाग पादशाही, महावत खान, असालत खान हवेली बने है, लेकिन एनजीओ ने इन्हें भी विकास के लिए न चुना
झांसे में आ गया विकास प्राधिकरण
मुगल गार्डन पुनर्जीवित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड के झांसे में आगरा विकास प्राधिकरण भी आ गया। पहले पांच लाख रुपये पथकर से फूंक डाले और 17 सदस्यीय कमेटी भी बना दी। यह कमेटी भी अब तक उन बागों की तलाश भी नहीं कर पाई। विदेशी एनजीओ ने पुराने बाग तलाशने की जगह महताब बाग और एत्माद्दौला को ही शिकार बना लिया।