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जले हुए आलू खाकर बच्चों ने भरा पेट
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:02 PM IST
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जले हुए आलू खाकर बच्चों ने भरा पेट
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
पटियाली के खादर के गांव में बुधवार से शुरू हुआ आग की तबाही का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। अग्नि प्रभावित ग्रामीण खुले आसमान के नीचे घूमने को मजबूर हैं। वहीं बच्चे भी भूख से व्याकुल हैं। लोग अपने बच्चों का पेट जले हुए आलू खिलाकर भर रहे हैं। प्रभावित परिवारों के हालातों का मंजर यह है कि कोई हालात देखकर द्रवित हो उठे।
बुधवार को सबसे पहले नगला नियाज अली में आग ने तांडव मचाया। यहां 36 आवासीय और गैर आवासीय कच्चे मकानों और घेर में आग की घटनाओं ने ग्रामीणों का सब कुछ मिटा दिया। गांव के 175 घरों में से 155 मकान जल कर राख हो गए। अब इन गांव के ग्रामीण खुले आसमान के नीचे जहां तहां खेत में पेड़ों के नीचे अपना डेरा जमाए हैं। रिकैरा गांव में गुरुवार को सुबह के समय भूख से व्याकुल बच्चे अपने घरों में जले सामान को टटोलते नजर आए। एक घर में आग से जले आलू दिखाई दिए। बच्चों ने ये आलू उठाकर खाने शुरू कर दिए।
नगला नियाजअली की हुस्न बानो ने बताया कि घर में सब कुछ जल गया। खाने पीने की दिक्कत है। बच्चों का कैसे पेट भरें। छोटे छोटे बच्चों के सामने खाने का संकट है।
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रिकैरा गांव के नेपाल सिंह ने बताया कि प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था की है, लेकिन छोटे बच्चे बेहद परेशान हैं। उनके पेट भरने का संकट बना हुआ है।
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पटियाली के खादर के गांव में बुधवार से शुरू हुआ आग की तबाही का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। अग्नि प्रभावित ग्रामीण खुले आसमान के नीचे घूमने को मजबूर हैं। वहीं बच्चे भी भूख से व्याकुल हैं। लोग अपने बच्चों का पेट जले हुए आलू खिलाकर भर रहे हैं। प्रभावित परिवारों के हालातों का मंजर यह है कि कोई हालात देखकर द्रवित हो उठे।
बुधवार को सबसे पहले नगला नियाज अली में आग ने तांडव मचाया। यहां 36 आवासीय और गैर आवासीय कच्चे मकानों और घेर में आग की घटनाओं ने ग्रामीणों का सब कुछ मिटा दिया। गांव के 175 घरों में से 155 मकान जल कर राख हो गए। अब इन गांव के ग्रामीण खुले आसमान के नीचे जहां तहां खेत में पेड़ों के नीचे अपना डेरा जमाए हैं। रिकैरा गांव में गुरुवार को सुबह के समय भूख से व्याकुल बच्चे अपने घरों में जले सामान को टटोलते नजर आए। एक घर में आग से जले आलू दिखाई दिए। बच्चों ने ये आलू उठाकर खाने शुरू कर दिए।
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नगला नियाजअली की हुस्न बानो ने बताया कि घर में सब कुछ जल गया। खाने पीने की दिक्कत है। बच्चों का कैसे पेट भरें। छोटे छोटे बच्चों के सामने खाने का संकट है।
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रिकैरा गांव के नेपाल सिंह ने बताया कि प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था की है, लेकिन छोटे बच्चे बेहद परेशान हैं। उनके पेट भरने का संकट बना हुआ है।