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ठेकेदार की हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
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कासगंज। अपर जिला सत्र न्यायाधीश द्वितीय धीरेंद्र कुमार ने ठेकेदार की हत्या के आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। कोर्ट ने आरोपी पर 51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सुन्नगढ़ी के नगला खमानी निवासी आशाराम (35) पुत्र रामप्रसाद गुजरात के भट्ठों के लिए मजदूरों की ठेकेदारी करता था। गांव के ही राम बाबू, जयशिव भी मजदूरों की ठेकेदारी करते हैं। 25 जनवरी 2012 को आशाराम मजदूरों की बात करने के लिए रामबाबू और जयशिव के साथ अशोकपुर, अमांपुर गया। यहां उसका उनसे विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने विवाद को शांत करा दिया लेकिन रामबाबू और जयशिव आशाराम से रंजिश मानने लगे। 26 जनवरी 2012 को आशाराम अपने गांव लौट रहा था। तभी रास्ते में रामबाबू, जयशिव और एक अज्ञात ने उसे रोक लिया और रामबाबू ने तमंचे से उस पर फायर कर दिया। हमले में आशाराम गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मामले में आशाराम के पिता ने आरोपियों को नामजद करते हुए मामला दर्ज करा दिया। विवेचक ने रामबाबू तथा जयशिव के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता सतवीर सिंह राजू ने मामले की पैरवी की। कोर्ट ने गवाहों के बयानों एवं पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य के आधार पर रामबाबू को हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की राशि में 40 हजार की धनराशि पीड़ित पक्ष को दी जाएगी। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में जयशिव को बरी कर दिया। जुुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
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सुन्नगढ़ी के नगला खमानी निवासी आशाराम (35) पुत्र रामप्रसाद गुजरात के भट्ठों के लिए मजदूरों की ठेकेदारी करता था। गांव के ही राम बाबू, जयशिव भी मजदूरों की ठेकेदारी करते हैं। 25 जनवरी 2012 को आशाराम मजदूरों की बात करने के लिए रामबाबू और जयशिव के साथ अशोकपुर, अमांपुर गया। यहां उसका उनसे विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने विवाद को शांत करा दिया लेकिन रामबाबू और जयशिव आशाराम से रंजिश मानने लगे। 26 जनवरी 2012 को आशाराम अपने गांव लौट रहा था। तभी रास्ते में रामबाबू, जयशिव और एक अज्ञात ने उसे रोक लिया और रामबाबू ने तमंचे से उस पर फायर कर दिया। हमले में आशाराम गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मामले में आशाराम के पिता ने आरोपियों को नामजद करते हुए मामला दर्ज करा दिया। विवेचक ने रामबाबू तथा जयशिव के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता सतवीर सिंह राजू ने मामले की पैरवी की। कोर्ट ने गवाहों के बयानों एवं पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य के आधार पर रामबाबू को हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की राशि में 40 हजार की धनराशि पीड़ित पक्ष को दी जाएगी। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में जयशिव को बरी कर दिया। जुुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
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